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कंटेंट क्रिएशन का सच: क्या वाकई रील बनाने वाले हर क्रिएटर की भर रही जेब या असल में कोई और कमा रहा पैसा?

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भारत कंटेंट क्रिएटर्स का एक बड़ा मार्केट है। Photo- freepik.



टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। कंटेंट क्रिएटर शब्द से लोग अब अनजान नहीं है और इसे कमाने के एक जरिए के तौर पर काफी लोग पहचानते हैं। खासकर Gen Z लोग अक्सर फॉलोअर्स, लाइक्स और वायरल कंटेंट के बारे में बात करते हुए मिल जाते हैं। भारत में लगभग 20-25 लाख लोग मोबाइल स्क्रीन पर फेम और मनी पाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। लेकिन सवाल ये है कि असल में कितने लोग सच में कमा रहे हैं और कंटेंट क्रिएटर इकॉनमी की सच्चाई क्या है? आइए इसी पर बात करते हैं।

बीते कुछ सालों में लोगों ने कंटेंट क्रिएशन को कमाई के जरिए के तौर पर देखना शुरू किया है। हालांकि, काफी समय तक रिश्तेदार इन कंटेंट क्रिएटर्स को \“बेरोजगार\“ कहते थे। लेकिन आज स्थिति बदल गई है।

BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मई में मुंबई में हुए वेव्स समिट में यह बताया गया कि भारत के डिजिटल क्रिएटर्स सालाना लगभग $350 बिलियन के कस्टमर खर्च को प्रभावित कर रहे हैं और अगले पांच सालों में ये आंकड़ा 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। इसका मतलब है कि भारत की कंटेंट क्रिएटर इकॉनमी एक लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी।

भारत सरकार ने भी इसे बहुत गंभीरता से लिया है। मार्च 2025 में, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि क्रिएटर इकॉनमी के लिए 100 करोड़ डॉलर आवंटित किए जाएंगे।

बात सिंपल है, जिन क्रिएटर्स का एक से डेढ़ मिनट का कंटेंट आप अपनी मोबाइल स्क्रीन पर देखते हैं, वे असल में देश के लिए एक बड़ी सेल्स फोर्स बन रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में 20 से 25 लाख एक्टिव डिजिटल क्रिएटर्स हैं जिनके 1,000 से ज्यादा फॉलोअर्स हैं और जो अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर रेगुलर कंटेंट पोस्ट करते हैं। और ये कहने की जरूरत नहीं है कि सस्ते डेटा की वजह से Gen Z के बीच इस फॉर्मूले को कैश करने की होड़ दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

  
असल में कितने लोग इससे कमा रहे हैं?

जवाब आपको चौंका सकता है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 8 से 10 प्रतिशत क्रिएटर्स ही अपने कंटेंट से पैसे कमा पा रहे हैं।

दूसरे शब्दों में कहें तो, 20 से 25 लाख एक्टिव क्रिएटर्स में से केवल 2 से 2.5 लाख ही कमा रहे हैं। बाकी 90-92 प्रतिशत क्रिएटर्स या तो बहुत कम कमाते हैं या सोशल मीडिया उनकी कमाई का मुख्य जरिया नहीं है।
कंटेंट क्रिएटर्स असल में ये पैसा कैसे कमाते हैं?

टॉप क्रिएटर्स बड़े ब्रांड्स के साथ पार्टनरशिप करते हैं; क्योंकि उनके पास बड़ी ऑडियंस होती है, इसलिए वे अपने वीडियो के जरिए एक्सक्लूसिव कंटेंट बेचते हैं। इसके अलावा, वे ब्रांड स्पॉन्सरशिप, प्लेटफॉर्म एड्स, एफिलिएट मार्केटिंग, सब्सक्रिप्शन और प्रीमियम कंटेंट से भी कमाते हैं।
लेकिन सच में अमीर कौन बन रहा है?

ये सच है कि भारत में कई कंटेंट क्रिएटर्स करोड़पति बन गए हैं, लेकिन जिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने उन्हें करोड़पति बनाया है, वे इस गेम के असली विनर हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में YouTube के इंडियन ऑपरेशन्स का रेवेन्यू 14,300 करोड़ रुपये था, जबकि Facebook (मेटा) का टर्नओवर भी हजारों करोड़ में था।

ऐसे में कहा जा सकता है कि कंटेंट क्रिएशन एक बड़ा मार्केट है, लेकिन सक्सेस मिलना भी उतना ही मुश्किल भी है। साथ में अनसक्सेसफुल होने का साइकोलॉजिकल प्रेशर भी।

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