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फ्रेंड्स कॉलोनी की 2 प्लेसमेंट एजेंसियां निकलीं फ्राॅड, विदेश मंत्रालय के आदेश पर दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR

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जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। विदेश मंत्रालय के अधीन प्रोटेक्टर ऑफ एग्रीमेंट्स कार्यालय के निर्देश पर न्यू फ्रेंड्स काॅलोनी थाना पुलिस ने विदेश में नौकरी दिलाने वाली दो प्लेसमेंट एजेंसियों पर एफआईआर दर्ज की है। यह दोनों एजेंसियां न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में मौजूद हैं। इनके पास विदेशों में नौकरी दिलवाने का अधिकृत लाइसेंस नहीं था।

अलीगढ़ निवासी शिकायतकर्ता शाहीन इशरत ने बताया कि दिल्ली की एक भर्ती एजेंसी ने उसे कुवैत में डेटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी का वादा किया था। इसके बदले उससे 16 लाख रुपये वसूले गए। तीन महीने प्रक्रिया के बाद एजेंसी ने कुवैत की बजाय उसकी नौकरी का स्थान थाईलैंड और फिर लाओस कर दिया।

चूंकि वह रकम दे चुका था तो वह नौकरी के लिए थाईलैंड पहुंच गया। वहां पहुंचने पर उसे धोखाधड़ी वाली गतिविधियों में शामिल होने को कहा गया। इशरत ने मना किया तो उसे 26 अप्रैल 2025 को लाओस भेजा गया।

वहां उसे भारत में क्रिप्टोकरेंसी बेचने का काम सौंपा, वो भी उसने मना कर दिया। धोखाधड़ी वाली बात महसूस होने पर वह किसी तरह सात मई 2025 को भारत लौट आया और प्रोटेक्टर ऑफ एग्रीमेंट्स कार्यालय में शिकायत की थी।

यूपी गोरखपुर के दो युवकों के साथ भी इसी तरह की धोखाधड़ी हुई। वे एक एजेंट के पास गए थे, जिसने उन्हें विदेशी नौकरी दिलाने का वादा किया। इसके बाद भर्ती एजेंसी के निदेशक ने गोरखपुर में एक इंटरव्यू रखा, जहां उन्हें कारपेंटर की नौकरी के लिए चयनित किया गया।

हर युवक से 80,000 रुपये की सेवा शुल्क, वीजा और फ्लाइट टिकट का भुगतान लिया गया। दोनों युवक 22 जून 2025 को दुबई पहुंचे, जहां उन्हें शटरिंग कारपेंटर के तौर पर काम करने को कहा गया, जो कि उनके प्रशिक्षण के विपरीत था।

जब उन्होंने दिल्ली स्थित एजेंसी से संपर्क किया, तो उन्हें काम जारी रखने के लिए कहा गया और आश्वासन दिया गया कि उन्हें जल्द ही उनकी पसंदीदा नौकरी मिल जाएगी। दो महीने तक काम करने के बाद दोनों को मनमुताबिक नौकरी नहीं मिली।

यही नहीं जहां वे काम कर रहे थे, उनकी तनख्वाह रोक दी गई और कंपनी से बाहर निकाल दिया। वे दुबई में बिना पैसे और खाने के कई दिन तक फंसे रहे और किसी तरह से एक रिश्तेदार से पैसे लेकर नौ अगस्त 2025 को भारत लौटे।

न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी पुलिस स्टेशन में इमिग्रेशन एक्ट, 1983 की धारा 10 और 24 के तहत मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि दोनों एजेंसियां न तो रजिस्टर्ड थीं और न उनके पास विदेशों में नौकरी दिलाने का वैध अधिकार था।

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