जागरण संवाददाता, कानपुर। उम्मीदें 2026: अपराध पर अंकुश लगाने व जनता की समसया का जल्द निस्तारण के लिए अब पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों के लिए भी वर्ष 2026 नई उम्मीदें लेकर आ रहा है। शहर में अब 11 और नए थाने बनाने का लक्ष्य है। ये नए थाने उन थानाक्षेत्रों से कटकर बनेंगे, जिनका क्षेत्रफल ज्यादा होने से पीड़िताें को काफी दूर से थानों में आना पड़ता है। इससे पुलिसकर्मी क्षेत्र में आसानी से गश्त कर सकते हैं और घटनास्थल पर भी जल्द पहुंच सकते हैं।
यही नहीं इस साल राजपत्रित पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों के लिए भी आवासीय इमारत का निर्माण होने जा रहा है। इसके साथ ही कई थानों और आवास के लिए भी नई इमारत का निर्माण इस वर्ष पूरा हो जाएगा। इससे पुलिसकर्मियों को काफी राहत मिलेगी। वहीं, पुलिस आयुक्त कार्यालय के लिए अब तक रेवथ्री के पास, म्योर मिल व रायपुरवा क्षेत्र में जमीन देखी जा चुकी है।
चार जोन में बांटा शहर को
बेहतर पुलिसिंग के लिए शहर को पूर्वी, पश्चिम, दक्षिण और सेंट्रल जोन में बांटा गया है, जिसमें 52 पुलिस थाने और एक साइबर क्राइम थाना बना हुआ है। इसमें सेंट्रल जोन के थानों का क्षेत्रफल तो कम है और पुलिस घटनास्थल पर जल्द पहुंच जाती है, लेकिन पूर्वी, पश्चिम व दक्षिण जोन के बाहरी क्षेत्र के थानाक्षेत्र काफी दूरी तक फैला है, जिससे पीड़ितों को थाने पहुंचने में भी काफी समय लगता है। इसी तरह से पुलिस भी समय पर घटनास्थल पर नहीं पहुंच पाती है, जिसका फायदा अपराधियों को मिलता है और वह घटना को अंजाम देकर आसानी से पुलिस के पहुंचने से पहले ही फरार हो जाते हैं।
इन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा
इसको लेकर पुलिस अधिकारियों ने शासन 11 नए और थाने बनाने का प्रस्ताव भेजा था, जिसकी स्वीकृत मिल गई है। इसमें चकेरी थाने से कटकर कोयला नगर थाना, काकादेव से कटकर शास्त्रीनगर, कल्याणपुर से कटकर इंद्रानगर, घाटमपुर से कटकर पतारा, साढ़ से भीतरगांव, बिठूर थाने से कटकर पर्यटक थाना बनने तय हो चुका है। इसके अलावा तीन और थाने बनेंगे, लेकिन वह किस जोन में बनाए जा सकते हैं। इसको लेकर चिह्नांकन किया जा रहा है। इसी तरह से शासन से घाटमपुर और बिल्हौर, सांढ़, रेउना, सेन पश्चिम पारा थाना व आवासीय इमारतों का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके इस साल पूरा होने की संभावना है।
साइबर क्राइम थाना की भी नई इमारत
वहीं, साइबर क्राइम थाना की भी नई इमारत पुलिस लाइन में बन रही है। वहीं, अरौल थाने की नई इमारत का निर्माण जनवरी 2026 में ही शुरू हो जाएगा। इसके लिए बजट भी मिल चुका है। वहीं, सचेंडी, नर्वल और गुजैनी थाने की नई इमारत के लिए भी शासनसे स्वीकृति मिल चुकी है। बजट मिलना बाकी है। अधिकारियों को इस साल बजट मिलने की पूरी उम्मीद है। इसके साथ ही बेकनगंज, सजेती, बिधनू, रावतपुर, जाजमऊ थाने के नए भवन के लिए जमीन चिह्नित की जा रही है। जबकि फजलगंज, बजरिया, ग्वालटोली, स्वरूप नगर और गोविंद नगर थाने के नए भवन के लिए प्रस्ताव भेजा जाना है।
इन थानों की बैरक का भी हो रहा निर्माण
पुलिस अधिकारी के अनुसार, अर्मापुर, ककवन शिवराजपुर, महाराजपुर, पनकी, बाबूपुरवा थानों की बैरक का निर्माण हो रहा है, जबकि कल्याणपुर, कलक्टरगंज, बिठूर थाने की बैरक निर्माण भी जल्द शुरू हो सकता है।
एसीपी से डीसीपी तक के अधिकारियों के लिए भी बन रही आफिसर्स कालोनी
इस साल पुलिस अधिकारियों के लिए आवास भी बनाए जा रहे हैं। ये आवास यातायात पुलिस लाइन में राजकीय आफिसर्स कालोनी के नाम से होंगे, जिसमें 48 फ्लैट होंगे। इसी तरह से मंधना के बगदौधी कछार में पुलिसकर्मियों के लिए 12 मंजिला चार इमारतों का निर्माण हाे रहा है। हर इमारत में 48-48 प्लैट होंगे यानी कुल 192 फ्लैट बनने हैं। इसे ट्रांजिट हास्टल नाम दिया गया है।
बेहतर पुलिसिंग के लिए अभी ये हैं चुनौतियां
- आठ हजार पुलिस फोर्स है, लेकिन कम से कम 12 हजार की जरूरत है।
- 455 यातायात पुलिसकर्मी हैं और 900 की जरूरत है।
- पांच हाईड्रा और क्रेन की जरूरत है।
- 15 थानों की गाड़ियां ठीक हैं, ऐसे में अन्य सभी थानों में नई गाड़ियां चाहिए।
- इटेंलीजेंस यूनिट का बड़ा सेटअप की जरूरत है।
- हर जोन में पुलिस लाइन होना चाहिए।
- हर थाने और अधिकारी के कार्यालय में दो-दो कंप्यूटर आपरेटर होने चाहिए।
- साइबर क्राइम की बड़ी यूनिट और प्रशिक्षित पुलिसकर्मी चाहिए।
- दो कंपनी एसडीआरएफ की आवश्यकता है,जिसमें जिसमें 60 से 70 जवान हो। इससे गंगा में पट्रोलिंग हो सके।
- डाग स्कवाड में सिर्फ एक श्वान है, जबकि शहर की आबादी और क्षेत्रफल को देखते हुए 24 होने चाहिए।
- फायरिंग रेंज, फोर्स ट्रेनिंग सेंटर की आवश्यकता है।
- 90 डिग्री पर फायर करने वाली कार्नर शाट गन, एमपी-5, एके 47 जैसे आधुनिक हथियार की आवश्यकता है।
- टियर गैस गन, रबड़ गैस, दंगा नियंत्रण के लिए ब्रज वाहन व वाटर कैनन गन कम से कम छह-छह चाहिए।
- आगन बुझाने के लिए हर जोन में एक-एक टेली स्कोपिक लेडर, हाईड्रोलिक प्लेटफार्म गाड़ी चाहिए।
कानपुर कमिश्नरेट का क्षेत्रफल काफी बड़ा है। यहां की आबादी को देखते हुए संशाधनों की काफी कमी है। ये पुलिस के लिए चुनाैती है। फोर्स, गन समेत काफी संशाधन की आवश्कता है। पुलिस लाइन सेटअप के लिए गंगा पार 100 एकड़ जमीन के लिए प्रस्ताव भेजा जाना है। कमिश्नरेट आने के बाद अपराध कम हुए और जनता की समस्या का समाधान भी हो रहा है।
- विनोद कुमार सिंह, संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय |