जागरण संवाददाता, नोएडा। नए साल से परिवहन विभाग ने वाहनों की फिटनेस जांच प्रक्रिया को आटोमैटिक बनाने का दावा किया था, लेकिन एक सप्ताह बाद भी इसका असर जमीनी स्तर पर नहीं दिख रहा है।
जनपद में दो में से एक ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) शुरू किया गया था, लेकिन वहां प्रतिदिन केवल एक से तीन वाहन ही फिटनेस जांच के लिए पहुंच रहे हैं। इस स्थिति में विभाग को मैनुअल प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है, जिससे नए नियमों का उद्देश्य अधूरा सा प्रतीत हो रहा है।
वाहन स्वामियों की जागरूकता की कमी
परिवहन विभाग का मानना है कि एटीएस के माध्यम से फिटनेस जांच से पारदर्शिता और मानवीय हस्तक्षेप का पूरी तरह से समाप्त होना है। ऑटोमैटिक सिस्टम में ब्रेक, हेडलाइट, प्रदूषण, स्टीयरिंग और अन्य तकनीकी मानकों की जांच मशीनों के द्वारा की जाती है, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना नहीं रहती।
हालांकि, वाहन स्वामियों की जागरूकता की कमी और पुराने मैनुअल सिस्टम से जुड़ी आदतों के कारण लोग अभी तक इस नई व्यवस्था को अपनाने में हिचकिचा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि विभाग लगातार वाहन मालिकों को एटीएस के बारे में जागरूक कर रहा है।
प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों को बताया जाएगा कि अब फिटनेस जांच केवल आटोमैटिक सिस्टम से ही मान्य होगी। इसके साथ ही, अगले कुछ दिनों तक मैनुअल प्रक्रिया जारी रखने का निर्णय लिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचा जा सके।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि जिले में कुल दो एटीएस सेंटर स्थापित किए गए हैं, जिनमें से एक दादरी में संचालित हो रहा है। दूसरा एटीएस सेंटर अगले एक महीने में शुरू होने की संभावना है।
इस बीच, सेक्टर 33ए स्थित इस्कान मंदिर और एआरटीओ कार्यालय के पास अभी भी लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जहां वाहन स्वामी मैनुअल फिटनेस जांच करवा रहे हैं। विभाग का कहना है कि जल्द ही दूसरा एटीएस सेंटर भी सक्रिय हो जाएगा, और शहरवासियों को पूरी तरह से आटोमैटिक प्रणाली के प्रति जागरूक किया जाएगा।
शहरवासियों को एटीएस सेंटर के बारे में लगातार जागरूक किया जा रहा है, फिलहाल कुछ दिनों तक मैनुअल प्रक्रिया जारी रहेगी ताकि कोई अव्यवस्था न हो।नंद कुमार, एआरटीओ प्रशासन, गौतमबुद्ध नगर |