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ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन से अलग होने का किया एलान
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को 60 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकालने का फैसला किया है। इनमें संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कई निकायों के साथ-साथ भारत-फ्रांस के नेतृत्व वाला अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आइएसए) भी शामिल है। ट्रंप प्रशासन ने इन संस्थाओं को अमेरिका के हितों के लिए अनावश्यक और विरोधी करार दिया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को \“संयुक्त राज्य अमेरिका के हितों के विपरीत अंतरराष्ट्रीय संगठनों, सम्मेलनों और संधियों से हटने\“ संबंधी एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद उन्होंने कहा कि अमेरिका के लिए 66 यूएन और गैर-यूएन संगठनों की सदस्यता बनाए रखना, उनमें भागीदारी करना या उन्हें किसी भी प्रकार का समर्थन देना देश के हितों के खिलाफ है।
व्हाइट हाउस द्वारा जारी फैक्ट शीट के अनुसार, जिन संगठनों से अमेरिका हट रहा है, उनमें 31 संयुक्त राष्ट्र संस्थाएं और 35 गैर-यूएन संगठन शामिल हैं। इन पर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि और संप्रभुता के विपरीत काम करने का आरोप लगाया गया है।
संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें अमेरिका की ओर से संगठनों की पूरी सूची प्राप्त हो गई है और इस पर गुरुवार को प्रतिक्रिया दी जाएगी। वहीं, संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि अमेरिका अब उन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को न तो फंड देगा और न ही उनमें हिस्सा लेगा, जो अमेरिकी हितों की सेवा नहीं करतीं या उनके खिलाफ काम करती हैं।
भारत ने अपनाई संतुलन की रणनीति बता दें कि आइएसए का मुख्यालय गुरुग्राम में है और भारत की मंशा भविष्य में इसे तेल उत्पादक देशों के संगठन \“ओपेक\“ की तरह स्थापित करने की है।
अमेरिका के साथ कई मुद्दों पर संवेदनशीलता को देखते हुए भारत की ओर से गुरुवार को इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। ऐसी चर्चा है कि आइएसए से अमेरिका के अलग होने का सीधा असर भारत पर होने की संभावना है।
भारत सधे कदमों से बढ़ना चाहता है। वह न तो अमेरिका को कोई अतिरिक्त मौका देना चाहता है और न ही दबाव में झुकता दिखना चाहता है। भारतीयों की एक बहुत बड़ी आबादी भी अमेरिका में है।
अमेरिका के अलग होने से चुनौती बढ़ेगी ट्रंप प्रशासन के आइएसए से बाहर निकल जाने से इस संगठन के सामान्य संचालन पर असर नहीं होगा, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका जैसे बड़े देश के अलग होने से इसके लिए फंड जुटाने की चुनौती बढ़ जाएगी।
अमेरिका आइएसए का सक्रिय सदस्य रहा है। आइएसए ने वर्ष 2030 तक दुनिया भर में 1.95 लाख मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा है। इसने विकसित और गरीब देशों को सौर ऊर्जा से जुड़ी प्रौद्योगिकी लगाने में मदद शुरू की है। आइएसए का लक्ष्य 1000 अरब डालर की फं¨डग जुटाने का है।
आइएसए के अधिकारियों ने कहा है कि उनका संगठन पहले की तरह काम करता रहेगा। थोड़े समय में ही आइएसए से 121 से ज्यादा सदस्य हो गए। भारत ने वर्ष 2023 में ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस (जीबीए) के नाम से स्वच्छ ईंधन के क्षेत्र में एक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग संगठन बनाया। अमेरिका इसका भी सदस्य है। |
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