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सावधान! अगर शरीर के इस अंग पर पहनते हैं सोना, तो रूठ सकते हैं देवगुरु बृहस्पति; कंगाली का भी रहता है डर

Chikheang 2025-12-18 21:55:54 views 1246
  

Vedic Astrology: सोना पहनने के नुकसान? (AI-generated image)



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में सोना (Gold) केवल एक धातु या आभूषण नहीं है, बल्कि इसे साक्षात देवी लक्ष्मी का स्वरूप और देवगुरु बृहस्पति का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म (Hindu Religion) में सोने के प्रति अटूट श्रद्धा है, यही वजह है कि दीपावली हो या अक्षय तृतीया, हम सोना खरीदना अत्यंत शुभ मानते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि शरीर के हर अंग पर सोना पहनना शुभ नहीं होता? विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

ज्योतिष शास्त्र और वास्तु के अनुसार, शरीर के एक विशेष हिस्से पर सोना पहनना आपको भारी नुकसान पहुंचा सकता है। आइए जानते हैं क्या कहता है शास्त्र और इसके पीछे का क्या है तर्क।
पैरों में सोना पहनना है वर्जित

शास्त्रों के अनुसार, पैरों में कभी भी सोने की पायल या बिछिया नहीं पहननी चाहिए। अक्सर फैशन के चक्कर में कुछ लोग पैरों में सोने के आभूषण पहन लेते हैं, लेकिन धार्मिक दृष्टि से इसे बेहद अशुभ माना जाता है। पैरों पर हमेशा चांदी के ही आभूषण पहनने का विधान है।
क्यों नाराज होते हैं देवगुरु बृहस्पति?

वैदिक ज्योतिष में सोने का संबंध बृहस्पति (Guru) ग्रह से है। बृहस्पति को सुख, समृद्धि, ज्ञान और सौभाग्य का कारक माना जाता है।

धार्मिक कारण: सोना भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है। पैरों में सोना पहनने का अर्थ है- पवित्र धातु का अपमान करना। इससे मां लक्ष्मी और देवगुरु बृहस्पति नाराज हो जाते हैं, जिससे जीवन में आर्थिक तंगी आने लगती है।

वैज्ञानिक कारण: शरीर में ऊर्जा का प्रवाह होता है। पैरों में चांदी पहनने से शरीर की शीतलता बनी रहती है, जबकि सोना ऊष्मा (Heat) पैदा करता है। पैरों में सोना पहनने से शरीर के तापमान का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
हो सकते हैं ये गंभीर नुकसान

ज्योतिष शास्त्र की मानें तो पैरों में सोना पहनने से \“गुरु दोष\“ लगता है, जिसके कारण ये समस्याएं आ सकती हैं:

धन की हानि: संचित धन धीरे-धीरे खत्म होने लगता है और कर्ज की स्थिति बन सकती है।

दांपत्य जीवन में कलह: बृहस्पति वैवाहिक जीवन के भी कारक हैं। उनके नाराज होने से रिश्तों में कड़वाहट आ सकती है।

तरक्की में रुकावट: व्यापार या नौकरी में अड़चनें आने लगती हैं और बना-बनाया काम बिगड़ सकता है।
शास्त्रों की प्रामाणिकता (Source of Authenticity)

ज्योतिष शास्त्र (Vedic Astrology) और भविष्य पुराण के अनुसार, सोने की पवित्रता को बनाए रखना अनिवार्य है। शास्त्रों में उल्लेख है कि \“नाभि\“ के नीचे सोने के आभूषण धारण करने से ऊर्जा का अधोमुखी प्रवाह होता है, जो आध्यात्मिक और भौतिक उन्नति के लिए बाधक है। यही कारण है कि आयुर्वेद और ज्योतिष दोनों ही पैरों में चांदी की सलाह देते हैं, क्योंकि चांदी चंद्रमा से संबंधित है जो शीतलता और शांति प्रदान करती है।

यूं कह लें, सोना आपकी किस्मत चमका भी सकता है और गलत तरीके से पहनने पर उसे बिगाड़ भी सकता है। इसलिए, यदि आप भी पैरों में सोने की पायल पहन रहे हैं, तो उसे अभी उतार दें और देवगुरु बृहस्पति की कृपा पाने के लिए इसे केवल शरीर के ऊपरी हिस्सों (गले, कान या हाथों) में ही धारण करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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