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कारतूस हेराफेरी कांड : भोपाल के रसूखदार कथित ‘शूटर’ बेनकाब, थाने में प्रकरण दर्ज

deltin33 2025-12-8 19:40:21 views 1241
  

कारतूसों की हेराफेरी (प्रतीकात्मक चित्र)



डिजिटल डेस्क, भोपाल। निशानेबाजी के नाम पर लाखों कारतूसों की हेराफेरी के बड़े खेल में भोपाल के कई रसूखदार चेहरे बेनकाब हो रहे हैं। कारतूस व शस्त्र लाइसेंस की अनियमितता की जांच कर रही कलेक्टर-स्तरीय समिति ने जिन 30 शूटरों के लाइसेंस अगस्त में निलंबित किए थे, उनमें से तीन ने अपने आपराधिक रिकॉर्ड छिपाए थे। अब इन तीनों के विरुद्ध शहर के अलग-अलग थानों में प्रकरण दर्ज किए गए हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
बगैर सत्यापन होता रहा काम

समिति की जांच में सामने आया कि आपराधिक मामले दर्ज होने के बावजूद आरोपितों को नए शस्त्र लाइसेंस जारी होते रहे और पुराने लाइसेंसों का नवीनीकरण भी बिना किसी सत्यापन के चलता रहा। जांच के दायरे में आए ये तीनों आरोपित संभ्रांत परिवारों से आते हैं और पेशे से बिल्डर व व्यापारी हैं। ‘बेजा कारतूस’ हासिल करने की चाह में इन्होंने \“शूटर\“ बनने की आड़ ली थी।
3 लाख कारतूस गायब, 77 शूटरों से हिसाब मांगा गया था

भोपाल प्रशासन ने इस वर्ष शूटिंग रेंज में पंजीकृत 77 शूटरों से पिछले पाँच वर्षों में लिए गए कारतूसों का ब्योरा मांगा था। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर जांच शुरू हुई तो रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ियां सामने आईं। शुरुआती जांच में करीब तीन लाख कारतूस गायब पाए गए।

इसके बाद कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की अगुआई में बनाई गई तीन सदस्यीय समिति ने पिछले दस साल में जारी कारतूसों और हथियारों का पूरा ऑडिट किया और अगस्त में 30 शूटरों के लाइसेंस निलंबित कर दिए।
आरोपी कौन?

निलंबित लाइसेंस वाले इन 30 शूटरों में से तीन—

  • हसीब खान (गिन्नौरी, तलैया) - शादी हाल व मैरिज गार्डन संचालक
  • फैजान खान (काजीकैम्प, हनुमानगंज) - व्यापारी
  • साहिब-उर-रहमान (हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, कोहेफिजा) - बिल्डर


इनके खिलाफ अलग-अलग थानों में आपराधिक मामले दर्ज हैं, लेकिन इन्होंने नए लाइसेंस बनवाते समय और नवीनीकरण के दौरान यह तथ्य प्रशासन से छुपाया। अगस्त में समिति द्वारा दोबारा की गई पूछताछ में भी इन्होंने अपने केस की जानकारी नहीं दी।
लाइसेंस सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

समिति की रिपोर्ट ने शस्त्र लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में पुलिस और प्रशासन दोनों स्तर पर गंभीर लापरवाहियों का खुलासा किया है।

  • कई लाइसेंस बिना पुलिस वेरिफिकेशन जारी हुए।
  • चरित्र सत्यापन रिपोर्ट या तो अधूरी थी या गलत तरीके से तैयार की गई।
  • कई मामलों में आवेदकों के आपराधिक रिकॉर्ड होते हुए भी फाइलों में उन्हें \“क्लीनचिट\“ दिखाया गया।


जांच टीम ने पाया कि थानों से भेजी गई कई रिपोर्टें मनमाने ढंग से तैयार की गई थीं, जिससे पूरा लाइसेंस सिस्टम सवालों के घेरे में आ गया है।
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