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NSE के चेयरमैन ने कानपुर में निवेशकों को दिए सुझाव, सुबह खरीदना-शाम को बेचना निवेश नहीं, सट्टा है

cy520520 2026-1-7 19:26:45 views 588
  

नेशनल स्टाक एक्सचेंज के चेयरमैन आशीष चौहान। जागरण



रितेश द्विवेदी, कानपुर। भारतीय शेयर बाजार आज नई ऊंचाइयों के साथ-साथ निवेशकों के लिए नई जिम्मेदारियां भी लेकर आया है। तेजी से बढ़ती डिजिटल ट्रेडिंग, छोटे निवेशकों की भागीदारी और फ्राड के नए-नए तरीके—इन सबके बीच भरोसेमंद निवेश कैसे किया जाए, यह बड़ा सवाल है। नेशनल स्टाक एक्सचेंज के चेयरमैन आशीष चौहान का मानना है कि शेयर बाजार में जोखिम जरूर हैं, लेकिन सही जानकारी, धैर्य और अनुशासन के साथ निवेश किया जाए तो मजबूत आर्थिकी का यह बेहतर माध्यम है। उन्होंने निवेश की अवधि, सट्टा और निवेश के अंतर, फ्राड से बचाव, म्यूचुअल फंड की भूमिका और भविष्य में कानपुर जैसे शहरों से बढ़ती लिस्टिंग पर विस्तार से बात की। प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के कुछ अंश...





  • शेयर बाजार में जोखिम को आप कैसे देखते हैं?
  • शेयर बाजार में जोखिम स्वाभाविक है, लेकिन डर के बजाय भरोसे के साथ निवेश करना चाहिए। सही जानकारी और लंबी अवधि का नजरिया जोखिम को काफी हद तक कम करता है। निवेश हमेशा लंबी अवधि के लिए करना चाहिए। सुबह खरीदकर शाम को बेचने वाले अक्सर नुकसान में रहते हैं। यह निवेश नहीं, सट्टा होता है।


  

  

  • छोटी पूंजी से निवेश संभव है?
  • बिल्कुल। आज एक हजार रुपये से लेकर लाखों रुपये तक निवेश के विकल्प मौजूद हैं। छोटी पूंजी से शुरू करना समझदारी है। कभी भी उधार का पैसा निवेश में बड़ा खतरा बन सकता है। निवेश हमेशा अपनी बचत से ही करें। एकमुश्त पूंजी लगाने से शेयर बाजार में लगाने से बचना चाहिए, यह कोशिश नुकसान में पहुंचा सकती है।


  

  

  • वैश्विक उतार-चढ़ाव का भारतीय बाजार पर कितना असर पड़ता है?
  • जवाब: दुनिया में उतार-चढ़ाव का असर जरूर होता है, लेकिन भारतीय बाजार पर इसका बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता। हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत है। एनएसई में निवेशकों की संख्या 10 साल में आठ गुणा बढ़ी है। आज एनएसई की पूंजी तीन लाख करोड़ से 475 करोड़ तक पहुंच चुकी है। बीते कुछ सालों में दुनिया में कई घटनाएं हुईं, लेकिन इसका असर एनएसई में बहुत ज्यादा नहीं पड़ा।






  • फ्राड के बढ़ते मामलों से कैसे बचें?
  • डुप्लीकेट वेबसाइट और फर्जी कंपनियों के नाम पर फ्राड बड़े स्तर पर हो रहा है। इनसे निवेशकों को बचाने के लिए सेबी की वेबसाइट (sebi.co.in) पर जाकर यह जांच सकते हैं कि ब्रोकर के बारे में सही जानकारी कर सकते हैं, इसके साथ ही एनएसई की वेबसाइट से कंपनी के संबंध में जानकारी लेने के बाद ही निवेश करें। ब्रोकर की जानकारी सेबी देती है, जबकि कंपनियों की डिटेल एनएसई देखती है। दोनों मिलकर निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।






  • भविष्य को लेकर आपका क्या अनुमान है?
  • अगले चार साल में केवल कानपुर से 500 से ज्यादा कंपनियों के लिस्ट होने की उम्मीद है। म्यूचुअल फंड आज सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में से एक है और एनएसई ने 30 साल में निवेशकों का भरोसा कमाया है। एनएसई में तीन लाख महिलाएं भी जुड़ी हैं। मध्यम वर्ग का विश्वास एनएसई में बढ़ने से निवेश भी बढ़ा है, एसएसएमई को जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा जो प्रयास किए गए हैं, वह सराहनीय हैं। मौजूदा समय में एनएसई में 12 करोड़ 50 लाख निवेशक हैं। यह देश की आर्थिक व्यवस्था की मजबूत रीढ़ है।
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