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क्या ईरान में भी होगा तख्तापलट? चरम पर जनता का विद्रोह; खामेनेई के खिलाफ खड़ी 4 बड़ी ताकतें

deltin33 2026-1-8 16:43:01 views 942
  

चरम पर जनता का विद्रोह खामेनेई के खिलाफ खड़ी 4 बड़ी ताकतें (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान में महंगाई अपने चरम पर है और विरोध-प्रदर्शनों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। 11वें दिन भी देश में अशांति की लहर जारी रही। बुधवार को ईरान के कई जगहों पर सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सवाल अब यह उठ रहे हैं कि क्या ईरान में मौजूदा समय में कोई ऐसा विपक्ष है को सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की सरकार का तख्तापलट कर सके?
ईरान में क्या हो रहा है?

अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (HRANA) के अनुसार, विरोध अब तक ईरान के 31 प्रांतों के 111 शहरों और कस्बों तक फैल गया है। इस दौरान कम से कम 34 प्रदर्शनकारी और चार सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है। अब तक करीब 2200 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया गया है।

इस बीच ईरान की अर्ध-सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी ने दावा करते हुए बताया कि ईरान के दक्षिण-पश्चिमी शहर लॉर्डेगन में हथियारबंद लोगों ने दो पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी। ईरान के पूर्व क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी जो अभी निर्वासन में रह रहे हैं, उन्होंने पूरे देश में फैले विरोध-प्रदर्शनों की सराहना की और इसे एक निर्णायक संकेत भी बताया।

इराक में स्थित कई ईरानी कुर्द विपक्षी दलों ने भी इस विरोध प्रदर्शन के समर्थन में गुरुवार को ईराम में आम हड़ताल का आह्वान किया। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरानी नागरिक प्रदर्शनकारियों को दबाती है को अमेरिका हस्तक्षेप करने के लिए \“लॉक एंड रेडी\“ है। यानी अमेरिकी मिसाइल तैयार हैं।

ट्रंप के इस बयान को लेकर ईरानी सेना के प्रमुख मेजर जनरल अमीर हातमी ने ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा को सीधा खतरा बताया है। उन्होंने कहा, ईरान के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी तेज होने पर प्रतिक्रिया के बिना नहीं छोड़ा जाएगा।
ईरानी विपक्ष की चार बड़ी ताकतें

शाही परिवार और उनके समर्थक गुट:-


ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी 1979 में इस्लामी क्रांति के जोर पकड़ते ही भाग गए थे। 1980 में मिस्र में उनकी मृत्यु हो गई थी। जब राजवंश को ईरान से बाहर कर दिया गया था तब उनके बेटे रेजा पहलवी मयूर सिंहासन के उत्तराधिकारी थे। रेजा पहलवी अब अमेरिका में निर्वासन की जिंदगी काट रहे हैं।

भले ही पहलवी के ईरानी प्रवासियों में बहुत सारे फैन हैं जो राजशाही की वापसी का समर्थन करते हैं, लेकिन यह अनिश्चित है कि यह विचार देश के अंदर कितना लोकप्रिय हो सकता है। पहलवी के पिता 47 साल पहले जिस ईरान से भाग गए थे, आज वह ईरान उससे बहुत अलग दिखता है।

पीपुल्स मुजाहिदीन संगठन:-

ईरान में मुजाहिदीन एक शक्तिशाली वामपंथी समूहथा जिसने 1970 के दशक में शाह की सरकार और अमेरिकी ठिकानों के खिलाफ बमबारी अभियान चलाया था, लेकिन अंत में अन्य गुटों से अलग हो गया। इस्लामिक गणराज्य के कई कट्टर दुश्मन भी 1980-88 के युद्ध के दौरान ईरान के खिलाफ इराक का पक्ष लेने के लिए इसे माफ नहीं कर पाए।

पीपुल्स मुजाहिदीन के नेता मसूद राजावी निर्वासन में हैं और 20 से अधिक वर्षों से उन्हें नहीं देखा गया है। समूह को उनकी पत्नी मरियम राजावी ने नियंत्रण में ले लिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह समूह मरियम राजावी के नेतृत्व वाली ईरान की राष्ट्रीय प्रतिरोध परिषद के पीछे मुख्य शक्ति है, जिसकी कई पश्चिमी देशों में सक्रिय उपस्थिति है।

जातीय रूप से अल्पसंख्यक समूह:-

ईरान के ज्यादातर सुन्नी मुस्लिम समूह कुर्द और बलूच अल्पसंख्यक अक्सर तेहरान में फारसी भाषी, शिया मुस्लिम सरकार के शासन के खिलाफ नाराज रहते हैं। कई कुर्द समूहों ने लंबे समय से देश के पश्चिमी हिस्सों में इस्लामिक गणराज्य का विरोध किया है, जहां वे बहुमत में हैं और सरकारी बलों के खिलाफ सक्रिय विद्रोह के दौर भी आए हैं।

ईरान की पूर्वी सीमा पर पाकिस्तान के बलूचिस्तान में तेहरान विरोधी बलूच मौजूद हैं। वे ईरान के भीतर अपने बलूच जनजाति के लोगों के लिए अधिक हक की मांग करते हैं। इसके अलावा यहां बॉर्डर इलाकों में अल कायदा से जुड़े सशस्त्र जिहादी भी तेहरान विरोधी हैं।

ईरान में समय-समय पर होने वाले आंदोलन:-

पिछले एक दशक से लगातार कई स्थानों पर सैकड़ों-हजारो ईरानी सड़कों पर उतरकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 2009 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद प्रदर्शनकारियों ने तेहरान और अन्य शहरों में वोट में धांधली करने का आरोप लगाया था।

2022 में ईरान में फिर से महिला अधिकारों पर केंद्रित बड़े विरोध प्रदर्शन हुए। नारी, जीवन, स्वतंत्रता का प्रदर्शन महीनों तक जारी रहा लेकिन कोई संगठन या नेतृत्व नहीं बन पाया और कई प्रदर्शनकारियों को अंत में गिरफ्तार कर लिया गया।

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