पंजाब स्टेट ह्यूमन राइट्स कमिशन ने मामले का संज्ञान लिया।
जागरण संवाददाता, मोहाली। निजी अस्पतालों की मनमानी को लेकर दैनिक जागरण ने 15 दिसंबर को इस मामले को प्रमुखता से उठाया था, जिसका अब बड़ा असर देखने को मिला है। दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद यह मामला पंजाब स्टेट ह्यूमन राइट्स कमिशन तक पहुंचा, जहां आयोग ने इसे गंभीर मानते हुए कड़ा संज्ञान लिया है।
मामला मोहाली के फेज-6 स्थित मैक्स अस्पताल का है। नाभा निवासी एक व्यक्ति की इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई थी। आरोप है कि मरीज की मौत के बाद जब परिजन शव लेने पहुंचे तो अस्पताल प्रबंधन ने बाकी बचे बिल की राशि जमा कराने की शर्त रख दी। बिल जमा न होने पर शव देने से इनकार कर दिया गया, जिससे परिजनों को भारी मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
दैनिक जागरण में खबर सामने आने के बाद पंजाब स्टेट ह्यूमन राइट्स कमिशन ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान मैक्स अस्पताल के वकील और सिविल सर्जन कार्यालय से एक मेडिकल अधिकारी पेश हुए। इस पर आयोग ने कड़ी नाराजगी जताते हुए पूछा कि मैक्स अस्पताल के डायरेक्टर और सिविल सर्जन मोहाली स्वयं सुनवाई में क्यों नहीं पहुंचे?
आयोग ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मरीज की मौत के बाद परिजनों को तुरंत शव सौंपा जाना चाहिए था। इतना अधिक बिल बनाकर शव रोकना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। यह कोई सामान्य विवाद नहीं, बल्कि एक व्यक्ति की जान जाने से जुड़ा गंभीर मामला है, जिसे संवेदनशीलता से निपटाया जाना चाहिए था। इसके साथ ही आयोग ने सिविल सर्जन कार्यालय से सवाल किया कि अस्पताल के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
आयोग ने चेतावनी दी कि यदि हेल्थ डिपार्टमेंट की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो अस्पताल के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी एफआईआर दर्ज की जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को तय की गई है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि अगली तारीख पर मैक्स अस्पताल के डायरेक्टर और सिविल सर्जन मोहाली स्वयं उपस्थित रहें। |
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