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क्या महाराष्ट्र में दोनों NCP का होगा विलय? अजीत पवार ने दे दिया बड़ा संकेत

LHC0088 2026-1-9 23:26:31 views 588
  

शरदचंद्र पवार के साथ अजीत पवार (फाइल फोटो)



ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों नए-नए उलटफेर देखने को मिल रहे हैं। अस्तित्व बचाने के लिए 20 साल बाद ठाकरे बंधु एक साथ आ चुके हैं तो अब उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने भी संकेत दिए हैं कि राकांपा के दोनों गुटों के कार्यकर्ता एक साथ आना चाहते हैं। परिवार में भी तनाव समाप्त हो गया है।

महाराष्ट्र में इन दिनों 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव चल रहे हैं। इन चुनावों में अजीत पवार के नेतृत्व वाली राकांपा एवं उनके चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शरदचंद्र पवार) की पार्टी पुणे एवं पिंपरी -चिंचीवण का चुनाव साथ मिलकर लड़ रही हैं। दोनों दलों का गठबंधन इन दोनों स्थानों पर भाजपा को चुनौती दे रहा है।
अजीत पवार ने दिया बड़ा संकेत

इन्हीं चुनावों के दौरान एक साक्षात्कार में अजीत पवार ने परिवार एवं दोनों दलों की स्थिति पर खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि राकांपा के दोनों गुटों के कार्यकर्ता एकजुट होना चाहते हैं। दोनों राकांपा अब साथ हैं और पवार परिवार के अंदर के सभी तनाव भी समाप्त हो गए हैं।

इससे पहले राकांपा (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष एवं अजीत पवार की चचेरी बहन सुप्रिया सुले भी परिवार में किसी प्रकार का तनाव न होने की बात कह चुकी हैं। पुणे एवं पिंपरी चिंचवाड़ में दोनों गुटों में गठबंधन भी सुप्रिया की पहल पर ही हुआ है।
दोनों गुट मिलकर भाजपा को चुनौती दे रहे

कुछ दिनों पहले एक कार्यक्रम में उद्योगपति अदाणी के बारामती में होने के दौरान भी दोनों परिवार एक साथ ही नजर आए थे।

पिछले महीने 12 दिसंबर को शरद पवार के जन्मदिन के अवसर पर अजीत पवार एवं राकांपा (शरदचंद्र पवार) गुट से चुनकर विधायक बने उनके भतीजे रोहित पवार एक ही विमान में बैठकर शरद पवार से मिलने पहुंचे थे।

इन सभी घटनाक्रमों से ये संकेत मिल रहे हैं कि राकांपा के दोनों गुटों के एक साथ आने में अब कोई अड़चन नहीं बची है। देखना सिर्फ यह है कि दोनों गुटों के एक होने के बाद महाराष्ट्र का राजनीतिक परिदृश्य क्या होगा, क्योंकि लोकसभा चुनाव के पहले से शरद पवार भाजपा से दूरी बनाए रखना चाहते थे।

लोकसभा चुनाव में उन्हें अजीत गुट से अधिक सफलता भी मिली। लेकिन विधानसभा चुनाव में बाजी फिर पलट गई। अजीत पवार के 41 विधायक चुनकर आए, जबकि शरद पवार गुट की संख्या 10 पर सिमट गई।
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