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लोकभवन में रविवार को होगी समीक्षा बैठक।
दीनानाथ साहनी, पटना। राज्यपाल एवं कुलाधिपति आरिफ मोहम्मद खां रविवार को जब बिहार लोक भवन में कुलपतियों की बैठक की अध्यक्षता करेंगे तब पिछली बैठक (18 जून 2025) में विश्वविद्यालयों के लिए दिए गए टास्क के बारे में जानकारी जरूर लेंगे।
तब तमाम कुलपतियों के लिए अपने अच्छे कार्य प्रदर्शन को भुनाने का बेहतर मौका होगा। 25 दिसंबर 2024 को बिहार के राज्यपाल के रूप में शपथ लेने बाद कुलाधिपति के रूप में आरिफ मोहम्मद खो ने कुलपतियों की पहली बैठक में राज्य के विश्वविद्यालयों के छात्रावासों में अवैध रूप से कब्जा जमाये असामाजिक तत्वों को अविलंब हटाने को आदेश दिया था।
उन्होंने स्नातक एवं स्नातकोत्तर के परीक्षा कैलेंडर का अनुपालन, सेमेस्टर सिस्टम और शोध एवं नवाचार, कक्षाओं में शिक्षकों तथा विद्यार्थियों की उपस्थिति बनाए रखने को लेकर भी आदेश दिया था।
206 दिनों के बाद राज्यपाल एवं कुलाधिपति आरिफ मोहम्मद खां कुलपतियों के साथ बैठक में यह जानने के उत्सुक होंगे कि उनके दिए दिशा-निर्देश का अनुपालन कितना हुआ?
पिछली बैठक में राज्यपाल ने कुलपतियों को रोड माडल बनने और छात्र-छात्राओं के साथ न्याय करने का निर्देश दिया था।
साथ ही, उन्होंने एकेडमिक कैलेंडर का अनुपालन, परीक्षा व्यवस्था की पवित्रता व पारदर्शिता बनाने, हर स्तर पर अनुशासन को प्राथमिकता देने तथा छात्रावासों की अनुशासनिक प्रबंधन के संबंध में भी निर्देश दिया था।
इन निर्देशों पर कितने कुलपति खरे उतरे, यह भी राज्यपाल जानने के लिए उत्सुक होंगे। पिछली बैठक में राज्यपाल ने एक कमेटी गठित कर विश्वविद्यालयों की समस्याओं एवं उनके निदान से संबंधित सुझाव देने का निर्देश दिया था, उस कमेटी ने समस्याओं का समाधान हेतु आए सुझावों पर कितना अमल किया, इस पर भी राज्यपाल बैठक में फीडबैक लेंगे।
नवगठित उच्च शिक्षा विभाग के स्वरूप पर भी चर्चा
राज्यपाल की अध्यक्षता में होनेवाली बैठक में बिहार सरकार द्वारा नवगठित उच्च शिक्षा विभाग के स्वरूप पर भी चर्चा होना लाजिमी है।
इस पक्ष से राज्यपाल को अवगत कराने के लिए बैठक में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार, सचिव राजीव रौशन, उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. एनके अग्रवाल एवं शिक्षा विभाग के सलाहकार बैद्यनाथ यादव समेत अन्य उच्च अधिकारी शामिल होंगे।
बैठक को इस मायने में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा कि राज्य में नई सरकार के गठन में उच्च शिक्षा को पृथक विभाग बनाये जाने के बाद राज्यपाल की अध्यक्षता में कुलपतियों व सरकार के साथ यह पहली बैठक होगी।
बैठक में उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय कायम करने पर विशेष तौर पर चर्चा होगी। इस बात की भी समीक्षा होगी कि विश्वविद्यालयों में \“\“समर्थ\“\“ पोर्टल के कार्यान्वयन की क्या स्थिति है।
पूर्व में विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों का कार्यान्वयन विश्वविद्यालयों ने किस हद तक किया है, यह भी देखा जाएगा। बैठक में सात निश्चय-3 में शामिल \“\“उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य\“\“ पर भी फोकस होगा।
इसमें राज्य के पुराने प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों को सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाना तथा प्रदेश में नयी एजुकेशन सिटी का निर्माण किया जाना शामिल है। इसके साथ ही डिग्री कालेज विहीन 360 प्रखंडों में एक-एक डिग्री महाविद्यालय भी खोले जाने हैं। |
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