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बाघ अंगों की तस्करी का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क चला रही थी शातिर तस्कर यांगचेन, कोड वाली डायरी खोलेगी राज

Chikheang 2025-12-7 23:39:10 views 1250
  



डिजिटल डेस्क, भोपाल। भारत-चीन सीमा के पास सिक्किम से गिरफ्तार की गई यांगचेन लाचुंगपा और उसका साथी जय तमांग मिलकर बाघ अंगों की तस्करी का अंतरराष्ट्रीय गिरोह चला रहे थे। मूल रूप से चीन सीमा से सटे सिक्किम के गंगटोक के पास लाचुंग गांव की मूल निवासी 43 वर्षीय यांगचेन के पास से बरामद की गई डायरी शिकार से जुड़े लोगों के राज खोलेगी। इसमें सांकेतिक (कोड) भाषा में वित्तीय लेनदेन, अंतरराष्ट्रीय संपर्क और तस्करी गिरोह के पूरे नेटवर्क की महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज है। इंटरपोल की वांछित यांगचेन 10 साल से फरार चल रही थी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) और वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूएलसीसीबी) की संयुक्त टीम द्वारा गत दो दिसंबर को माइनस सात डिग्री तापमान की बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थिति में चीन की सीमा के पास से गिरफ्तार किया है। ट्रांजिट रिमांड पर भोपाल लाकर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बाघों एवं पैंगोलिन के शिकार के मामले में उससे पूछताछ की जा रही है।

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स्थानीय स्तर पर भी यांगचेन का पूरा गिरोह काम कर रहा था। यांगचेन को सबसे पहले सितंबर, 2017 में गिरफ्तार किया गया था लेकिन जमानत मिलने के बाद वह फिर फरार हो गई थी। उसकी गिरफ्तारी के बाद अब जय तमांग की तलाश है। उसे भी वर्ष 2015 में शिकार के मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन रिहा होने के बाद वह विदेश भाग गया।

बताया गया है कि यांगचेन लाचुंगपा, जय तमांग की पहली पत्नी है। तमांग के सालों पहले के कबूलनामे से पहली बार यांगचेन को स्मगलिंग चेन के अहम आर्किटेक्ट के तौर पर सामने लाया गया था।
यांगचेन के गिरोह के 27 ठहराए जा चुके हैं दोषी

अवैध शिकार मामले में वर्ष 2022 में मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम कोर्ट ने 31 गिरफ्तार आरोपितों में से 27 को दोषी ठहराया था। हालांकि यांगचेन के फरार होने के बाद से उस पर निर्णय लंबित है। यांगचेन बाघ तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

उसकी पहचान एक आर्गनाइज्ड ट्रैफिकिंग नेटवर्क की मुख्य सदस्य के तौर पर हुई, जिसकी कड़ियां शिकारियों और बिचौलियों से लेकर नेपाल, तिब्बत और भूटान तक फैले वन्य जीवों के अंगों के गैरकानूनी व्यापार से जुड़ी हुई थीं। यह गिरोह दिल्ली, सिलीगुड़ी, गंगटोक, कोलकाता, कानपुर, इटारसी और होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम) सहित कई भारतीय शहरों में काम कर रहा था।
बाघ एवं पैंगोलिन के शिकार और अंगों की तस्करी की आरोपी

जुलाई, 2015 में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के कामटी रेंज में बाघ एवं पैंगोलिन के शिकार और बाघ की हड्डियों व पैंगोलिन की खाल की नेपाल के रास्ते चीन में तस्करी करने वाले गिरोह के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया था। इसमें यांगचेन वांछित थी।

इससे पहले वर्ष 2013 में नेपाल पुलिस ने तिब्बत जाते समय बाघ की पांच खालें और हड्डियों की सात बोरियां पकड़ीं, बाद में डीएनए जांच में एक खाल मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व की बाघिन टी-13 की होने की पुष्टि हुई। वर्ष 2015 में फिर अधिकारियों ने बाघ की आठ खालें जब्त कीं, जिनके बारे में माना जाता है कि यह भी मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्वों से आई थीं।
कड़ाके की ठंड और अंधेरे में कठिन चुनौती थी गिरफ्तारी

एसटीएसएफ और डब्ल्यूएलसीसीबी की टीम बर्फीले क्षेत्र में यांगचेन की तलाश कर रहे थे। इस दौरान जैसे ही रेडियो संदेश बंद हो गए और कड़ाके की ठंड व अंधेरे में टार्च की रोशनी धीमी हो गई, इस बीच यांगचेन की घेराबंदी कर पकड़ लिया गया। इससे पहले गांववालों ने बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता बंद कर दिया था। यांगचेन ने कथित तौर पर गिरफ्तारी पूरी होने से पहले दो सेलफोन और एक कोडेड डायरी को नष्ट करने की कोशिश की, जिसमें नाम, रूट और हवाला रेफरेंस थे।
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