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कलिंग लिटरेरी फेस्टिवल: भुवनेश्वर में 8 जनवरी से साहित्य, संवाद और संस्कृति का महोत्सव, आएंगे 11 देशों के वक्ता

Chikheang 5 day(s) ago views 176
  

भुवनेश्वर में कलिंग लिटरेरी फेस्टिवल को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में जानकारी देते अतिथि‍।


जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। कलिंग लिटरेरी फेस्टिवल (केएलएफ) ने अपने 12वें संस्करण की औपचारिक घोषणा कर दी है। केएलएफ 2026 का आयोजन आगामी 8 से 11 जनवरी 2026 तक मेफेयर, भुवनेश्वर में किया जाएगा।    चार दिनों तक चलने वाला यह प्रतिष्ठित साहित्यिक महोत्सव ओडिशा की ऐतिहासिक मंदिर नगरी में विचार-विमर्श, संवाद और बौद्धिक मंथन का मंच बनेगा।  

केएलएफ 2026 अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी संस्करण होगा, जिसमें 100 से अधिक सत्र, पांच समानांतर हॉल, 500 से अधिक वक्ता और 200 कलाकार भाग लेंगे। इस महोत्सव में भारत के साथ-साथ दक्षिण एशिया, अमेरिका, यूरोप और विश्व के विभिन्न हिस्सों से लेखक, अनुवादक, विचारक, कलाकार, विधायक, राजनयिक, नीति-निर्माता और सांस्कृतिक नेतृत्व शामिल होंगे।    इस समारेाह में 11 देशों के वक्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरिबाबू कंभमपति के मुख्य आतिथ्य में महोत्सव का उद्घाटन होगा।    उद्घाटन सत्र में श्रीलंका के ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा एवं सामुदायिक सशक्तिकरण मंत्री डॉ. उपुली पन्निलागे, ओडिशा के उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव, संस्कृति एवं खेल मंत्री सूर्यवंशी सुरज, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार, नेपाल के पूर्व सांसद डॉ. विनोद चौधरी और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता लेखिका डॉ. प्रतिभा राय सहित कई विशिष्ट अतिथि मौजूद रहेंगे।    पहले दिन 8 जनवरी की शाम केएलएफ लिटरेरी अवॉर्ड्स का वितरण, ‘लेजिस्लेटर्स फॉर लिटरेचर’ का लोकार्पण और ‘मेड इन नेपाल’ विषय पर विशेष सत्र होगा। इसके बाद पद्मश्री लोकगायिका मालिनी अवस्थी और यतीन्द्र मिश्र की संगीतमय प्रस्तुति महोत्सव की भव्य शुरुआत करेगी।  

केएलएफ 2026 की थीम स्टोरीज़ दैट शेप ह्यूमैनिटी: ट्रांसलेटिंग वर्ल्ड्स, ट्रांसफॉर्मिंग फ्यूचर्स है, जो अनुवाद, कथा-वाचन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के महत्व को को दर्शाएगा। केएलएफ के संस्थापक एवं निदेशक रश्मि रंजन परिडा ने कहा कि बीते 12 वर्षों में यह मंच भाषा, साहित्य और पीढ़ियों के बीच संवाद का सशक्त माध्यम बना है।    वहीं केएलएफ के सीईओ एवं संरक्षक अशोक कुमार बल ने इसे मानव सभ्यता की सबसे स्थायी तकनीक बताया। महोत्सव में साहित्य, राजनीति, लोकतंत्र, महिला लेखन, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, पर्यावरण, सिनेमा, प्रदर्शन कला, भारतीय ज्ञान परंपरा, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे विषयों पर सत्र आयोजित होंगे।
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