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घाटमपुर पावर प्लांट हादसा; कर्मी की मौत से आक्रोश, लोगों ने प्लांट का रास्ता किया जाम

LHC0088 2025-10-7 22:36:45 views 1327
  घाटमपुर के नेयवेली पावर प्लांट के बाहर बैठे लोग। जागरण





संवाद सहयोगी, जागरण, घाटमपुर(कानपुर)। नेयवेली पावर प्लांट में 400 किलो वजनी सिलिंडर के नीचे दबने से टेक्नीशियन की मौत के बाद बीजीआर एनर्जी सिस्टम लिमिटेड कंपनी फिर विवादों में घिर गई है। यह कंपनी पावर प्लांट में मेंटीनेंस का कार्य देख रही है। पहले भी इस कंपनी से जुड़े विवाद सामने आ चुके हैं। नेयवेली पावर प्लांट पर हुए हादसे को लेकर मंगलवार सुबह कर्मियों ने प्लांट के रास्ते पर जाम लगा दिया। कर्मचारियों को अंदर जाने से रोका। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें



कर्मचारियों के प्रति उदासीनता और लापरवाही की लगातार शिकायतें आती रही हैं। वर्ष 2020 में भी हादसे में एक मजदूर की मौत हो चुकी है। कई बार इसी कंपनी के ठेकेदारों के अंडर में काम करने आए मजदूरों ने हंगामा किया है। पावर प्लांट के अधिकारी काम में देरी के लिए भी इसी कंपनी को जिम्मेदार मानते रहे हैं। हालांकि बड़ा सवाल यह भी है कि इतने पर भी कंपनी को लगातार कैसे काम मिलता रहा है।

नेयेवेली उत्तर प्रदेश पावर लिमिटेड (एनयूपीपीएल) एनएलसी इंडिया लिमिटेड (51 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (49 प्रतिशत) के बीच एक संयुक्त उपक्रम है। 1980 मेगावाट के इस पावर प्लांट में 660 मेगावाट की तीन यूनिट हैं। पहली यूनिट से विद्युत उत्पादन शुरू हो चुका है। जबकि, दूसरी यूनिट बनकर तैयार है और जल्द ही विद्युत उत्पादन शुरू होगा। वहीं, तीसरी यूनिट का कार्य भी जारी है। पावर प्लांट की कुल लागत 21 हजार 780 करोड़ रुपये है। इस पावर प्लांट से 75 प्रतिशत बिजली उत्तर प्रदेश तो 25 प्रतिशत असम सरकार को जाएगी। पावर प्लांट में प्रमुख रूप से तीन कंपनियां काम कर रही है।



बायलर से संबंधित कार्य एलएंडटी, टरबाइन व जेनरेटर से संबंधित कार्य जीई पावर और बीओपी (बैलेंस आफ पावर प्लांट) यानि कि मेंटीनेंस से संबंधित कार्य बीजीआर एनर्जी सिस्टम लिमिटेड कर रही है। इन सभी कंपनियों में कई ठेकेदार काम कर रहे हैं। पावर प्लांट में वर्तमान में फतेहपुर, बांदा, हमीरपुर जिलों के साथ ही बिहार, झारखंड राज्यों से भी काम कर रहे हैं। बीजीआर कंपनी से जुड़ी पेटी कंपनियों द्वारा मजदूरों का भुगतान न करने के कई बार मामले सामने आ चुके हैं। इसके चलते वर्ष 2021, 2022 में कई बार मजदूरों ने हंगामा किया था। 24 सितंबर 2020 को भी एक पिलर के नीचे दबकर एक मजदूर की मौत हो गई थी। तब भी अन्य मजदूरों ने उदासीनता का आरोप लगाया था।
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