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कर्ण के इस बाण से चिंता में पड़ गए थे भगवान श्रीकृष्ण, अर्जुन को बचाने के लिए चली ये चाल

deltin33 2025-10-7 22:05:36 views 1275
  Mahabharata story in hindi कर्ण ने क्यों किया अमोघ अस्त्र का इस्तेमाल।





धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कुंती पुत्र कर्ण को एक श्रेष्ठ धनुर्धर होने के साथ-साथ महादानी की उपाधि भी दी जाती है। अर्जुन को एक दिव्य शक्ति बाण मिला हुआ था, जिसके प्रहार से बचना किसी के लिए भी नामुमकिन था। उसने यह बाण विशेष रूप से अर्जुन के लिए ही रखा था, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने एक ऐसी चाल चली कि वह अपने इस का इस्तेमाल अर्जुन पर नहीं कर सका। चलिए जानते हैं इस बारे में। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
कैसे मिला शक्ति बाण

महाभारत में वर्णित कथा के अनुसार, जब इंद्र देव एक वृद्ध ब्राह्मण का वेश कर्ण के पास दिव्य कवच और कुंडल मांगने के लिए आए, तब कर्ण अपने कवच और कुंडल देने के लिए तैयार हो गया, लेकिन साथ ही उसने इंद्र देव से वासवी शक्ति नामक अमोघ शस्त्र की मांग की।



यह एक ऐसा शस्त्र था, जो अचूक और कभी न विफल होने वाला था। देवराज इंद्र ने कर्ण को शक्ति बाण देते हुए कहा कि तुम इस बाण का इस्तेमाल केवल एक ही बार कर सकोगे। तुम्हारे उपयोग के बाद यह मेरे पास वापस आ जाएगा।

  

(Picture Credit: Freepik) (AI Image)
भगवान श्रीकृष्ण ने चली ये चाल

महाभारत के युद्ध के दौरान एक समय ऐसा आया जब कर्ण, अर्जुन पर भारी पड़ने लगा था। वह अपने इंद्र देव द्वारा प्राप्त शक्ति बाण का उपयोग अर्जुन पर करना चाहता था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने एक चाल चली और भीम व हिडिंबा के पुत्र घटोत्कच को लड़ने के लिए कौरवों की सेना की तरफ भेजा। घटोत्क ने कौरवों की सेना में हाहाकार मचा दिया। उसपर नियंत्रण पाना किसी के लिए भी मुश्किल था।



  

(Picture Credit: Freepik) (AI Image)
इसलिए करना पड़ा अमोघ बाण का इस्तेमाल

भीष्म पितामह भी घटोत्कच पर विजय प्राप्त नहीं कर सके। कौरवों को लगने लगा था कि इस तरह तो घटोत्कच उनकी सेना को खत्म कर देगा। तब दुर्योधन और दुशासन ने मिलकर कर्ण को घटोत्कच पर शक्ति बाण का इस्तेमाल करने के लिए कहा। न चाहते हुए भी कर्ण को घटोत्कच पर अपने इस अमोघ बाण का इस्तेमाल करना पड़ा। तब कर्ण ने अपने शक्ति बाण से घटोत्कच का वध किया। इस तरह वह अपने अमोघ अस्त्र का इस्तेमाल अर्जुन पर नहीं कर सका।



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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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