बर्तन विक्रेता बनकर दर्शन देते ठाकुर राधावल्लभ लाल।
संवाद सहयोगी, जागरण, वृंदवन। ठाकुर राधावल्लभ मंदिर में चल रहे खिचड़ी उत्सव में देश दुनिया के श्रद्धालु आध्यात्म की हो रही बरसात में शामिल होने को सुबह ठिठुरनभरी सर्दी में पहुंच रहे हैं। सुबह सात बजे जब मंगला आरती के लिए मंदिर के पट खुलते हैं तो ठाकुरजी प्रतिदिन अलग अलग रूपों में दर्शन दे रहे हैं।
आराध्य के दर्शन को मंदिर में हजारों भक्तों की भीड़ के जयकारे गूंज रहे हैं। मंगलवार की सुबह जब मंदिर के पट खुले तो ठाकुरजी बर्तन विक्रेता के रूप में भक्तों को दर्शन दे रहे थे। भोर में घने कोहरे को चीरते हुए ठिठुरनभरी सर्दी में देश के विभिन्न प्रांतों से वृंदावन में डेरा डाले श्रद्धालु मंदिर में चल रहे खिचड़ी उत्सव में ठाकुरजी को दिव्य दर्शन करने को पहुंचने लगे।
सुबह छह बजे तक मंदिर प्रांगण श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भर चुका था। मंदिर के गर्भगृह में सेवायतों ने ठाकुरजी के जगार के पदों का गायन शुरू किया। जगार के 11 पदों का गायन करने के बाद सेवायतों ने जब खिचड़ी उत्सव के पदों का गायन शुरू किया तो मंदिर के गर्भगृह में सेवायतों ने ठाकुरजी को पंचमेवायुक्त खिचड़ी भोग में परोसी।
ठाकुरजी को सर्दी में गर्माहट देने के लिए प्रतिदिन भोर में सेवायत ठाकुरजी को गर्म पंचमेवायुक्त खिचड़ी परोस रहे हैं। सुबह जब मंगला आरती के लिए सात बजे दर्शन खुले तो ठाकुरजी बर्तन विक्रेता के रूप में भक्तों को दर्शन दे रहे थे। ठाकुरजी के आगे चांदी के बर्तन रखे थे। ठाकुरजी की अद्भुत झांकी के दर्शन कर श्रद्धालु आल्हादित हो उठे और भक्तों के जयकारे से मंदिर परिसर गूंज उठा। |
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