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6G का बूस्टर डोज: नए साल पर नया NFP लागू, अब सुपर फास्ट चलेगा नेट

LHC0088 1 hour(s) ago views 1023
  

6जी से सुपर फास्ट चलेगा नेट (प्रतीकात्मक तस्वीर)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के अधिकांश हिस्से में 5जी लागू हो चुका है लेकिन कई क्षेत्रों से 5जी आधारित मोबाइल इंटरनेट सेवाओं की रफ्तार धीमी होने की शिकायतें आने लगी हैं। ऐसे में 30 दिसंबर, 2025 को दूरसंचार विभाग (डॉट) की तरफ से देश में राष्ट्रीय फ्रीक्वेंसी एलोकेशन प्लान (एनएपएपी) 2025 लागू किया है जिसके बारे में दावा है कि यह देश में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत बनाएगा और भविष्य की मोबाइल फोन आधारित प्रौद्योगिकी के लिए रास्ता आसान करेगा। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इस नई नीति में भारत सरकार ने पहली बार 6425-7125 मेगाह‌र्ट्ज बैंड को इंटरनेशनल मोबाइल टेलीकम्युनिकेशंस (आइएमटी) के लिए चिह्नित किया गया है। इसका मतलब यह हुआ कि भारत में मोबाइल फोन सेवा देने वाली कंपनियों को उक्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध होगा जो ना सिर्फ मौजूदा 5जी सेवाओं के लिए इस्तेमाल हो सकेगा बल्कि जल्दी ही आवंटित होने वाले 6जी आधारित सेवा देने में भी इस्तेमाल होगा।

  
हाई-स्पीड और हाई-कैपेसिटी

तकनीकी भाषा में इसे मिड-बैंड स्पेक्ट्रम कवरेज के तहत माना जाता है। इस पर हाई-स्पीड, हाई-कैपेसिटी और विश्वसनीय मोबाइल ब्रॉडबैंड सेवाओं को ना सिर्फ बहुत ही कम समय में पूरे देश में लागू किया जा सकता है बल्कि सरकारी सूत्रों का दावा है कि 5जी में इस्तेमाल होने वाले मौजूदा स्पेक्ट्रम के मुकाबले इसकी लागत भी कम होगी।

डॉट के फैसले के बाद इस स्पेक्ट्रम के लिए आवश्यक उपकरणों का निर्माण करने वाली वैश्विक कंपनियों के सामने यह स्पष्ट हो जाएगा कि भारत जैसे विशाल मोबाइल बाजार से ज्यादा मांग आने वाली है। सनद रहे कि भारत में मोबाइल डेटा की खपत तेजी से बढ़ती जा रही है। फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की पहुंच अभी भी कम है।

ऐसे में मोबाइल नेटवर्क ही देश के इंटरनेट ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा संभालते हैं। लिहाजा मोदी सरकार की डिजिटल इंडिया के लक्ष्यों को हासिल करने में भी उक्त फैसला का असह होगा। भारत में मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों के संगठन सीओएआइ ने दूरसंचार विभाग के इस प्रगतिशील तृष्टिकोण का स्वागत किया है।

सीओएआइ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जेनरल डॉ. एस पी कोचर का कहना है कि, “भारत में उच्च जनसंख्या घनत्व, मोबाइल डेटा खपत में तेज वृद्धि तथा अपेक्षाकृत कम फिक्स्ड ब्रॉडबैंड पहुंच को देखते हुए यहां पर्याप्त मिड-बैंड स्पेक्ट्रम की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है।

ऐसे में यह कदम बताता है कि दूरसंचार विभाग मिड-बैंड स्पेक्ट्रम के महत्व को समझ रहा है। इससे मोबाइल नेटवर्किंग की मशीनरी मैन्यूफैक्चरिंग करने वाली वैश्विक कंपनियों को भारत जैसे बाजार के लिए जरूरी उपकरण बनाने का इकोसिस्टम बनाने का संकेत जाएगा। हालांकि हम 5925-6425 मेगाह‌र्ट्ज बैंड को भी स्वीकार्य बनाये जाने की मांग करते हैं।

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