GST FRAUD
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। एक महिला कारोबारी की पहचान चोरी कर उनके नाम से फर्जी फर्म खड़ी करने और जीएसटी सिस्टम में सेंध लगाकर टैक्स चोरी का मामला सामने आया है। पीड़िता ने स्वरोजगार के तहत ब्यूटी पार्लर का काम करने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट के माध्यम से जीएसटी पंजीकरण कराया था लेकिन इसी पंजीकरण की आड़ में उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर आरोपितों ने सरकार को राजस्व हानि पहुंचाने वाला बड़ा खेल खेल दिया।
पेपर्स लगाकर खोल दिया फर्जी फर्म
पीड़िता के दस्तावेजों के आधार पर फर्म तो खोली, लेकिन वह उसका प्रयोग नहीं कर पाईं। उनके जीएसटी नंबर पर 1.28 करोड़ रुपये का फर्जी तरीके से विभाग को आइटीसी क्लेम किया गया। नोटिस मिलने पर महिला को फर्जीवाड़े का पता चला। पीड़िता की शिकायत पर कविनगर थाने में केस दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
विवेकानंद नगर निवासी कोमल त्यागी ने पुलिस को शिकायत देकर बताया कि उन्होंने ब्यूटी पार्लर का काम करने के लिए जन सेवा केंद्र संचालिका प्रियंका सक्सेना नामक महिला को अपने दस्तावेज जीएसटी में पंजीकरण के लिए दिए थे। प्रियंका ने उन्हें बताया कि सीए नीरज शर्मा के जरिए पंजीकरण कराया जा रहा है।
आईटीसी रिवर्स कराया गया
उन्होंने मेकओवर बाई कोमल के नाम से आवेदन के लिए कहा था लेकिन उनके पास कोमल ट्रेडर्स के नाम से पंजीकरण आया। बीते वर्ष मार्च में उनके पास सीजीएसटी का नोटिस आया जिसमें गलत तरीके से 1.28 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लेना बताया गया। उन्होंने विभाग में अपना पक्ष रखकर बताया कि आईटीसी रिवर्स कराया गया।
मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी का गलत इस्तेमाल
इसी दौरान उन्हें पता चला कि जीएसटी पंजीकरण में उनका मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी की जगह किसी अन्य व्यक्ति की मेल आईडी और मोबाइल नंबर प्रयोग किया गया है। उन्होंने विभाग को अपनी मेल आईडी और मोबाइल नंबर देकर अपडेट भी कराया। सात अगस्त को उनके व्यापार स्थल पर एसजीएसटी की जांच शाखा ने जांच की।
उन्हें बताया गया कि उनके जीएसटी नंबर के माध्यम से करीब ढाई करोड़ रुपये की आइटीसी का लाभ अन्य ट्रेडर्स को दिलाया गया है, जबकि उन्होंने किसी को आइटीसी का लाभ देने के लिए बिलिंग नहीं की थी। परेशान होकर उन्होंने पुलिस को शिकायत देकर केस दर्ज कराया है।
जीएसटी पंजीकरण से पहले करते हैं जांच
जीएसटी विभाग में आनलाइन पंजीकरण व्यवस्था लागू है। विभाग आवेदन आने के बाद कई बार मौके पर आवेदक के व्यापार स्थल की जांच भी करता है, लेकिन जिन मामलों में भी फर्जी आइटीसी दावे सामने आते हैं उसमें विभागीय अधिकारी आनलाइन व्यवस्था में पंजीकरण के समय मौके पर जांच न करने की व्यवस्था का हवाला देते हैं।
“पीड़िता की शिकायत पर केस दर्ज कर जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।“
-सूर्यबली मौर्य, एसीपी कविनगर
“जीएसटी फर्म पंजीकरण के समय उसका विभागीय टीम के द्वारा स्थलीय भौतिक सत्यापन कराया जाता है। इस फर्म का पंजीकरण किस आधार पर किया गया। इसकी जांच कराई जाएगी।“
-मानवेंद्र सिंह, एडिशनल कमिश्नर राज्यकर विभाग
यह भी पढ़ें- 20 शेल कंपनियों से 180 करोड़ की जीएसटी का खेल, लंबी छानबीन के बाद साइबर पुलिस ने गिरोह को दबोचा; दो गिरफ्तार |