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SBI के डिप्टी मैनेजर ने कैसे उड़ाए 25 बड़े निर्यातकों के विदेशी मुद्रा खाते से लाखों रुपये?

LHC0088 2025-12-7 04:37:20 views 600
  

मुरादाबाद एसबीआर ब्रांच



जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। स्टेट बैंक आफ इंडिया की वाणिज्यिक शाखा में 55 लाख रुपये के घपले का मामला सामने आने के बाद निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। यह शाखा क्षेत्र के करीब 25 बड़े निर्यातकों के खातों को संभालती है, जिनमें अधिकांश खातों में 100 करोड़ और इससे अधिक रुपयों का लेन-देन होता है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

निर्यातकों के खातों में विदेशी भुगतान खासतौर पर डालर में आने वाली रकम इसी शाखा के माध्यम से समायोजित होती है। ऐसे में डिप्टी मैनेजर सौरभ राठौर द्वारा किए गए घपले ने बैंकिंग सुरक्षा और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़ा कर दिया है। शाखा के डिप्टी मैनेजर ने आंतरिक सिस्टम का दुरुपयोग कर छह खातों से 55 लाख रुपये भेज दिए।

मामला सामने तब आया जब बैंक कर्मचारी को एंट्री में गड़बड़ी नजर आई। विदेशी भुगतान के समायोजन के दौरान रुपयों में अंतर मिला। जांच करने पर पता चला कि रिकार्ड और स्विफ्ट संदेश (एमटी-103) में अंतर मिला। इसी आधार पर शाखा प्रबंधन ने आंतरिक जांच शुरू की, जिसमें डिप्टी मैनेजर की भूमिका संदिग्ध मिलने पर 2024 में ही निलंबन कर दिया।

जांच पूरी होने के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई। बैंक अधिकारियों के अनुसार, वाणिज्यिक शाखाएं विशेष तौर पर निर्यातकों-आयातकों के विदेशी मुद्रा खातों को संभालती हैं। विदेश से आने वाले डालर पहले बैंक के नोस्ट्रो खाते में पहुंचते हैं, फिर स्विफ्ट संदेश के आधार पर संबंधित उपभोक्ता के खाते में समायोजन किया जाता है।

आरबीआइ नियमों के अनुसार, इस प्रक्रिया में दोस्तरीय जांच (डुअल आथराइजेशन) अनिवार्य है। एक अधिकारी एंट्री करता है और दूसरा अनुमोदन। इसके बावजूद घपला कैसे हुआ, यह जांच का विषय है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में यह देखा जा रहा है कि विदेशी मुद्रा समायोजन में कोई गलत रेट लगाया गया या आंतरिक खाते (सस्पेंस-एडजस्टमेंट अकाउंट) के माध्यम से राशि हटाई गई।

कई बार घपले ऐसे मामलों में भी होते हैं जहां विदेशी भुगतान को ग्राहक के खाते में कम दिखाकर शेष राशि को किसी अन्य खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है। शाखा के आडिट ट्रेल, लागिन हिस्ट्री और आरटीजीएस-नेफ्ट अनुमोदन रिकार्ड खंगाला जा रहा है। बैंक अधिकारियों के अनुसार, डिप्टी मैनेजर ने कुछ लेन-देन में अनाधिकृत आंतरिक ट्रांसफर किए, जो पहले तो नजर नहीं आए, लेकिन निर्यातकों की उच्च-मूल्य वाली विदेशी मुद्रा प्रविष्टियों में असामान्य अंतर मिलते ही पूरे मामले की जानकारी हो पाई।

बैंक ने आरोपित अधिकारी को त्वरित प्रभाव से निलंबित कर दिया। विस्तृत फारेंसिक आडिट शुरू कर दिया है। एसबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, ग्राहकों की राशि सुरक्षित है और सभी प्रभावित खातों का बैलेंस पुनः मिलान किया जा रहा है। आरबीआइ दिशा निर्देशों के तहत ऐसे मामलों में बैंक को ग्राहक को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करनी होती है।

शाखा वर्तमान में क्षेत्र की निर्यात इकाइयों के लिए मुख्य बैंकिंग केंद्र है। यहां रोजाना करोड़ों रुपये का विदेशी और घरेलू लेनदेन होता है। इस मामले के सामने आते ही बैंक सतर्क हो गया है और सभी हाई-वैल्यू खातों की विशेष निगरानी शुरू कर दी गई है। जांच के बाद बैंक अधिकारियों ने प्राथमिकी दर्ज करा दी है।

  


घपले का मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद जांच शुरू हो गई थी। 2024 के मध्य पुष्टि होने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई। अब प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। बैंक की विजिलेंस इस मामले की जांच कर रही है। किस तरह घपला हुआ है। उसका पैटर्न चेक किया जा रहा है।

- संजय कुमार, सहायक महाप्रबंधक वाणिज्यिक शाखा एसबीआइ मुख्य शाखा





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