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Kalsarp Dosh: इंसान को अर्श से फर्श पर ले आता है कुंडली में लगा यह दोष, इन उपायों से पाएं राहत

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राहु और केतु को कैसे प्रसन्न करें?



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को मायावी ग्रह कहा जाता है। राहु और केतु की कृपा बरसने से जातक को जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। जातक समय के साथ शीर्ष पर रहता है। वहीं, राहु और केतु की कुदृष्टि पड़ने पर जातक को जीवन में ढेर सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

व्यक्ति लाख चाहकर भी अपने जीवन में सफल नहीं हो पाता है। इसके साथ ही सभी प्रकार के कामों में भी असफलता मिलती है या देर होती है। ज्योतिषियों की मानें तो शुभ ग्रहों के साथ राहु या केतु की युति होने पर कुंडली में कई दोष लगते हैं। इनमें एक कालसर्प दोष है। कालसर्प दोष कई प्रकार के होते हैं। इनमें एक घातक कालसर्प दोष है।

इस दोष के लगने पर जातक शीर्ष से शून्य पर पहुंच जाता है। सेहत, कारोबार और अन्य परेशानियों से जातक को रूबरू होना पड़ता है। आइए, घातक कालसर्प के बारे में सबकुछ जानते हैं-
कब लगता है घातक कालसर्प दोष?

ज्योतिषियों की मानें तो कुंडली में मायावी ग्रह राहु और केतु के मध्य सभी शुभ और अशुभ ग्रह के रहने पर कालसर्प दोष लगता है। वहीं, जब राहु दसवें भाव और केतु चौथे भाव में रहते हैं और सभी शुभ एवं अशुभ ग्रह इन दोनों ग्रहों के एक सीध या मध्य में रहते हैं, तो कुंडली में घातक कालसर्प दोष लगता है। घातक कालसर्प दोष से पीड़ित जातक को वरिष्ठ ज्योतिष से सलाह लेना चाहिए।
घातक कालसर्प दोष के प्रभाव

घातक कालसर्प दोष से पीड़ित जातक को जीवन में नाना प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इनमें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानी शामिल हैं। इसके साथ ही अविवाहित जातकों की शादी में देर होती है। करियर और कारोबार में भी संघर्ष करना पड़ता है।
उपाय

  

भगवान शिव की पूजा करने से घातक कालसर्प दोष का प्रभाव कम होता है। हालांकि, प्रबल दोष लगने पर निवारण जरूरी है। इसके लिए घातक कालसर्प दोष का निवारण अवश्य कराएं। आप त्रयोदशी और अमावस्या के दिन घातक कालसर्प दोष का निवारण करा सकते हैं। रोजाना पूजा के समय गंगाजल में काले तिल मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें। साथ ही रोजाना दो बार हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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