नगर निगम गुरुग्राम का कार्यालय। फोटो- जागरण आर्काइव
संवाद सहयोगी, नया गुरुग्राम। लगातार बिगड़ती सफाई व्यवस्था और कचरे के अंबार को लेकर उठे सवालों के बीच नगर निगम गुरुग्राम ने अब सिस्टम को जड़ से बदलने की तैयारी कर ली है। निगम ने घर-घर कूड़ा संग्रहण और उसके वैज्ञानिक निस्तारण के लिए 327 करोड़ रुपये का एक व्यापक मास्टर प्लान शहरी स्थानीय निकाय विभाग को भेज दिया है।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पहली बार पूरे शहर को चार जोनों में बांटकर अलग-अलग एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि पुराने प्रयोगों की नाकामी से सबक लेते हुए इस बार टेंडर शर्तों में बड़ा बदलाव किया गया है।
संशोधित आरएफपी के तहत कोई भी कंपनी शहर के एक से अधिक जोन में काम नहीं कर सकेगी। इससे न सिर्फ एकाधिकार टूटेगा, बल्कि खराब प्रदर्शन की स्थिति में पूरे शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने से भी बचेगी।
जोनवार बजट तय, आबादी और क्षेत्रफल बना आधार
नगर निगम ने शहर के अलग-अलग हिस्सों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चारों जोनों के लिए अलग बजट प्रस्तावित किया है।
- जोन-1 (पुराना शहर): 78.1 करोड़
- जोन-2 (सेक्टर और रिहायशी क्षेत्र): 71.8 करोड़
- जोन-3 (नया गुरुग्राम): 87.8 करोड़
- जोन-4 (गोल्फ कोर्स व सोहना रोड क्षेत्र): 89.2 करोड़
18 महीने में पांच बार बदला प्लान
यह प्रोजेक्ट बीते 18 महीनों से प्रक्रियागत अड़चनों में उलझा रहा। जुलाई 2024 में शुरू हुई टेंडर प्रक्रिया को तकनीकी बदलावों और नीतिगत संशोधनों के चलते पांच बार संशोधित किया गया। जनवरी 2025 में अनुबंध अवधि को पांच से बढ़ाकर सात साल कर दिया गया, ताकि एजेंसियां आधुनिक संसाधनों में निवेश कर सकें। 5 दिसंबर 2025 को अंतिम संशोधन के बाद अब फाइल को प्रशासनिक मंजूरी के लिए भेजा गया है।
इकोग्रीन प्रकरण से निकला नया मॉडल
गुरुग्राम में कूड़ा संकट की गंभीरता जून 2024 में तब सामने आई थी, जब इकोग्रीन कंपनी का अनुबंध खराब प्रदर्शन के कारण रद्द करना पड़ा। इसके बाद अस्थायी एजेंसियों के सहारे व्यवस्था चलाई गई लेकिन हालात और बिगड़ते चले गए। नई योजना का उद्देश्य इसी अस्थायी मॉडल को खत्म कर स्थायी, जवाबदेह और तकनीक-आधारित व्यवस्था लागू करना है।
जीपीएस, सेग्रिगेशन और बायोमेट्रिक अनिवार्य
मास्टर प्लान में पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है। कचरा उठाने वाले सभी वाहनों में जीपीएस लगाया जाएगा, जिसकी निगरानी निगम के कंट्रोल रूम से होगी। घरों से गीला, सूखा और खतरनाक कचरा अलग-अलग उठाना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों पर भारी जुर्माने का प्रविधान रखा गया है। सफाई कर्मियों की उपस्थिति बायोमेट्रिक सिस्टम से दर्ज होगी, ताकि फर्जी नियुक्तियों पर रोक लग सके।
फरवरी से जमीन पर दिख सकता है असर
नगर निगम के अनुसार, सरकार से मंजूरी मिलते ही ग्लोबल टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। जनवरी के अंत तक प्रक्रिया पूरी होने और फरवरी के मध्य तक नई एजेंसियों के काम शुरू करने की उम्मीद है। योजना के सफल क्रियान्वयन से न सिर्फ शहर की सफाई व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि स्वच्छ सर्वेक्षण में गुरुग्राम की रैंकिंग भी बेहतर हो सकती है।
घरों से कूड़ा उठाने के लिए 327 करोड़ रुपये का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है। अनुमति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
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सुंदर श्योराण, कार्यकारी अभियंता, एसबीएम, नगर निगम गुरुग्राम |
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