search

उत्तराखंड: पौड़ी में मिले तांबे की खान होने के प्रमाण, अब उपग्रह से किया जाएगा खनिजों का विस्तृत अध्ययन

deltin33 2026-1-5 02:25:45 views 718
  

पौड़ी जिले के खिर्सू ब्लाक का डोबरी गांव। वहीं, गुफा के बाहरी तरफ सैंपल लेते हुए भ-वैज्ञानी डा. एमपीएस बिष्ट। स्वयं। साभार डा. एमपीएस बिष्ट  



विनय बहुगुणा, जागरण श्रीनगर गढ़वाल: पौड़ी जिले के खिर्सू ब्लाक स्थित डोबरी गांव में तांबे की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भू-गर्भ विज्ञानियों की टीम को यहां गुफा की चट्टानों में तांबा समेत अन्य खनिज तत्व मिले। इन चट्टानों के सैंपल अब जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। जल्द इस क्षेत्र में उपग्रह के माध्यम से भी खनिजों की उपलब्धता के बारे में गहन अध्ययन किया जाएगा।

गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भू-गर्भ विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डा. एमपीएस बिष्ट ने शोध छात्रा पल्लवी जोशी व गाइड सोबत सिंह के साथ गुफा के बाहरी और भीतरी हिस्से का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें गुफा की चट्टानों में तांबे की मौजूदगी मिली।

उन्होंने गुफा की चट्टानों के सैंपल भी लिए। डा. बिष्ट ने बताया कि गुफा और आसपास के क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान इस बात की पुष्टि हुई कि यहां तांबा समेत अन्य खनिजों का भंडार है। क्षेत्र के बुजुर्गों का भी ऐसा ही मानना है।

  

यही नहीं, नवीं से 15वीं सदी के बीच राजशाही के दौर में और इसके बाद गोरखा शासनकाल में भी इस गुफा से तांबा खनन के प्रमाण मिले हैं। उन्होंने बताया कि यहां कापर पाइराइट, मैलाकाइट, कैल्साइट आदि खनिज तत्वों की मौजूदगी है। चमोली जिले में गौचर के ऊपर रानीगढ़ व धनपुर क्षेत्र के मध्य तांबे की खान होने की पुष्टि हो चुकी है।

  

वर्ष 1739 में बैरेट लिखते हैं, यह गुफा, पौड़ी जिले के पिठुंड्डी से छह किमी पैदल दूरी पर स्थित डोबरी गांव से करीब दो किमी ऊपर घने जंगल में है। चट्टानी क्षेत्र के बीच मौजूद यह गुफा काफी लंबी है।

विषम भूगोल वाला यह गुफा क्षेत्र हिंसक वन्य जीवों का भी प्रवास है, ऐसे में यहां पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि यह गुफा करीब पांच किमी लंबी है। इसके एक ओर डोबरी व दूसरी ओर पोखरी गांव है। दोनों गांवों के बीच हवाई दूरी पांच किमी है।

  
गुफा का होगा अध्ययन व अवलोकन

जल्द गढ़वाल केंद्रीय विवि के भू-गर्भ विज्ञान विभाग की टीम डोबरी में संभावित तांबे की खान का गहन अध्ययन के साथ अवलोकन करेगी। यहां विशेषज्ञों के साथ खनिज की मात्रा, खनन की संभावना, खनन से स्थानीय परिवेश पर पड़ने वाले प्राकृतिक व सामाजिक प्रभाव, रोजगार, प्राप्त खनिज का शोधन, खनिज की सप्लाई सहित कई विषयों को लेकर कार्ययोजना तैयार की जाएगी।


डोबरी गांव से करीब दो किमी ऊपर घने जंगल में स्थित यह प्राचीन गुफा अंदर से दो हिस्सों में बंटी है। अंदरूनी हिस्से में दोनों ओर चट्टानों पर तांबे के अयस्क होने की संभावना है। शुरुआती 50 मीटर की दूरी पर ही इसके प्रमाण मिले हैं। अब जरूरी उपकरणों के साथ गुफा का अवलोकन किया जाएगा। इसके बाद ही खनिज की उपलब्धता की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
- डा. एमपीएस बिष्ट, विभागाध्यक्ष, भू-गर्भ विज्ञान विभाग, गढ़वाल केंद्रीय विवि, श्रीनगर


यह भी पढ़ें- देश की सबसे लंबी रेल सुरंग मार्च तक होगी तैयार, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को मिलेगी रफ्तार

यह भी पढ़ें- फिर चर्चा में आई सिलक्यारा सुरंग, टनल का 90 % कार्य हुआ पूरा; चारधाम यात्रा में निभाएगी अहम भूमिका
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4710K

Credits

administrator

Credits
475558