LHC0088 • 2025-12-14 22:37:25 • views 745
भाजपा के नव नियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन। (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, धनबाद। Nitin Navin: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा बदलाव करते हुए बिहार सरकार के मंत्री नितिन नवीन को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। नितिन नवीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर धनबाद सहित झारखंड के भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
यह नियुक्ति भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा नितिन नवीन की संगठनात्मक क्षमता, सक्रिय नेतृत्व और बढ़ते राजनीतिक कद पर जताए गए भरोसे का संकेत मानी जा रही है। वर्तमान में वे बिहार सरकार में पथ निर्माण मंत्री के रूप में कार्यरत हैं और अब राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
झरिया की विधायक रागिनी सिंह ने इस नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा कि नितिन नवीन के कार्यकारी अध्यक्ष बनने से भाजपा के युवा नेताओं और कार्यकर्ताओं में सकारात्मक संदेश गया है। उनके नेतृत्व में देश का युवा वर्ग तेजी से भाजपा से जुड़ेगा।
वहीं झारखंड भाजपा के मंत्री गणेश मिश्रा ने भी उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि नितिन नवीन जनता के बीच रहने वाले नेता हैं और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की क्षमता रखते हैं। उनके कार्यकारी अध्यक्ष बनने से भाजपा संगठन को नई ताकत मिलेगी।
नितिन नवीन का राजनीतिक सफर भी उल्लेखनीय रहा है। उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा भाजपा के सशक्त नेताओं में गिने जाते थे। उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में जनता ने परिवार पर भरोसा जताते हुए नितिन नवीन को मौका दिया। यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत हुई। इसके बाद वे बांकीपुर विधानसभा सीट से लगातार चार बार जीत दर्ज कर चुके हैं। पथ निर्माण मंत्री के रूप में उन्होंने एक युवा, ऊर्जावान और कामकाजी नेता की छवि बनाई है।
झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 के दौरान वे चंदनकियारी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के प्रभारी भी रहे। इस दौरान उन्होंने धनबाद और बोकारो के भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।
धनबाद जिला भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष संजय झा ने भी इस नियुक्ति पर खुशी जताते हुए कहा कि यह सभी भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए गर्व का विषय है। नितिन नवीन के कार्यकारी अध्यक्ष बनने का प्रभाव झारखंड में भी देखने को मिलेगा। बिहार और झारखंड पड़ोसी राज्य हैं, ऐसे में उनका राष्ट्रीय पद पर पहुंचना दोनों राज्यों के कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायक है। |
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