नबी करीम कच्चा रास्ता क्षेत्र में पानी की आपूर्ति न होने के कारण मंदिर से लिया जा रहा पीने का पानी। फोटो- हरीश कुमार
संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। घरों में पहुंचने वाले पानी की शुद्धता को लेकर सवाल उठते रहते हैं। दिल्ली के कई क्षेत्रों में लोगों के घरों में दूषित पानी पहुंच रहा है। इसे लेकर हाई कोर्ट और एनजीटी नाराजगी जता चुका है, लेकिन समस्या बनी हुई है। घरों में पहुंचने वाले पेयजल की सही ढंग से जांच भी नहीं हो पाती है। इस कारण जलजनित बीमारियों का खतरा बना रहता है।
कहने को तो प्रत्येक वर्ष 80 हजार से अधिक पानी के नमूने लेकर जांच की जाती है, लेकिन इन रिपोर्टों की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में है। क्योंकि पानी की गुणवत्ता की जांच करने वाली यहां की अधिकांश लैब (प्रयोगशालाएं) वैश्विक मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
नबी करीम कच्चा रास्ता क्षेत्र में पानी की आपूर्ति न होने के कारण सीवर में बाल्टी रखकर गुजर रही बोरिंग पाइप लाइन से लिया जा रहा पीने का पानी। हरीश कुमार
पहले तीन लैब नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फार टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (एनएबीएल) से मान्यता प्राप्त थे। और अब सिर्फ एक रह गए हैं। इस मामले में पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश व हरियाणा बेहतर स्थिति में हैं।
पेयजल जांच के लिए दिल्ली में कितनी लैब?
केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं को अनिवार्य रूप से मान्यता प्राप्त करानी है, ताकि उनके आंकड़ों की विश्वसनीयता, सटीकता और प्रामाणिकता सुनिश्चित हो सके। इसके बावजूद दिल्ली इस मामले में पिछड़ रही है।
दिल्ली जल बोर्ड के पास पेयजल जांच के लिए 14 लैब हैं। इनमें से हैदरपुर, वजीराबाद और ओखला लैब को वर्ष 2021-22 में एनएबीएल मान्यता मिला था। पिछले लगभग छह माह पहले ओखला और उसके बाद हैदरपुर की मान्यता भी समाप्त हो गई। इनके नवीनीकरण नहीं होने पर जल बोर्ड के किसी अधिकारी के विरुद्ध कोई कार्रवाई भी नहीं की गई।
एसटीपी की जांच के लिए लैब के पास नहीं मान्यता
इस समय सिर्फ वजीराबाद लैब के पास एनएबीएल का प्रमाण पत्र है। नई दिल्ली नगर पालिका परिषद के अधिकारी अपने लैब के मान्यता की दावा करते हैं, लेकिन एनएबीएल की सूची में यह नहीं है। इसके अलावा सीवेज उपचार संयंत्रों (एसटीपी) की जांच के लिए जल बोर्ड की नौ लैब और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की लैब के पास भी एनएबीएल मान्यता नहीं है।
दिल्ली अन्य राज्यों की तुलना में NABL मान्यता में पिछड़ा
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, नागालैंड, सिक्किम, तमिलनाडु और त्रिपुरा में सभी सार्वजनिक लैब को मान्यता प्राप्त है। हरियाणा में 98 प्रतिशत, उत्तराखंड में 96 प्रतिशत, पंजाब में 94 प्रतिशत और मान्यता है।
वहीं, दिल्ली में मात्र आठ प्रतिशत लैब ही मान्यता प्राप्त हैं, जो राष्ट्रीय औसत से भी नीचे है। देशभर में 28,547 जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं, जिनमें से 59 प्रतिशत (1,678) एनएबीएल मान्यता प्राप्त हैं। दिल्ली से खराब स्थिति केवल अरुणाचल प्रदेश और लक्षद्वीप की है।
