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भारत के इस राज्य में बर्ड फ्लू का अटैक! लक्षण दिखने पर क्या करें और क्या नहीं, पढ़ें पूरी जानकारी

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केरल में बर्ड फ्लू का हमला: जानें लक्षण, कारण और बचाव के उपाय (Picture Credit- AI Generated)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। केरल के अलाप्पुझा और कोट्टायम समेत कई इलाकों में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) के मामले सामने आए हैं। इस वायरस के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। यह एक खतरनाक वायरस है, जो आमतौर पर पक्षियों को अपना शिकार बनाता है, लेकिन अब यह वायरस इंसानों पर भी हमला करने लगा है।  

हैरानी की बात यह है कि बर्ड फ्लू न सिर्फ घरेलू पोल्ट्री जैसे मुर्गियों, बत्तखों और टर्की को प्रभावित करता है, बल्कि जंगली और प्रवासी पक्षियों के जरिए भी फैल सकता है। कुछ मामलों में, मनुष्यों में संक्रमण का खतरा भी होता है। इसलिए इस बीमारी से बचाव के लिए इसके बारे में जानना बेहद जरूरी है। आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे बर्ड फ्लू से जुड़ी सभी जरूरी बातों के बारे में-  
बर्ड फ्लू क्या है?

क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा) एक प्रकार के इन्फ्लूएंजा (फ्लू) वायरस से होने वाला संक्रमण है, जो आमतौर पर पक्षियों और अन्य जानवरों में फैलता है। कभी-कभी, संक्रमित जानवरों से मनुष्यों को भी बर्ड फ्लू हो सकता है। आम फ्लू की तरह ही, बर्ड फ्लू भी आपको गंभीर रूप से बीमार कर सकता है।  

हालांकि, इसका एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलना बेहद दुर्लभ है। यह चिंता का विषय इसलिए बन चुका है, क्योंकि अमेरिका में साल 2024 से मनुष्यों में संक्रमण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

  

(Picture Credit- AI Generated)
बर्ड फ्लू के लक्षण

  • कंजंक्टिवाइटिस (आंखों का इन्फेक्शन)
  • बुखार
  • थकान
  • खांसी
  • मांसपेशियों में दर्द
  • गले में खराश
  • मतली और उल्टी
  • दस्त
  • नाक बंद होना या बहना
  • सांस लेने में तकलीफ (डिस्पनिया)

क्यों होता है बर्ड फ्लू?

बर्ड फ्लू इन्फ्लूएंजा-ए वायरस के एक प्रकार के कारण होता है, जो मनुष्यों में अक्सर H5N1 होता है। यह वायरस आपके अपर रेस्पिरेटरी सिस्टम और फेफड़ों को संक्रमित कर सकता है और कभी-कभी ब्रेन जैसे शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकता है।

  



कैसे करें बर्ड फ्लू से बचाव?

  • पक्षियों, जंगली जानवरों और पालतू जानवरों के साथ काम करते समय दस्ताने, मास्क और चश्मे जैसे सुरक्षात्मक कपड़े पहनें।
  • पक्षियों, जंगली जानवरों और पालतू जानवरों को छूते समय या उनके रहने वाली जगहों में जाने के बाद बार-बार हाथ धोएं।  
  • बीमार जानवरों या एवियन इन्फ्लूएंजा से संक्रमित जानवरों के साथ काम न करें।  
  • अगर आप ऐसी जगह में गए हैं, जहां पानी में रहने पक्षी या मुर्गियां रहती हैं, तो घर में घुसने से पहले अपने जूते उतार दें। इससे आपके घर में पक्षियों की बीट (या वायरस से दूषित कोई भी अन्य चीज) फैलने का खतरा कम हो जाता है।
  • बिना पाश्चुरीकृत दूध को न छुएं और न ही पिएं।
  • सीजनल फ्लू की वैक्सीन जरूर लगवाएं। यह आपको सीधे बर्ड फ्लू से तो नहीं बचाएगा, लेकिन गंभीर बीमारी और एवियन इन्फ्लूएंजा और मौसमी इन्फ्लूएंजा दोनों के एक साथ होने के खतरे को कम कर सकता है।


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Source:

Cleveland Clinic


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