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पत्नी की हत्या का दोषी 25 साल बाद पंजाब से गिरफ्तार, नाम-पहचान बदलकर बनवाया था फर्जी आधार कार्ड

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पत्नी की हत्या के मामले में 25 साल बाद पति की गिरफ्तारी। सांकेतिक तस्वीर



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पत्नी की हत्या मामले में 25 साल से फरार सजायाफ्ता जोगिंदर सिंह को क्राइम ब्रांच ने पंजाब के लुधियाना से गिरफ्तार कर लिया है। 15 मार्च 1992 में उसने सरोजनी नगर थानाक्षेत्र के पिलंजी गांव में अपने किराए के घर में पत्नी की गला घोंटकर हत्या की दी थी।

1997 में पटियाला हाउस कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके बाद 2010 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उसकी अपील भी खारिज कर दी थी। सजा मिलने के बाद पैरोल पर बाहर आने के बाद से वह फरार था। इस दौरान सालों तक वह हिमाचल प्रदेश, बंगाल, बिहार और कर्नाटक में गिरफ्तारी से बचने के लिए छिपता रहा और बाद में पंजाब के लुधियाना में जाकर बस गया था।
यूपी के मुजफ्फरनगर का रहने वाला है योगिंदर

डीसीपी क्राइम ब्रांच संजीव कुमार यादव के मुताबिक योगिंदर उर्फ जोगिंदर सिंह मूलरूप से मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। 15 मार्च 1992 की सुबह सवा सात बजे सरोजिनी नगर पुलिस को पिलंजी गांव में एक महिला की हत्या किए जाने की सूचना मिली थी।

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मकान मालिक ने बताया था कि उनके किराएदार योगिंदर ने अपनी पत्नी की हत्या कर घर से भागने की कोशिश की थी लेकिन पीछा कर उसे पकड़ लिया गया था। पुलिस ने कमरे से महिला का शव बरामद कर लिया था, उनकी बाईं आंख के पास चोट के निशान मिले थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटे जाने की पुष्टि हुई थी। जिसके बाद पुलिस ने हत्या की धारा में केस दर्ज कर लिया था।

पटियाला हाउस कोर्ट ने योगिंदर को दस हजार जुर्माने के साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। तीन जून 2000 को दिल्ली हाई कोर्ट ने उसे चार हफ़्ते के लिए पैरोल दिया था, लेकिन पैरोल की अवधि खत्म होने के बाद उसने समर्पण नहीं किया। दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा उसकी सजा बरकरार रखने के बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने उसे भगोड़ा अपराधी घोषित कर दिया था।
कुछ दिन पहले मिली थी सूचना

कुछ दिन पहले क्राइम ब्रांच के हवलदार मिंटू यादव को योगिंदर के बारे में सूचना मिली कि वह पैरोल जंप करने के बाद लुधियाना में रह रहा है। सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने मुजफ्फरनगर और लुधियाना में 500 से ज्यादा लोगों का सत्यापन किया उनसे पूछताछ की।

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जिसके बाद पता चला कि योगिंदर कुमार ने अपनी पहचान छिपाने पुलिस से बचने के इरादे से योगिंदर से नाम बदलकर जोगिंदर सिंह कर लिया था और अपने पिता का नाम भी जय प्रकाश से बदलकर जयपाल कर लिया था। उसने लुधियानापर में बदली हुई पहचान पर नया आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड भी बनवा लिया था।
10 दिनों तक लुधियाना में लगाया पता

पुलिस टीम ने 10 दिनों तक लुधियाना में रहकर उसके बारे में पता लगाया। वह वहां बढ़ई के रूप में काम कर रहा था। उसके बाद पांच जनवरी को उसे साउथ सिटी, लुधियाना सेे पकड़ लिया गया। पहले कई साल तक वह हिमाचल प्रदेश, बंगाल, बिहार और कर्नाटक में छिपा रहा उसके बाद 2012 में वह स्थायी रूप से लुधियाना में बस गया था। पंजाब में रहने के दौरान उसने पंजाबी भाषा भी सीखी और अब वह इसे धाराप्रवाह बोलता है, जिससे उसे स्थानीय लोगों के बीच घुलने-मिलने में और मदद मिली।
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