संवाद सूत्र, फुलवरिया (गोपालगंज)। बीते 6 जनवरी से कृषि विभाग द्वारा एग्री स्टेट योजना के तहत फार्मर रजिस्ट्री बनाने का कार्य शुरू किया गया था। योजना का उद्देश्य किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना और उन्हें डिजिटल पहचान देना है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। गांवों में आयोजित पंचायत भवनों के शिविरों में किसान बड़ी उम्मीद लेकर पहुंच रहे हैं, परंतु निराशा उनके हाथ लग रही है।
समस्या की जड़ है पूर्वजों के नाम दर्ज जमाबंदी। अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी जमीन की जमाबंदी बाप-दादा या अन्य पूर्वजों के नाम पर दर्ज है। वर्तमान में जो किसान वर्षों से खेती कर रहे हैं, उनके नाम से जमीन का स्थानांतरण अब तक नहीं हो पाया है।
कृषि विभाग का स्पष्ट कहना है कि फार्मर रजिस्ट्री उसी व्यक्ति की बनाई जाएगी, जिसके नाम जमीन की जमाबंदी दर्ज है। इस नियम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिन किसानों के पिता या दादा का निधन हो चुका है, वे अब रजिस्ट्री से वंचित हो रहे हैं।
किसान शिविरों में पहुंचकर अपनी समस्या बताते हैं, लेकिन समाधान के नाम पर उन्हें केवल जमाबंदी बंटवारा कराने की सलाह दी जा रही है। विभागीय कर्मचारी भी इस मामले में हाथ खड़े करते नजर आ रहे हैं। स्थिति यह है कि पंचायत भवनों पर शिविरों में भारी भीड़ तो उमड़ रही है, लेकिन अधिकांश किसान खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।
किसानों का कहना है कि जमाबंदी बंटवारा एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है, जिसमें महीनों, यहां तक कि वर्षों लग जाते हैं। ऐसे में वे सरकारी योजनाओं से बाहर हो रहे हैं। इस पूरे मामले को लेकर किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
जमाबंदी हस्तांतरण की प्रक्रिया
फुलवरिया के सीओ बीरबल वरुण कुमार ने बताया कि जमाबंदी अगले पीढ़ी के नाम से करने के लिए जमाबंदी से जुड़े सभी हिस्सेदारों को शपथ पत्र देना होता है। इसके बाद कर्मचारी तथा राजस्व अधिकारी के समक्ष सभी को अपना हस्ताक्षर करना होता है। सभी की सहमति के बाद ही जमाबंदी स्थानांतरित की जाती है।
प्रथम चरण में जिन किसानों के नाम जमाबंदी है, उनके फार्मर आईडी की प्रक्रिया की जा रही है। सरकारी निर्देश मिलने के बाद बदलाव करते हुए नई व्यवस्था लागू की जाएगी। - ललन कुमार सुमन, जिला कृषि पदाधिकारी
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