गंदा पानी पीने से लोग पड़ रहे बीमार।
सुमित शिशोदिया/आशीष चौरसिया, नोएडा। प्रदेश के विंडो शहर गौतमबुद्धनगर में लोग गंगाजल नहीं, बल्कि \“गंदा-जल\“ से अपनी बुझा रहे हैं। सेक्टर-22 चौड़ा गांव, खोड़ा काॅलोनी, छिजारसी, गढ़ी-चौखंडी, बहलोलपुर, हाजीपुर समेत कई क्षेत्र हैं, जिनमें आज तक दूषित पानी सप्लाई हो रहा है।
हैरानी की बात है कि गंदे पानी पानी ने एक वर्ष में 50 हजार से ज्यादा लोगों को हेपेटाइटिस, टायफाइड, पीलिया और अन्य बीमारियों का शिकार बनाया है। इन सभी ने जिला संयुक्त अस्पताल, ग्रेटर नोएडा के जिम्स अस्पताल, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जनपद के अन्य प्राइवेट अस्पतालों में वरिष्ठ चिकित्सकों से परामर्श लेकर इलाज कराया।
गंदे पानी की सप्लाई से शहरी क्षेत्र से ज्यादा स्लम और कन्जेस्टेड एरिये के लोग प्रभावित हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले 15 महीनों में 65,278 लोगों को गंदा पानी पीने से उल्टी, दस्त, डायरिया और हैजा, टाइफाइड समेत अन्य गंभीर बीमारियां अपनी चपेट में ले चुकी हैं, लेकिन, इन्होंने चिकित्सक से तत्काल इलाज कराकर अपनी जान को सुरक्षित किया।
स्वास्थ्य विभाग ने एक वर्ष में गंदे पानी की सूचना पर जिले के विभिन्न स्थानों पर 45 से ज्यादा जांच शिविर लगाकर लगभग 42 हजार लोगों के स्वास्थ्य की जांच की। 39 हजार लोगों को ओआरएस के पैकेट व दवाईयां वितरित कीं।
चाइल्ड पीजीआई में विशेषज्ञ ड. सुशील कुमार बताते हैं कि मानसून के गंदा पानी पीने से हेपेटाइटिस ए के शिकार बाल मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। पीजीआई की ओपीडी में प्रतिदिन 15 से 20 जबकि महीने में 450 से 500 मरीज पहुंचते हैं।
एक वर्ष में 10 से 12 हजार मरीजों ने हेपेटाइटिस-ए की शिकायत की जबकि पीलिया, हैजा और टाइफाइड के मरीजों को तत्काल इमरजेंसी में भर्ती कर उनका इलाज किया गया।
क्या कहते हैं डाॅक्टर
ओपीडी में दूषित पानी के हर महीने 25 ये 30 प्रतिशत मरीज आ रहे हैं। सभी लोग मुख्य रूप से डायरिया, उल्टी, पेट दर्द, बुखार, निर्जलीकरण जैसी समस्या बताते हैं। समय पर इलाज न कराने से किडनी फेलियर, लिवर डैमेज या मौत भी हाे सकती है। कालेरा या टाइफायड में तेज बुखार,आंतों में घाव और अंग क्षति व मांसपेशियों में ऐंठन भी होती है जबकि हेपेटाइटिस में त्वचा का पीला पड़ना, लीवर सूजन और भूख न लगना आम बात है। डायरिया से गंभीर डिहाइड्रेशन हो जाता है, जो सदमा, कोमा या मृत्यु का कारण बन सकता है।
-डाॅ. जीसी वैष्णव, डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन- मेदांता अस्पताल
दूषित पानी से मरीज को दस्त, उल्टी, बुखार, थकान, पेट दर्द व ऐंठन होती है। डिहाइड्रेशन से मुंह सूखना और पेशाब कम आना, आंख व त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया), भूख कम लगने से कमजोरी होती है। लापरवाही से बीमारी गंभीर हो जाती है। डायरिया में बार-बार पतले दस्त, उल्टी और कमजोरी बढ़ती है जबकि हैजा जैसे गंभीर संक्रमण में अत्यधिक दस्त और तेज डिहाइड्रेशन होता है। टायफाइड दूषित पानी से होने वाला बैक्टीरियल रोग है। मरीज को हेपेटाइटिस-ए और ई से पीलिया, गहरा पेशाब, अमीबायसिस में खून के साथ दस्त, पेट दर्द और बुखार भी हो सकता है।
