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अतिक्रमण हटाने के बाद नहीं मिली वैकल्पिक व्यवस्था, निजी जमीन पर सब्जी बाजार बसाने को मजबूर हुए विक्रेता

Chikheang 2025-12-16 20:37:38 views 692
  

सब्जी बाजार



संवादसूत्र भगवानपुर हाट (सिवान)।अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत प्रशासन की कार्रवाई ने भगवानपुर हाट बाजार के सौ से अधिक फुटपाथी दुकानदारों की रोजी-रोटी छीन ली, लेकिन उनके पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। वर्षों से बाजार में छोटे-छोटे व्यवसाय कर जीवन यापन कर रहे सब्जी, फल, मछली, चाय और फास्ट फूड विक्रेताओं पर जेसीबी चलाकर प्रशासन ने उनके ठिकाने उजाड़ दिए। इसके बाद दुकानदारों को न तो कोई वैकल्पिक स्थान दिया गया और न ही किसी तरह की सहायता की गई। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

अतिक्रमण हटने के बाद विस्थापित दुकानदार कई दिनों तक प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर टकटकी लगाए बैठे रहे। उन्हें उम्मीद थी कि जिला परिषद या सैरात की उस भूमि पर, जहां पहले हाट लगता था, प्रशासन उन्हें दोबारा दुकान लगाने की अनुमति देगा। लेकिन न प्रशासन ने पहल की और न ही जनप्रतिनिधियों ने उनकी पीड़ा समझने का प्रयास किया। नतीजतन, दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया।

थक-हारकर सब्जी और अन्य फुटपाथी विक्रेताओं ने बाजार के पीछे मुख्य मार्ग से दूर धमई नदी के किनारे लोगों की निजी जमीन पर अस्थायी रूप से बाजार बसा लिया। भू-स्वामियों की सहमति से शुरू हुआ यह नया बाजार अब सुबह से देर शाम तक ग्राहकों और दुकानदारों की भीड़ से गुलजार रहता है। जो भूमि पहले वीरान पड़ी रहती थी, वहां अब सब्जी, फल और रोजमर्रा की जरूरतों का कारोबार चल रहा है।

बाजार के पुराने और बुजुर्ग विक्रेता गफार मियां, देव कुमार, सुनील प्रसाद और बलिठ प्रसाद ने बताया कि प्रशासन की उदासीनता ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन उजाड़ना तो जानता है, लेकिन बसाने की जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा है। निजी जमीन पर बाजार बसाने से अस्थायी राहत तो मिली है, लेकिन यह सुरक्षित समाधान नहीं है। जमीन काफी गहरी है और थोड़ी सी बारिश होने पर यहां पानी भरने की आशंका रहती है, जिससे बाजार लगाना मुश्किल हो सकता है।

इस पूरे मामले पर अंचलाधिकारी धीरज कुमार पांडेय ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सिर्फ भगवानपुर हाट में नहीं, बल्कि पूरे राज्य में चल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला परिषद या सैरात की भूमि पर अंचल का कोई अधिकार नहीं है, इसलिए वहां दुकानदारों को बसाने का निर्णय उच्च स्तर पर लिया जाना है।

फिलहाल, विस्थापित दुकानदार निजी जमीन पर ही अपना व्यवसाय चला रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान के अभाव में उनका भविष्य असुरक्षित बना हुआ है। दुकानदारों ने प्रशासन से मांग की है कि उनके लिए जल्द से जल्द सुरक्षित और स्थायी बाजार की व्यवस्था की जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपना जीवन यापन कर सकें।
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