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पहले उड़ाने रद और अब लगेज के लिए लाइन, IndiGo के यात्रियों को पांच दिन बाद भी नहीं मिला सामान

deltin33 2025-12-8 10:37:55 views 595
  

पांच दिन बाद भी अपने सामान के लिए परेशान IndiGo यात्री। (फोटो- पीटीआई)



जागरण टीम, नई दिल्ली। इंडिगो संकट के कारण यात्रियों की परेशानी कम नहीं हो रही। सबसे बड़ी समस्या सामान (लगेज) नहीं मिलने की है। कई यात्री ऐसे हैं, जो पांच दिन बीत जाने के बाद भी अपने सामान का इंतजार कर रहे हैं। कुछ लोग घर पहुंच गए हैं, लेकिन सामान नहीं पहुंचा है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

गुजरात के सूरत निवासी किरण और विभा गांधी तीन दिसंबर को वाराणसी से खजुराहो होते हुए आइजीआइ एयरपोर्ट पहुंचे थे। यहां से उनकी उड़ान उसी दिन सूरत के लिए थी, लेकिन उड़ान रद हो गई। इसके बाद पांच दिसंबर के लिए रिशेड्यूल किया गया। जब वे पांच दिसंबर को एयरपोर्ट पहुंचे, तो पता चला कि इंडिगो के यात्रियों को टर्मिनल के भीतर प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।

कस्टमर केयर से कई बार संपर्क करने के बाद उन्हें आश्वासन दिया गया कि उनका सामान घर पर पहुंचा दिया जाएगा, लेकिन उड़ान कब मिलेगी, इसका कोई उत्तर नहीं मिला। किरण और विभा सूरत से तीर्थाटन के लिए निकले यात्रियों के उस जत्थे में शामिल हैं, जिसमें करीब 15 लोग और हैं। इनमें से किसी को भी अभी तक सामान नहीं मिला है।

किरण ने सामान्य से तीन गुना अधिक किराया देकर अहमदाबाद के लिए बस का टिकट लिया। लेकिन, यहां भी लेटलतीफी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। तय समय से तीन घंटे बाद बस आई। किसी तरह अहमदाबाद पहुंचने के बाद उन्होंने सूरत के लिए टैक्सी बुक की थी, लेकिन वह तय समय पर निकल गई। इस प्रकार उन्हें और भी नुकसान हुआ।

अंतत: वे रविवार सुबह साढ़े नौ बजे सूरत पहुंचे, लेकिन लगेज का कोई अता-पता नहीं था। उन्हें केवल लगेज की तस्वीर वाट्सएप पर भेजी गई, जिसमें कुछ सामान गायब थे। किरण की पत्नी विभा ने बताया कि लगेज में उनकी जरूरी दवाइयां और काशी विश्वनाथ मंदिर का प्रसाद था, जो उन्होंने स्वजन के लिए खरीदा था।
टर्मिनल के भीतर भी टूटा भरोसा

इंडिगो के प्रति भरोसा इस कदर टूट गया है कि यात्री चेकइन आखिरी समय में करा रहे हैं। उन्हें लगता है कि यदि चेकइन करा लिया तो उड़ान रद हो गई तो लगेज फंस जाएगा। अकेले सफर कर रहे यात्रियों की कोशिश रहती है कि वे इतना कम लगेज अपने साथ लेकर चलें कि लगेज ओवरहेड केबिन में जमा करना पड़े।
रांची से इंदौर की यात्रा चार दिनों में हो रही पूरी

उमेश को चार दिसंबर को रांची से दिल्ली होते हुए इंदौर जाना था। लेकिन रांची एयरपोर्ट पर ही बार-बार उड़ान को विलंबित किया गया। आखिर उड़ान रद हो गई और उन्हें दो विकल्प दिए गए। इसके बाद छह दिसंबर का टिकट मिला। रांची से कोलकाता और कोलकाता से इंदौर। छह तारीख को एक बार फिर उड़ान रद हो गई। सात तारीख को एक बार फिर कोशिश हुई और उन्हें कोलकाता से दिल्ली और फिर दिल्ली से भोपाल का टिकट मिला। भोपाल के आगे उन्हें बस की यात्रा करनी होगी। परेशान उमेश बताते हैं कि रांची से इंदौर की यह यात्रा उन्हें जीवनपर्यंत याद रहेगी।
मलेशियाई यात्री का चौथे दिन भी नहीं मिला लगेज

मलेशिया से आए सुंदरम नाथन को रविवार को चौथे दिन भी वाराणसी में लगेज नहीं मिला। वह गुरुवार शाम पांच बजे अहमदाबाद से वाराणसी पहुंचे थे। विमान में उनका एक बैग ही आया। एक दूसरा बैग जिसमें दवाएं आदि थीं, वह नहीं मिला। इसकी शिकायत भी की, लेकिन एयरलाइन के अधिकारियों ने बताया कि वह अहदमबाद में छूट गया है। उन्हें मंगलवार को वापस मलेशिया जाना है। अधिकारियों ने कहा है कि सोमवार को भी बैग नहीं आता तो उनका बैग मलेशिया में बताए पते पर भेजा जाएगा।
रिफंड के लिए भी घंटों लाइन में लगना पड़ रहा

अमृतसर स्थित श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सुबह से उड़ान का इंतजार कर रहे यात्रियों को दोपहर 12 बजे 13 उड़ानें रद होने की जानकारी दी गई, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। रिफंड लेने के लिए भी घंटों लाइनों में लगे रहने को मजबूर होना पड़ा।

श्रीनगर से आए साजन ने कहा कि उन्हें वीजा इंटरव्यू के लिए दिल्ली पहुंचना था लेकिन फ्लाइट रद होने से वह नहीं पहुंच पाए। अमृतसर से बेंगलुरु जाने के लिए पहुंचे साहिल को रिश्तेदार की शादी में शामिल होने जाना था लेकिन फ्लाइट रद कर दी गई। बुजुर्ग प्रेम शर्मा ने बताया कि बेंगलुरु जाने के लिए वह सुबह दस बजे से एयरपोर्ट पहुंच गए थे, लेकिन दो घंटे तक तो यह नहीं बताया गया कि फ्लाइट की क्या स्थिति है। अब कह रहे हैं कि फ्लाइट रद हो गई है।
कोलकाता में यात्री परेशान

कोलकाता स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे एक यात्री ने कहा कि रविवार को मुंबई जाना था, लेकिन तीन बार समय बदलने के बाद उड़ान रद कर दी गई। अगली उपलब्ध टिकट की कीमत तीन गुना अधिक थी।
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