यमुना व पानी की गुणवत्ता पर काम करने वाली संस्था अर्थ वारियर के संयोजक पंकज कुमार ने हाल ही में दिल्ली जल बोर्ड को इस संबंध में पत्र लिखा है। उनका कहना है कि दिल्ली में जल आपूर्ति की पुरानी अवसंरचना, भूजल में खतरनाक रसायनों का मिलना, शहर की गंदगी और औद्योगिक अपशिष्ट के कारण जल गुणवत्ता की समस्या बनी हुई है।
उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड के पानी जांच के तरीकों पर भी सवाल उठाए हैं। एनएबीएल की मान्यता आवश्यक है; इसके मानकों के अनुरूप नहीं होने पर पानी की जांच अमान्य मानी जाती है।
प्रतिदिन लिए जाते हैं लगभग 400 नमूने
वजीराबाद, हैदरपुर, चंद्रावल, भागीरथी, सोनिया विहार, ओखला, नांगलोई, द्वारका और बवाना स्थित जल शोधन संयंत्र (डब्ल्यूटीपी) के साथ लैब बने हुए हैं। ग्रेटर कैलाश, नजफगढ़, तिमारपुर, जीके1 और लाजपत नगर में भी जल बोर्ड के लैब हैं।
इन सभी में डब्ल्यूटीपी के पानी के साथ ही दिल्ली के अन्य स्थानों से लिए गए नमूनों की जांच होती है। जल बोर्ड मोबाइल वाटर टेस्टिंग वैन भी संचालित करता है जो घर-घर जाकर या शिकायत मिलने पर पानी की जांच करता है। प्रत्येक दिन जल बोर्ड लगभग 400 नमूनों की जांच करता है।
लैब में इन मानकों की होती है जांच
- भौतिक जांचः रंग, गंध और गंदलापन।
- रासायनिक जांचः पीएच मान, कठोरता, क्लोराइड, फ्लोराइड, आयरन, अमोनिया, लेड आर्सेनिक सहित पानी में उपस्थित अन्य रासायन।
- जैविक जांचः हानिकारक बैक्टीरिया।
एक वर्ष में 85 हजार नमूनों की जांच
दिल्ली जल बोर्ड के सभी लैब में प्रत्येक वर्ष 80 हजार से अधिक पानी के नमूनों की जांच की जाती है। प्रतिदिन लगभग 400 नमूने लिए जाते हैं। पिछले वर्ष लगभग 85 हजार नमूनों की जांच की गई। इसमें से लगभग तीन प्रतिशत नमूने असंतोषजनक थे।
सबसे अधिक एनएबीएल मान्यता प्राप्त हैदरपुर लैब में 22 हजार और वजीराबाद में लगभग 20 हजार पानी के नमूनों की जांच की गई। वहीं, वर्ष 2024 में 82 हजार से अधिक जांच हुई। इनमें लगभग चार प्रतिशत नमूने विभिन्न मानकों में विफल रहे।
दिसंबर में 100 नमूने फेल
दिल्ली जल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार 1से 18दिसंबर, 2025 तक कुल 7029 नमूने लिए गए जिनमें से 100 नमूने असंतोषजनक पाए गए। मानसरोवर पार्क, पूरण नगर, पालम डीडीए फ्लैट्स, द्वारका सेक्टर 13, उत्तम नगर के भगत एन्क्लेव, विजय विहार व किरण गार्डन, सिरसपुर बूस्टर स्टेशन, मोहम्मदपुर, बुराड़ी की विजय कॉलोनी, जोनापुर, घिटोरनी आदि के नमून असंतोषजनक मिले हैं। भलस्वा डेयरी क्षेत्र के पानी में टीडीएस की मात्रा 900 से अधिक मिली है। कुछ नमूनों में अमोनिया व फेकल कोलीफार्म (मल मूत्र के अंश) मिले हैं।
क्यों जरूरी है एनएबीएल प्रमाण पत्र?
एनएबीएल एक स्वायत्त निकाय है, जो वैश्विक मानकों और जांच की सटीकता की जांच कर लैब को प्रमाणपत्र प्रदान करता है। इससे लैब की जांच रिपोर्ट प्रमाणिक व विश्वसनीय होती है। यही कारण है कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने सभी राज्यों को एनएबीएल मान्यता के लिए बोला है। इसके बावजूद दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं।
मान्यता के लिए संबंधित संस्थान को अपने लैब की गुणवत्ता में सुधार करने के बाद आवेदन करना होता है। एनएबीएल की टीम कई स्तर पर जांच करने के बाद प्रमाण पत्र प्रदान करता है। दिल्ली के जल गुणवत्ता जांच लैब के पास एनएबीएल मान्यता नहीं होने को लेकर जल मंत्री प्रवेश वर्मा के कार्यालय से पक्ष मांगा गया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। |