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कोलकाता के हवाला कारोबारियों की मिलीभगत से पीएनबी कर्मी कर रहा था करोड़ों का फ्राड

LHC0088 2025-12-20 16:37:09 views 865
  

ED Action on PNB Scam: पुलिस की तफ्तीश के आधार पर ईडी की ओर से मनी लांड्रिंग मामले में तेज की गई कार्रवाई। प्रतीकात्मक फोटो  



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। PNB Fraud Case: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के ग्राहकों के खातों से एक करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी के मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस जांच के बाद मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच कर रही ईडी ने छह दिन पहले मुजफ्फरपुर में चार ठिकानों पर छापेमारी की थी, जहां से 83 लाख रुपये जब्त किए गए थे। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

हालांकि, इस पूरे फ्राड नेटवर्क से जुड़े कोलकाता के हवाला कारोबारियों पर अब तक सीधी कार्रवाई नहीं हो सकी है। पुलिस जांच में कई हवाला ऑपरेटरों के नाम सामने आए थे।

ईडी की टीम पूर्व में कई बार नगर थाना पहुंचकर केस के जांच अधिकारी और थानाध्यक्ष से अहम जानकारियां जुटा चुकी है। सूत्रों के अनुसार, हवाला कारोबारियों पर कार्रवाई के लिए विशेष टीम गठित की गई है और जल्द ही अगला कदम उठाया जा सकता है।

गौरतलब है कि यह मामला करीब चार वर्ष पहले सामने आया था। जून 2021 में बीएसएनएल के एक रिटायर्ड कर्मचारी के बैंक खाते से चार बार में 20 लाख और अगले दिन 2.40 लाख रुपये की निकासी कर ली गई थी।

कुल 22.40 लाख रुपये की अवैध निकासी के बाद पीड़ित ने नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जांच के दौरान पुलिस ने संगठित साइबर फ्राड गिरोह का पर्दाफाश किया।
ग्राहकों का डाटा निकालकर रचा गया हाईटेक खेल

जांच में खुलासा हुआ कि गोबरसही स्थित पीएनबी शाखा में तैनात कर्मी नीतेश कुमार सिंह ग्राहकों की गोपनीय जानकारी निकालकर गिरोह के सदस्यों को उपलब्ध कराता था। इसके बाद साइबर अपराधी हाईटेक तकनीक से पीड़ित के मोबाइल नेटवर्क को बाधित कर देते थे।

फिर बैंक में जमा कागजात की छायाप्रति के आधार पर पीड़ित के नाम से नया सिम कार्ड निकालकर नंबर पोर्ट कराया जाता था। इसके बाद बैंकिंग मोबाइल एप के जरिए खातों से रकम ट्रांसफर कर दी जाती थी, जो सीधे हवाला कारोबारियों के खातों में पहुंचती थी।

जांच के दौरान दामूचक की एक महिला प्रोफेसर समेत कई अन्य ग्राहकों के खातों से भी बड़ी राशि की अवैध निकासी का पता चला। पुलिस ने पीएनबी कर्मी नीतेश कुमार सहित छह आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
मोटी रकम वाले खातों को बनाया जाता था निशाना

पुलिस जांच के आधार पर ईडी ने इसे पीएमएलए (PMLA) के तहत अनुसूचित अपराध मानते हुए समानांतर जांच शुरू की। ईडी को जांच में यह भी पता चला कि गिरोह खासतौर पर उन खाताधारकों को निशाना बनाता था, जिनके बैंक खातों में बड़ी राशि जमा रहती थी।

जाली पहचान पत्रों के जरिए नकली सिम कार्ड हासिल कर उन्हें बैंक खातों से लिंक कराया जाता था, ताकि एसएमएस अलर्ट प्राप्त हो सके। इसके बाद ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से खातों से रकम निकाल ली जाती थी। ईडी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपितों की पहचान में जुटी है और आगे की कार्रवाई जारी है।
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