धूल फांकता रेल कोच। (जागरण)
संवाद सूत्र, ठाकुरगंज (किशनगंज)। ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर रेल कोच रेस्टोरेंट खोलने की बहुप्रचारित योजना रेलवे के दावों को खोखला साबित करती नजर आ रही है।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे द्वारा अन्य स्रोतों से राजस्व जुटाने के उद्देश्य से शुरू की गई रेल कोच रेस्टोरेंट ऑन व्हील्स योजना ठाकुरगंज में कई माह बीत जाने के बावजूद अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है।
यात्रियों और आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन परिसर में रेल कोच रेस्टोरेंट खोलने की घोषणा की गई थी। इसके तहत जुलाई माह 2024 में टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई और अगस्त 2024 में इसके लिए एक रेल कोच भी ठाकुरगंज स्टेशन पहुंच गया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
उस समय रेलवे अधिकारियों ने यह भरोसा दिलाया था कि दुर्गापूजा 2024 तक ठाकुरगंज वासियों और रेल यात्रियों को इस अनूठी सुविधा का लाभ मिलने लगेगा। लेकिन हकीकत यह है कि चार महीने बाद भी वह कोच यूं ही स्टेशन परिसर में खड़ा धूल फांक रहा है और रेस्टोरेंट खोलने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है।
कटिहार मंडल के अन्य स्टेशनों पर सफल, ठाकुरगंज में अटका प्रयोग
जानकारी के मुताबिक पूरे पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे क्षेत्र में दर्जन भर से अधिक रेल कोच रेस्टोरेंट सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। कटिहार में आठ, अलीपुरद्वार में दो तथा रंगिया, लामडिंग और तिनसुकिया में एक-एक कोच रेस्टोरेंट पहले से ही यात्रियों और आम लोगों की सेवा कर रहे हैं। ऐसे में ठाकुरगंज जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन पर योजना का अटक जाना कई सवाल खड़े करता है।
सर्कुलेटिंग एरिया में खुलना था रेस्टोरेंट
योजना के तहत ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर रेल कोच रेस्टोरेंट खोला जाना था। रेलवे द्वारा निजी संचालक को एक अनुपयोगी खाली रेल कोच उपलब्ध कराया जाना तय हुआ था, जिसे संचालक अपनी क्षमता और सुविधानुसार रेस्टोरेंट में परिवर्तित करता।
इसमें यात्रियों के लिए भोजन, पैक्ड फूड तथा टेक-अवे की भी सुविधा होनी थी। इस योजना की एक बड़ी खासियत यह थी कि रेस्टोरेंट स्टेशन के पार्किंग क्षेत्र में स्थित होने के कारण ग्राहकों को प्लेटफॉर्म टिकट लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती। ट्रेन यात्रियों के साथ-साथ आम नागरिक भी इस अनोखे रेल कोच रेस्टोरेंट का आनंद ले सकते थे।
2007 से चली आ रही है अवधारणा
बताते चलें कि रेलवे बोर्ड ने देशभर में खराब और अनुपयोगी पड़े रेल कोचों का नवीनीकरण कर उन्हें भोजनालय के रूप में उपयोग में लाने का निर्णय वर्षों पहले लिया था। इस अवधारणा की शुरुआत वर्ष 2007 में मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा शान-ए-भोपाल एक्सप्रेस के एक कोच में की गई थी, जिसे यात्रियों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली।
वहीं, इस पूरे मामले में कटिहार रेल मंडल के डीसीएम ने बताया कि जिस व्यक्ति ने ठाकुरगंज के लिए रेल कोच रेस्टोरेंट का टेंडर लिया था, उसके द्वारा निर्धारित राशि जमा नहीं की गई। इसी कारण ठाकुरगंज में अब तक रेल कोच रेस्टोरेंट नहीं खुल सका है। |