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कौन तोड़ेगा ओपी शर्मा का रिकार्ड, लगातार आठ बार एमएलसी रहकर खीचीं लंबी लकीर

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कौन तोड़ेगा ओपी शर्मा का रिकार्ड, लगातार आठ बार एमएलसी रहकर खीचीं लंबी लकीर  

जागरण संवाददाता, मेरठ : उत्तर प्रदेश में मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार आठ बार एमएलसी रहकर उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष व शिक्षक नेता स्व. ओम प्रकाश शर्मा ने अनूठा रिकार्ड बनाया है। उनका यह रिकार्ड शायद की कोई तोड़ पाएगा। वहीं, शिक्षक हितों के लिए किए गए जीवन पर्यंत संघर्ष और कार्यों के कारण वे शिक्षकों के भीष्म पितामह भी कहलाए। पांच जनवरी-26 को उनकी 93 वीं जयंती है। जयंती पर सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं उनका भावपूर्ण स्मरण करेंगे। जनता इंटर कालेज खरखौदा मेरठ में जिला कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी एवं सदस्य सुबह 10.30 बजे उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे।  



ओम प्रकाश शर्मा उत्तर प्रदेश की शिक्षक राजनीति में एक ऐसा नाम रहे हैं, जो शिक्षक आंदोलन, शिक्षा सुधार और विधान परिषद की गरिमा के प्रतीक माने जाते हैं। उन्होंने करीब पांच दशकों तक उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य के रूप में सेवा करके एक दुर्लभ कीर्तिमान स्थापित किया। उनका संपूर्ण राजनीतिक जीवन शिक्षा और शिक्षक हितों को समर्पित रहा। उनका जन्म पांच जनवरी 1933 को ग्राम सूजती मेरठ (अब बागपत) में हुआ था। उन्होंने जनता इंटर कालेज खरखौदा मेरठ में अंग्रेजी के प्रवक्ता के रूप में अपनी सेवाएं दीं। विद्यालय में उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है।  



-पहली बार 72 में मेरठ-सहारनपुर क्षेत्र से चुने गए एमएलसी-



ओमप्रकाश शर्मा वर्ष 1972 में पहली बार मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य चुने गए। इसके बाद वे लगातार करीब 48 वर्षों तक आठ बार एमएलसी रहे। यह अवधि उन्हें उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले विधान परिषद सदस्य के रूप में स्थापित करती है। वर्ष-2020 में पहली बार उन्हें चुनावी पराजय का सामना करना पड़ा। उनकी उपलब्धियों में शिक्षकों के वेतनमान और भत्तों में सुधार, समय पर वेतन भुगतान, सेवा सुरक्षा और पेंशन संबंधी समस्याएं, शिक्षक भर्ती में पारदर्शिता, चयन बोर्डों की कार्यप्रणाली में सुधार व शिक्षा के निजीकरण का विरोध मुख्य रूप से रहा है।





विधान परिषद में अस्थायी सभापति की जिम्मेदारी भी संभाली-



उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) के मंडलीय अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा का कहना है कि अपनी वरिष्ठता, अनुभव और निष्पक्षता के कारण उन्होंने विधान परिषद में अस्थायी सभापति के रूप में भी कार्य किया। उनके भाषण संयमित, तथ्यपूर्ण और विषय केंद्रित होते थे, जिससे सदन की गरिमा बनी रहती थी। संघ के जिलाध्यक्ष गजेंद्र वर्मा व जिला मंत्री डा. राजेश कुमार शर्मा का कहना है कि गत 16 जनवरी 2021 को उनका निधन हो गया। उनके निधन से प्रदेश की राजनीति, विशेषकर शिक्षक समाज को अपूरणीय क्षति पहुंची। वे आज भी शिक्षक राजनीति के भीष्म पितामह के रूप में स्मरण किए जाते हैं। संघ के संयुक्त मंत्री व केडी शुक्ला का कहना है कि वे केवल एक राजनेता नहीं थे, वे शिक्षकों की आवाज, शिक्षा के सच्चे सेवक और लोकतांत्रिक मूल्यों के रक्षक थे।
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