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Reality Check: धन और बल के साथ प्रशासनिक संरक्षण से फल-फूल रहा बार-क्लब का धंधा, नियमों को दिखा रहे ठेंगा

deltin33 2025-12-11 03:38:02 views 1178
  

पहाड़गंज मेन बाजार में रेस्तरां में आने जाने के लिए के लिए संकरी सीढ़ियां। जागरण



नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। गोवा में  नाइट क्लब अग्निकांड में 25 लोगों की मौत के मामले में आरोपित \“रोमियो लेन\“ के मालिक सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा फरार हैं तो एक बिजनेस पार्टनर अजय गुप्ता को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। साथ ही, उस नाइट क्लब के संचालन में कई और पार्टनरों के नाम भी सामने आ रहे हैं। लूथरा बंधुओं के थाईलैंड फरार होने तथा एक क्लब के संचालन में इतने लोगों के नाम आम लोगों को भले ही चौंकाए, लेकिन इस दुनिया को अंदर से जानने वाले लोगों के लिए आम बात है। क्योंकि, इसके पीछे धन, बल के साथ प्रशासनिक संरक्षण का ऐसा गठजोड़ है, जो सारे नियम, कायदे को धत्ता बताते हुए परवान चढ़ रहा है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
वर्ष 2,000 के बाद संख्या बढ़ती जा रही

जानकार बताते हैं कि धन की जरूरत बार व क्लब शुरू करने के लिए होती है। लेकिन संचालन के लिए बल चाहिए। तभी इन बार व क्लब में बाउंसरों की तैनाती होती है। नियमों के उल्लंघन में फंसने से बचने के लिए प्रशासनिक संरक्षण भी जरूरी है। क्योंकि नियमों का पूरी तरह से पालन यहां होना मुश्किल है।

दिल्ली में कनाॅट प्लेस, खान मार्केट, हौज खास, साकेत, मालवीय नगर, वसंत कुंज, नेहरू प्लेस के साथ ही गुरुग्राम, नोएडा में हजारों की संख्या में क्लबों में रातें जवान होती है। वर्ष 2,000 के बाद से उनकी संख्या बढ़ती जा रही है। दिल्ली में ही इनकी संख्या तीन हजार से अधिक पहुंच गई है।
क्षेत्र में नए-नए लोग आ रहे

जैसे-जैसे उसकी संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे, इस क्षेत्र में नए-नए लोग आ रहे हैं, जिनमें से कईयों ने अब इस क्षेत्र का दिग्गज बनते हुए दिल्ली व विभिन्न राज्यों के साथ विदेश तक में कारोबार विस्तार दी है। वह ऐसे चेहरे हैं, जिनके पीछे पैसा लगाने वाले धनाढ्य परिवार के लोगों के साथ ही सरकारी अधिकारी-पुलिस व नेता, बिल्डर व बदमाश जैसे लोग शामिल हैं। जो चेहरे सामने दिखते हैं, उनका तो 10 प्रतिशत भी नहीं लगा होता। जानकार बताते हैं कि इस पूरे खेल में काला धन को सफेद भी किया जा रहा है।
नशे का भी किया जाता है कारोबार

जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों व पुलिस की सांठ-गांठ में आग जैसे आपदा की स्थिति के लिए तय अनिवार्य मानक हवा में उड़ा दिए जा रहे हैं। साथ ही क्लब, बार को रात्रि में बंद करने के नियम, ग्राहकों की संख्या, शराब की गुणवत्ता, उत्पादों के मूल्य, सुरक्षा व सुविधा के साथ समझौता होता है। यहीं नहीं, कुछ बार, पब व क्लबों में प्रतिबंधित नशे के उत्पादों को भी परोसा जाता है।
गलाकाट प्रतिस्पर्धा ने बढ़ाईं मुश्किलें

मामले के जानकार कहते हैं कि दिल्ली में ही चल रहे बहुतयात बार, पब व क्लब बिना मानकों को पूरा किए वर्षों से चल रहे हैं। कनाट प्लेस, पहाड़गंज, हौजखास, ग्रीन पार्क जैसे कई इलाकों में चल रहे बार, क्लब में एक ही प्रवेश व निकासी का रास्ता है। अधिकतर में एक ही संकरी सीढ़ियां है। आपदा निकासी का कोई रास्ता नहीं है।

बचाव के यंत्रों के प्रबंधन के साथ कर्मचारियों का प्रशिक्षण नहीं है। इसके साथ अन्य नियमों को भी हवा में उड़ा दिया जाता है। कनाॅट प्लेस के एक बार संचालक कहते हैं कि मिलीभगत से चलने लगे इस धंधे में अब ईमानदारी से काम करना और प्रतिस्पर्धा में टिके रहना काफी मुश्किल हो गया है।
दिल्ली के सभी बार, क्लब व पब की हो ऑडिट: राजेंद्र कपूर

दिल्ली व्यापार महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र कपूर गोवा नाइट क्लब हादसे पर गहरा दुख प्रकट करते हुए कहते हैं कि दिल्ली में अग्निशमन मानकों की ही नहीं बल्कि अन्य मानकों का खुला माखौल उड़ाया जा रहा है। नकली शराब की आपूर्ति, प्रतिबंधित नशे की लत युवाओं में लगाने, बाउंसरों से पिटवाने, भोर तक बार खोलकर माहौल खराब करने जैसे न जाने कितने गलत कार्य हो रहे हैं, जिसपर रोकथाम नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मांग करते हुए कहा कि ऐसे में वह दिल्ली के सभी बार, रेस्तरां, पब व क्लब की ऑडिट का आदेश दें।

यह भी पढ़ें- गोवा अग्निकांड : नाइटक्लब के एक मालिक की अस्पताल से हुई गिरफ्तारी, लूथरा ब्रदर्स की अब भी तलाश जारी
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