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भागीरथपुरा दूषित जल कांड में रिपोर्टों का विरोधाभास : सरकारी लैब कह रही- पानी में बैक्टीरिया, निजी लैब बता रही शुद्ध

Chikheang 2026-1-5 16:26:38 views 559
  

लैब में पानी की टेस्टिंग (प्रतीकात्मक चित्र)



डिजिटल डेस्क, इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई 17 मौतों के बाद जांच रिपोर्टों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। क्षेत्र से लिए गए पानी के सैंपल अलग-अलग लैब में जांच के लिए भेजे गए, लेकिन रिपोर्टों में चौंकाने वाला अंतर सामने आया है। दो सरकारी लैब ने पानी में खतरनाक बैक्टीरिया की पुष्टि की है, जबकि एक निजी लैब की रिपोर्ट में पानी को पूरी तरह शुद्ध बताया गया है।

भागीरथपुरा में सप्लाई किए गए पानी की जांच एमजीएम मेडिकल कॉलेज, नगर निगम की लैब और एक निजी मेडिकल कॉलेज की लैब में कराई गई थी। एमजीएम मेडिकल कॉलेज और नगर निगम की लैब रिपोर्ट में जहां जानलेवा बैक्टीरिया पाए गए, वहीं निजी मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट ने सभी दावों को उलझा दिया है।

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इससे पहले मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव हासानी स्वयं यह पुष्टि कर चुके हैं कि भागीरथपुरा का पानी दूषित है और उसमें जानलेवा बैक्टीरिया मौजूद हैं। वहीं निजी लैब में सैंपल भेजे जाने को लेकर भी असमंजस की स्थिति है। कलेक्टर शिवम वर्मा का कहना है कि सैंपल स्वास्थ्य विभाग की ओर से भेजे गए थे, जबकि सीएमएचओ डॉ. हासानी ने स्पष्ट किया है कि सैंपल उन्होंने नहीं भेजे।
सरकारी लैब की रिपोर्ट

एमजीएम मेडिकल कॉलेज लैब (1 जनवरी 2025)

माइक्रोबायोलॉजी लैब की रिपोर्ट में ई-कोलाई, शिगेला समेत अन्य बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है।

नगर निगम लैब (4 जनवरी 2025)
मूसाखेड़ी स्थित लैब की रिपोर्ट में बोरिंग का पानी भी दूषित पाया गया। पानी में फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आई है।
निजी लैब की रिपोर्ट

अरबिंदो अस्पताल लैब (4 जनवरी 2025)
लैब रिपोर्ट में किसी भी प्रकार के बैक्टीरिया की पुष्टि नहीं की गई और पानी को शुद्ध बताया गया है।
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