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अब बिना NET-PhD के भी बन सकेंगे प्रोफेसर, CCSU ने खोला नया रास्ता

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जागरण संवाददाता, मेरठ। प्राइवेट परीक्षाओं की मान्यता, वैधता, उपयोगिता पर चल रही बहस के बीच चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने जरूरतमंद ग्रामीण छात्रों का हवाला देते हुए इस वर्ष भी यूजी-पीजी प्राइवेट परीक्षाएं कराने का निर्णय लिया है। मंगलवार को हुई अकादमिक काउंसिल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। जल्द ही विश्वविद्यालय की ओर से प्राइवेट परीक्षा के फार्म भी खोले जाएंगे।

इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने बोडीएल में संचालित पाठ्यक्रमों के लिए भी प्राइवेट परीक्षा फार्म खोलने का निर्णय लिया है। प्राइवेट परीक्षा के फार्म बीए, बीकाम, एमए व एमकाम सभी में खुलेंगे। इसके साथ ही ओडीएल में चार नए पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है। इनमें बीए, बीसीए, एमए हिस्ट्री और एमबीए हास्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विषयों को भी शुरू किया जाएगा। ओडीएल में इससे पहले बीबीए आनर्स, एमकाम, एमसीए और एमबीए के साथ एमए पाठ्यक्रम हैं।

इनमें एमए अंग्रेजी, एमए इकोनोमिक्स, एमए पोलिटिकल साइंस, एमए एजुकेशन और एमए सोसियोलाजी के पाठ्यक्रम हैं। वहीं एमबीए में भी एमबीए एचआर, एमबीए इंटरनेशनल बिजनेस और एमबीए मार्केटिंग के पाठ्यक्रम पहले ही शुरू किए गए हैं। इसमें देखने वाली बात यह होगी कि जिस कोर्स की डिग्री छात्रों को 20 दिन की प्राइवेट परीक्षा में मिल जाएगी, वह ओडीएल की सेमेस्टर व्यवस्था में प्रवेश क्यों लेने जाएंगे।

परिसर में बनेगा कैलाश प्रकाश शोध पीठ
सीसीएसयू परिसर में कैलाश प्रकाश शोध पीठ बनाया जाएगा। फंड के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसमें स्व. कैलाश प्रकाश के जीवन और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान पर शोध कार्य होगा। इसके अलावा परिसर में यूजी आनर्स पाठ्यक्रमों में पहले, दूसरे व चौथे सेमेस्टर में वैल्यू एंडेड कोर्स के तौर पर संचालित क्वालीफाइंग विषय को अब क्रेडिट में तब्दील कर दिया गया है।

स्नातक स्तर पर दो प्राइवेट डिग्री पूरी करने वाले छात्र के आवेदन को स्वीकार करते हुए विश्वविद्यालय ने परिणाम जारी करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय अब ओडीएल के किसी विषय में अंक कम रह जाने पर इच्छुक छात्रों को रेगुलर में भी उसी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने की अनुमति दी जाएगी। इस पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। इसके निर्देश बाद में जारी होंगे।

मेडिकल कालेज में डाक्टर कराएंगे पीएचडी
सीसीएसयू के अंतर्गत संचालित एलएलआरएम मेडिकल कालेज में अब डाक्टर छात्रों को पीएचडी करा सकेंगे। विश्वविद्यालय ने निर्णय लिया है कि मेडिकल कालेज के चिकित्सक मेडिसिन और एलाइड विषयों में पीएचडी करा सकेंगे। मेडिसिन के साथ माइक्रोबोयालाेजी, बायोक्रमिस्ट्री, बायोटेक, जूलोजी फिजिक्स, मेडिकल फिजिक्स, रेडियोलाजी फिजिक्स, फार्मेसी नर्सिंग आदि एलाइड विषयों में पीएचडी कराएंगे।

नौ नए कौशल पाठ्यक्रम होंगे शुरू
विश्वविद्यालय की ओर से सत्र 2026-27 से नौ नए कौशल पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। यह सभी पाठ्यक्रम कौशल केंद्रित होंगे। यूजी-एनईपी स्तर पर एआइ यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कोर्स लागू कर दिया है। जल्द ही साइबर सिक्योरिटी को भी कौशल पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा।

नियुक्त होंगे प्रोफेसर आफ प्रैक्टिस
विश्वविद्यालय ने छह विषयों में प्रोफेसर आफ प्रैक्टिस नियुक्त करने का निर्णय लिया है। यह नियुक्ति एक वर्ष के लिए होगी। यह अपने-अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ होंगे। इनके लिए पीएचडी या नेट की बाध्यता नहीं होगी। इसमें हिंदी, विधि, मास कम्यूनिकेशन, इंजीनियरिंग, खेल और प्रबंधन शामिल है।

सार्क देशों के छात्रों को भी समान फीस
विश्वविद्यालय ने निर्णय लिया है कि परिसर में प्रवेश लेने वाले सार्क देशों के विद्यार्थियों को भारतीय विद्यार्थियों के लिए निर्धारित फीस में ही पढ़ने का अवसर दिया जाएगा। शोध निदेशालय की ओर से भेजे गए स्टडी इन इंडिया प्रस्ताव के तहत यह निर्णय लिया गया है। सार्क यानी साउथ एशियन एसोसिएशन फार रीजनल कोआपरेशन में शामिल देशों में भारत के साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, मालदीव, श्रीलंका और अफगानिस्तान शामिल है। कुलपति की अध्यक्षता में हुई अकादमिक काउंसिल की बैठक में कुछ पदाधिकारी आफलाइन व अन्य आनलाइन जुड़े।
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