search

संचार क्रांति ने खत्म की दूरी, अब तो सेकेंड में सीमाएं लांघ जाते हैं विचार

cy520520 2026-1-10 19:26:44 views 1243
  

प्रोफेसर गंगा प्रसाद शर्मा गुणशेखर



जागरण संवाददाता, लखनऊ : एआइ के टूल्स पर मिलने वाली गलत जानकारियों की चिंता और डिजिटल क्रांति में बढ़ती हिंदी की हिस्सेदारी। ऐसे बिंदुओं पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने युवाओं को डिजिटल हिंदी संचार माध्यमों के भविष्य और उसकी चुनौतियों से सजग किया।

लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में शनिवार को प्रवासी भारतीय दिवस और विश्व हिंदी दिवस पर आयोजित हिंदी का प्रवासी : प्रवासी की हिंदी विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने युवाओं को सही जानकारी के स्रोतों से भी अवगत कराया।  
डिजिटल हिंदी संचार

भविष्य एवं चुनौतियां विषय पर चर्चा करते हुए लवि के कंप्यूटर विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. पुनीत मिश्र ने कहा कि संचार क्रांति ने दूरी को दूरी नहीं रहने दिया। विचार अब सेकेंड में सीमाएं लांघ जाते हैं। संचार क्रांति ने भाषा को स्थानीय से वैश्विक बना दिया। अब हर भाषा की आवाज विश्व तक पहुंच सकती है।

प्रो. पुनीत मिश्र ने आगे कहा कि डिजिटल क्रांति ने भाषा और संचार दोनों की प्रगति को बदला है। भारत में इंटरनेट, स्मार्ट फोन और सस्ते इंटरनेट डाटा के कारण हिंदी भाषी उपयोगकर्ताओं की संख्या बहुत तेजी से बढ़ गई है। इंटरनेट मीडिया पर हिंदी सामग्री की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि यूट्यूब, फेसबुक, वाट्सअप, एक्स या इंस्टाग्राम की बात करें तो इन सारे प्लेटफार्म पर मनोरंजन से लेकर शिक्षा और समाचार तक हिंदी सशक्त रूप में दिखायी दे रही है। आनलाइन सत्संग, वेब सीरीज, पाडकास्ट, यूटयूब चैनल, पत्रिकाएं और इंटरनेट मीडिया ग्रुप ने प्रवासी हिंदी रचनाकारों और पाठकों को विश्व भर से जोड़ा है। मानव बुद्धिमता का कृत्रिम बुद्धिमता से कोई मुकाबला नहीं है। कृत्रिम बुद्धिमता, कृत्रिम तरीके से तैयार की गई है और कामनसेंस मशीन में नहीं डाल सकते हैं।  
आज जनरेशन का अंतर

चीन की ग्वांगझ विश्वविद्यालय के पूर्व विजिटिंग प्रोफेसर गंगा प्रसाद शर्मा गुणशेखर ने कहा कि हिंदी के जानने वाले जो लोग हैं, वह डिजिटल जानकारी कम रखते हैं। इसका कारण है कि आज जनरेशन का अंतर है। छोटा पांच साल का बच्चा भी डिजिटल की जितनी जानकारी रखता है, उतना 50 या 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग नहीं रखते हैं।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डा. ज्ञान प्रकाश मिश्र ने कहा कि अपनी भाषा का उपयोग कर इसी तरह आगे बढ़ेंगे तो भारत दुनिया की नंबर एक अर्थव्यवस्था होगी, और इसमें डिजिटल क्रांति का सबसे बड़ा योगदान होगा। डिजिटल क्रांति के दौर में संवेदनाएं मर रही हैं। यह युवाओं के सामने चिंता का विषय है। डिजिटल क्रांति के दौर में दो पैर हैं एक स्थिर है दूसरा गतिमान है। एक परंपरा है और दूसरा प्रगति है। परंपरा और प्रगति दोनों का समन्वय होना जरूरी है।

अभिव्यक्ति-अनुभूति अंतरराष्ट्रीय आनलाइन पत्रिका व शारजाह की संपादक डा. पूर्णिमा वर्मन ने कहा कि डिजिटल युग में हिंदी का स्वरूप और उपयोग बदल रहा है। वैश्वीकरण के इस दौर में जहां तरक्की का हर रास्ता अंग्रेजी से होकर गुजरता है। हमारे साफ्टवेयर और ऐप अभी तक अंग्रेजी में उपलब्ध हैं।

हिंदी के प्रोफेसर और जानकारी भी अपने कंप्यूटर का विंडो डिस्प्ले अंग्रेजी में रखना पसंद करते हैं। आइआइएमटी मेरठ के पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. नरेंद्र मिश्रा ने ज्ञान की तकनीक ने हमारी भाषा को ग्लोबल बना दिया है। दैनिक जागरण के राज्य संपादक आशुतोष शुक्ल ने सत्र की अध्यक्षता की।
like (0)
cy520520Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
cy520520

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
163116