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पश्चिम चंपारण में योजनाओं का लाभ देने में सुस्ती, KCC के 300 आवेदन लंबित

cy520520 2025-12-16 21:07:20 views 738
  

मछलीपालकों नहीं मिल रहा लाभ। फाइल फोटो  



जागरण संवाददाता, बेतिया। जिले में मत्स्यजीवियों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर पहुंचने की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। इसका सीधा असर जिले के सैकड़ों मत्स्यजीवियों की आजीविका पर पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, बीते एक माह से जिले में करीब 300 किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के आवेदन लंबित पड़े हैं, जबकि अब तक मात्र तीन केसीसी ही स्वीकृत हो सके हैं। इतनी कम स्वीकृति से मत्स्यजीवियों में नाराजगी और असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

मत्स्यजीवियों का कहना है कि केसीसी के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी राशि से वे नाव और जाल की मरम्मत, मछली पालन से जुड़े जरूरी संसाधनों की खरीद और दैनिक खर्च का प्रबंध करते हैं।

लेकिन, आवेदन लंबित रहने के कारण समय पर मरम्मत कार्य नहीं हो पा रहा है, जिससे मछली पकड़ने और उत्पादन दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कई मत्स्यजीवियों ने बताया कि जर्जर नाव और फटे जाल के सहारे काम करना जोखिम भरा हो गया है, जिससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
नाव-जाल मरम्मती पर 80 प्रतिशत अनुदान

राज्य सरकार द्वारा मत्स्यजीवियों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से नाव एवं जाल मरम्मती योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत 80 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है। इस योजना का लाभ मत्स्यजीवी सहयोग समितियों से जुड़े पंजीकृत सदस्यों को दिया जा रहा है।

योजना के अंतर्गत नाव मरम्मत के लिए अधिकतम 1.30 लाख रुपये तथा जाल मरम्मत के लिए 16 हजार रुपये तक की राशि सरकार वहन करती है।
योजना से लाभ लेने के लिए शर्तें

जिला मत्स्य पालन पदाधिकारी सीताराम ने बताया कि इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण, मत्स्यजीवी समिति की सदस्य सूची में नाम, संबंधित जलकर का पट्टा तथा मुखिया या समिति सचिव की अनुशंसा अनिवार्य है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सभी दस्तावेज पूर्ण होने पर अनुदान की राशि सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जाती है।
विभागीय प्रक्रियाओं में देरी को लेकर मत्स्यजीवियों ने उठाया सवाल

बैरिया के मत्स्यजीवी सहयोग समिति सदस्य सुरेंद्र चौधरी ने कहा कि आवश्यक दस्तावेज पूरे होने के बावजूद फाइलें महीनों तक दफ्तरों में अटकी रहती हैं। इससे न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि सरकारी योजनाओं के प्रति भरोसा भी कमजोर पड़ रहा है।

उनका कहना है कि यदि केसीसी और अन्य अनुदान योजनाओं का लाभ समय पर मिल जाए तो मत्स्य व्यवसाय को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। ऐसे में लंबित सभी केसीसी आवेदनों की त्वरित जांच कर शीघ्र स्वीकृति दी जाए। साथ ही आवेदन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की देरी न हो।
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