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किश्तवाड़ में शहीद हुए सिपाही कपिल देव का 20वां बलिदान दिवस, गांव पंडोरी बैंसा ने गर्व से किया याद

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कपिल देव शर्मा को श्रद्धांजलि देते हुए पारिवारिक सदस्य।  



जागरण संवाददाता, पठानकोट। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ सेक्टर में पाक प्रशिक्षित आतंकियों से मुकाबला करते हुए वीरगति को प्राप्त करने वाले भारतीय सेना की 3 डोगरा रेजीमेंट के सिपाही कपिल देव शर्मा का 20वां बलिदान दिवस गांव पंडोरी बैंसा स्थित उनके नाम पर बने सरकारी मिडिल स्मार्ट स्कूल में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की संयुक्त अध्यक्षता स्कूल इंचार्ज मंजीत कुमार और रिटायर्ड एसएस मास्टर दर्शन कुमार ने की। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

समारोह में शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंद्र सिंह विक्की मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर शहीद की माता रामप्यारी, पिता जोध राज शर्मा, बहन कृष्णा देवी, अन्य पारिवारिक सदस्य और विभिन्न शहीद सैनिकों के परिजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि व अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा शहीद के चित्र के समक्ष ज्योति प्रज्वलित कर और पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।

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समारोह को संबोधित करते हुए कुंवर रविंद्र सिंह विक्की ने कहा कि 20 वर्ष पहले जब पूरा देश नए साल के जश्न में डूबा हुआ था, तब इस गांव का 24 वर्षीय सपूत कपिल देव शर्मा आतंकियों से लड़ते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दे गया। उन्होंने कहा कि कपिल ने अपने कर्तव्य निर्वहन से यह संदेश दिया कि एक सैनिक के लिए राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि होती है। कश्मीर की बर्फीली वादियों में उनके शौर्य की गूंज आज भी सुनाई देती है।
जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए

कुंवर विक्की ने भावुक होते हुए बताया कि कपिल अपनी मां से कहा करते थे कि जिंदगी लंबी नहीं, बल्कि बड़ी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कपिल ने अपने बलिदान से अपनी बात को सच कर दिखाया। उन्होंने बलिदानी सैनिकों को पूरे देश की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके परिजनों के सम्मान को समाज का कर्तव्य बताया।

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कार्यक्रम में बलिदानी लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह (अशोक चक्र) के पिता कैप्टन जोगिंदर सिंह ने कहा कि शहीद परिवारों को अपने बेटे के बलिदान को कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मबलिदान सबसे बड़ा दान है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा शहीद कपिल देव शर्मा के परिजनों सहित पांच अन्य बलिदानी परिवारों को सिरोपा और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही मेधावी विद्यार्थियों को स्टेशनरी प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, शिक्षक और पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।

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