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BJP के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के बाद MP में होगा मंत्रिमंडल विस्तार, मंत्रियों के प्रदर्शन पर टिकी निगाहें

LHC0088 2025-12-10 02:06:19 views 340
  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में मोहन सरकार के दो साल पूरे होने को हैं और इसी के साथ मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक तापमान भी तेजी से बढ़ रहा है। महीनों से चली आ रही अटकलों के बीच अब साफ संकेत मिल रहे हैं कि कैबिनेट विस्तार तभी होगा, जब भाजपा को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल जाएगा। जेपी नड्डा का कार्यकाल 20 जनवरी, 2026 को समाप्त हो रहा है, इसलिए माना जा रहा है कि इसी समय के आसपास पार्टी नया अध्यक्ष घोषित करेगी—और उसके तुरंत बाद एमपी में बड़ा राजनीतिक फेरबदल दिख सकता है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय कैबिनेट का विस्तार होने के बाद से ही अनुमान लगाए जा रहे थे कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी अपनी टीम में बदलाव करने की तैयारी में हैं। दो साल के कार्यकाल से पहले ही वे विभागवार समीक्षा बैठकें कर चुके हैं और मंत्रियों का परफॉर्मेंस कार्ड भी लगभग तैयार है। यही रिपोर्ट आगे तय करेगी कि कौन मंत्री कुर्सी बचाएगा और किसे बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व ने भी मंत्रियों के प्रदर्शन की स्वतंत्र एजेंसियों से रिपोर्ट तैयार करवाई है। चर्चा है कि केंद्र एमपी के कई मंत्रियों के कामकाज से खासा नाराज है। सूत्र दावा करते हैं कि तीन-चार को छोड़ दें, बाकी मंत्रियों के विभाग में काम का ग्राफ बेहद कमजोर है।
कैबिनेट में 4 सीटें खाली, 6 नए चेहरे संभव

मोहन कैबिनेट में इस समय चार पद रिक्त हैं। कुल 35 मंत्रियों की क्षमता में अभी 31 ही हैं। लेकिन विस्तार सिर्फ नई नियुक्तियों तक सीमित नहीं रहेगा—कम से कम चार मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है। ऐसे में 6 नए चेहरे कैबिनेट में शामिल होने के लिए तैयार माने जा रहे हैं।
निगम-मंडलों में नियुक्तियों का दबाव चरम पर

राज्य के 40 से ज्यादा निगम-मंडलों और बोर्डों में डेढ़ साल से नियुक्तियां अटकी हुई हैं। कारण वही—पार्टी के अंदरुनी खींचतान और अलग-अलग गुटों की दबदबे की होड़। बिहार चुनाव और संगठनात्मक व्यस्तताओं ने देरी बढ़ाई। राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल ने कई दौर की बैठकों के बाद भी समाधान नहीं निकाल पाए।

अब सरकार के पास चुनाव से पहले केवल ढाई–तीन साल का वक्त बचा है, ऐसे में निगम-मंडल नियुक्तियों को लेकर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
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