-डाॅ. अजय अग्रवाल, चेयरमैन- इंटरनल मेडिसिन, फोर्टिस अस्पताल
दूषित पानी लोगों के लिए बड़ी समस्या बन चुका है। ओपीडी में हर माह 350 से ज्यादा मरीज गंदा पानी के आते हैं। एक वर्ष में चार हजार से अधिक मरीज उनसे परामर्श लेते हैं। कई लोग पानी पीने के बाद बार-बार बीमार होने की बात बताते हैं। बीमारी को छोटा समझने से लीवर खराब और किडनी पर असर पड़ता है, आंतों में सूजन होती है। बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास पर बुरा प्रभाव पड़ता है। वह दूषित पानी को बीमारी नहीं, बल्कि व्यवस्था की कमजोरी मानते हैं। पानी की पाइप लाइनों में गंदा पानी मिलना, सीवर का रिसाव और सही जांच न होना इसके बड़े कारण हैं।
-डाॅ. प्रखर गर्ग- इंटरनल मेडिसिन, यथार्थ अस्पताल
दूषित पानी पीने से लोगों को कैंसर और किडनी खराब जैसी गंभीर बीमारी भी अपनी चपेट में ले रही हैं लेकिन, जिम्मेदार अधिकारी आंखों पर पट्टी बांधकर बैठे हैं। ग्रेटर नोएडा स्थित सरकारी और प्राइवेट अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों ने चेताया कि जिले में सप्लाई हो रहे गंदे जल से पेट की गंभीर बीमारियां, हैजा, टाइफाइड, उल्टी-दस्त, स्किन, हेपेटाइटिस-ए और ई (पीलिया), पेचिश की समस्या भी हो सकती हैं।
ऐसे हो सकता है कैंसर
विशेषज्ञों ने बताया कि सीवर युक्त दूषित पानी पीने के बाद उसमें उपलब्ध आर्सेनिक और लेड रसायनिक तत्व शरीर में प्रवेश करते हैं, जो लोगों की सबसे महत्वपूर्ण कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। धीरे-धीरे छोटी समस्या एक समय में गंभीर होकर कैंसर जैसी घातक बीमारियों को जन्म लेती हैं।
पेट की बीमारियां
गंदा पानी पीने से सबसे सामान्य समस्या पेट से जुड़ी होती है। इसके बैक्टीरिया, वायरस और कीटाणु पानी में मिलकर आंतों में इंफेक्शन पैदा करते हैं, जिससे दस्त, उल्टी, डायरिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
किडनी खराब होने की टेंशन
चिकित्सकों की मानें तो गंदे पानी में भारी धातुएं जैसे आर्सेनिक, लेड और कैडमियम मिश्रित होते हैं। इससे किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं। यह तत्व धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर किडनी की कार्य क्षमता को प्रभावित करते हैं, जिससे किडनी फेल्योर हो सकता है।
स्किन में यह होती है समस्या
गंदे पानी में केमिकल और बैक्टीरिया होने के कारण त्वचा पर एलर्जी और रैशेज की समस्या को जन्म देते हैं। लंबे समय तक गंदा पानी इस्तेमाल करने से त्वचा पर चर्मरोग, सोरायसिस और एक्जिमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
दूषित पानी से यह भी हो सकती हैं बीमारियां
दूषित पानी से हैजा, कालरा, टाइफाइड, मलेरिया जैसी बीमारियां हो सकती है। इन बीमारियों की वजह से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
यह है घरेलू व प्राथमिक उपचार
- नींबू पानी, नारियल पानी या इलेक्ट्रोलाइट दे सकते हैं।
- अदरक और तुलसी पेट की गड़बड़ी और उल्टी में मददगार।
- हल्का भोजन में दही-चावल, खिचड़ी, केला जैसे हल्के खाद्य पदार्थ।
- उबला हुआ पानी।
इन लक्षणों को नहीं करें नजरअंदाज
