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क्या सुप्रीम कोर्ट से बड़े हैं प्रशासनिक अधिकारी, कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा ने उठाए सवाल

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बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने आरोप लगया है कि विस्थापितों पर प्रशासन अत्याचार कर रहा है।



राज्य ब्यूरो, रांची। हजारीबाग जिले में एनटीपीसी, सीसीएल और अडानी जैसे बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के विरोध में अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे विस्थापित ग्रामीणों पर बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने अत्याचार के आरोप लगाए हैं।

उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या हजारीबाग के डीसी और एसपी सुप्रीम कोर्ट से ऊपर हैं? प्रशासन शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों के खिलाफ दमनात्मक रवैया अपना रहा है।

अंबा प्रसाद ने कहा कि केरेडारी थाना क्षेत्र के पगार मामले में दर्ज कांड संख्या 136/25 में पुलिस ने राजनीतिक और कार्पोरेट दबाव में गंभीर धाराएं जोड़ दी हैं। जिस घटना में किसी को कोई शारीरिक नुकसान नहीं हुआ, उसमें हत्या के प्रयास जैसी संगीन धाराएं लगाई गईं।

उन्होंने इसे फर्जी मुकदमा बताते हुए पुलिसिया अत्याचार का उदाहरण बताया है। कहा कि पुलिस ने सर्वोच्च न्यायालय के सतेन्द्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआइ फैसले में दिए गए निर्देशों की अनदेखी की है।

उक्त फैसले में सात वर्ष से कम सजा वाले मामलों में बिना वारंट या 41ए नोटिस के गिरफ्तारी नहीं करने का स्पष्ट निर्देश है। इसके बावजूद बिना नोटिस और वारंट के गिरफ्तारी की गई।

बुधवार को धरना स्थल से आंदोलनकारी बिरजू महतो को जबरन उठाकर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। थाने में अन्य विस्थापितों के साथ भी मारपीट की गई।

उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या प्रशासन और संबंधित अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से ऊपर हैं। उन्होंने झारखंड उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय से हजारीबाग में असंवैधानिक दमन पर स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है।

अंबा ने कहा कि जल-जंगल-जमीन से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए किया जा रहा शांतिपूर्ण आंदोलन दबाने के लिए कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है।
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