मेडिकल कॉलेज अमृतसर। (फाइल फोटो)
नितिन धीमान, अमृतसर। मेडिकल कालेज में अत्याधुनिक जेनेटिक्स और कैंसर डायग्नोस्टिक लैब की स्थापना की जा रही है, जो आनुवांशिक और दुर्लभ रोगों की जांच, पहचान और उपचार के क्षेत्र में मील पत्थर साबित होगी। इस लैब के माध्यम से डीएनए, जीन, क्रोमोसोम और शुक्राणुओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा, जिससे पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाली बीमारियों की सटीक जानकारी जुटाई जा सकेगी और समय रहते उपचार संभव हो पाएगा। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
जेनेटिक्स लैब में डीएनए सीक्वेंसिंग और जीन एनालिसिस की अत्याधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी। इसके जरिए किसी व्यक्ति के जीन में मौजूद दोष, म्यूटेशन या असामान्य बदलावों की पहचान की जा सकेगी। इससे यह पता लगाया जाएगा कि मरीज किन आनुवांशिक रोगों के प्रति संवेदनशील है।
लैब में कैंसर, मधुमेह, मस्कुलर डिस्ट्रफी, सिस्टिक फाइब्रोसिस, किडनी रोग, थायरायड, ब्लड डिसआर्डर और न्यूरोलाजिकल आनुवांशिक बीमारियों की जांच की सुविधा होगी। इन बीमारियों की शुरुआती अवस्था में पहचान होगी। लैब में नवविवाहित दंपतियों के लिए विशेष जेनेटिक स्क्रीनिंग की व्यवस्था होगी। इस जांच से यह जानकारी मिल सकेगी कि दंपती किसी आनुवांशिक रोग के कोरियर तो नहीं हैं। इससे भविष्य में होने वाले बच्चों को इन रोगों से बचाने की तरकीब बनाई जा सकेगी।
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मेडिकल कॉलेज अमृतसर। (फाइल फोटो)
गर्भ में पल रहे शिशु की समस्याओं को पहले लग जाएगा पता
गर्भ में पल रहे शिशु में किसी भी प्रकार की आनुवांशिक समस्या या जन्मजात विकृति का समय रहते पता लगाया जा सकेगा। प्री-नेटल जेनेटिक टेस्टिंग से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शिशु स्वस्थ है या उसे किसी विशेष चिकित्सा की आवश्यकता है। इससे गर्भावस्था के दौरान ही जरूरी उपचार या परामर्श दिया जा सकेगा। पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ रही बीमारियां किस प्रकार मनुष्य के शरीर में घर बनाती हैं, इसका अध्ययन एवं तकनीक उपयोग से इनकी जांच की जाएगी।
जेनेटिक्स लैब के साथ एक जेनेटिक काउंसलिंग यूनिट भी स्थापित की जाएगी। यहां विशेषज्ञ डाक्टर और काउंसलर मरीजों और उनके परिजनों को बीमारी, उसके कारण, भविष्य की संभावनाओं और उपचार विकल्पों के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। इससे मरीज मानसिक रूप से भी मजबूत हो सकेंगे।
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AI आधारित तकनीकों का उपयोग होगा
आधुनिक बायोटेक्नोलाजीऔर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इससे आनुवांशिक बीमारियों पर शोध को बढ़ावा मिलेगा और नई उपचार पद्धतियों के विकास में मदद मिलेगी।यहां मरीजों के सैंपल को सुरक्षित रखने के लिए बायो-बैंक की सुविधा होगी। इससे भविष्य में दोबारा जांच, शोध और तुलना संभव हो सकेगी।
यह लेब मेडिकल कॉलेज स्थित वीआरएल लैब में स्थापित की जा रही है इसी वर्ष लैब सुचारू रूप से कार्यवित हो जाएगी। वीआरएल लैब पेपर बारी प्रोफेसर केडी सिंह के अनुसार जेनेटिक्स लैब न केवल अमृतसर बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगी। इससे मरीजों को बड़े शहरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और स्थानीय स्तर पर ही विश्वस्तरीय जांच और उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
इससे पूर्व जेनेटिक टेस्ट करवाने के लिए मरीज के सेंपल दिल्ली जैसे बड़े शहरों में भेजे जाते से वहां से रिपोर्ट आने में काफी समय और आर्थिक साधन लगते थे।
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