- लगातार दस्त और उल्टी की समस्या।
- तेज बुखार और कमजोरी।
- पेशाब बहुत कम होना या चक्कर आना।
- शरीर या आंखों में पीलापन।
- बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन के लक्षण है।
दूषित पानी से गैस्ट्रो की समस्या के साथ ही हेपेटाइटिस का खतरा तेजी से बढ़ता है। इस वजह बिना लापरवाही किए मरीजों को डाक्टरी सलाह लेनी चाहिए। जिम्स में रोजाना उल्टी-दस्त, डायरिया और हैजा, टाइफाइड के लगभघ 10-15 मरीज आ रहे हैं। हेपेटाइटिस ए के बच्चे दो से तीन आ रहे हैं।
-डाॅ. प्रीति, जनरल मेडिसिन विभाग, जिम्स
रोगियों को संक्रमण और उसके लक्षणों से लड़ने के कारण के आधार पर, मौखिक दवाएं, जैसे एंटीबायोटिक्स दी जाएंगी। रोजाना इस तरह के 40 से 50 मरीज ओपीडी में आ रहे हैं।
-डाॅ. भूमेश त्यागी, शारदा अस्पताल
दूषित पानी पीने से डिहाइड्रेशन, शाक और मृत्यु तक का खतरा रहता है। यह खतरा बच्चों और बुजुर्गों में अधिक रहता है। हेपेटाइटिस ई गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक होता है। उल्टी, दस्त और लूज मोशन के मरीज ओपीडी में 15-30 प्रतिशत, टायफाइड के संदिग्ध और पुष्ट मरीज प्रतिदिन की ओपीडी में लगभग 5-10 प्रतिशत हैं। हर महीने हेपेटाइटिस ए महीने लगभग तीन से चार बच्चे आ रहे हैं। इमरजेंसी विभाग में प्रतिदिन लगभग दो से तीन मरीज उल्टी-दस्त और संबंधित गंभीर लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं।
-डाॅ. शुभम यादव, एसोसिएट कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन
बचाव के लिए ये बरतें सावधानी
ओआरएस का घोल, नींबू पानी और नारियल पानी पीयें। हल्का भोजन जैसे खिचड़ी, दही-चावल और केला खाना चाहिए। केवल उबला या फिल्टर पानी ही पीयें। बचाव के लिए ताजा व ढका भोजन खाएं, हाथ धोने की आदत डालें और टीकाकरण जरूर कराएं। लगातार दस्त, उल्टी, तेज बुखार, बहुत कम पेशाब या शरीर या आंखों में पीलापन दिखे तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें।
विशेषज्ञों की सलाह
वरिष्ठ चिकित्सकों ने अधिकारियों को सलाह दी है कि वे गौतमबुद्ध नगर में सप्लाई हो रहे \“\“\“\“गंगा-जल\“\“\“\“ की नियमित जांच करें। खराब पाइप लाइनों को बदलकर लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराएं। लोग भी जागरूक हों और पानी उबालकर या फिल्टर करके ही पीयें। साफ पानी ही अच्छी सेहत की सबसे मजबूत नींव है।
गंदा पानी ने बार-बार पहुंचाया लोगों को अस्पताल
- जनवरी 2026-सेक्टर डेल्टा वन में दूषित पानी पीने से 1820 लोग बीमार हुए।
- जनवरी 2026-सेक्टर अल्फा-दो में दूषित पानी पीने से 40 लोग बीमार पड़े।
- दिसंबर 2025-ग्रेटर नोएडा की अजनारा होम सोसायटी में गंदे पानी से 100 लोग बीमार हुए।
- अक्टूबर 2025-ग्रेनो वेस्ट के दिव्या टावर में गंदे पानी की आपूर्ति से 12 लोग बीमार हुए।
- अप्रैल 2025-ग्रेनो वेस्ट की अजनारा होम सोसायटी में दूषित पानी पीने से कई लोग बीमार हुए।
- अप्रैल 2025-ग्रेनो वेस्ट की गौर सौंदर्यम सोसायटी में गंदे पानी से 40 लोग बीमार पड़े।
- फरवरी 2025-ग्रेनो वेस्ट की अरिहंत गार्डन, ईको विलेज, हवेलिया और पंचशील हायनिश में 200 लोग बीमार पड़े।
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