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गुटखा, सिगरेट पर नया टैक्स लगेगा, लोकसभा में पान मसाला इकाइयों पर सेस लगाने संबंधी विधेयक पारित

deltin33 2025-12-6 08:05:48 views 539
  

लोकसभा में पान मसाला इकाइयों पर सेस लगाने संबंधी विधेयक पारित



पीटीआई, नई दिल्ली। लोकसभा में शुक्रवार को स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025 ध्वनिमत से पारित हो गया। स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025 पान मसाला जैसे उत्पादों के निर्माण पर नया सेस लगाने का अधिकार देता है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य का विषय है और रक्षा केंद्रीय सूची में है। हमें आज की जरूरतों के अनुरूप रक्षा के लिए संसाधन जुटाने की जरूरत है।

उन्होंने राज्यों को आश्वासन दिया कि अर्जित राजस्व को स्वास्थ्य योजनाओं पर खर्च के लिए उनके साथ साझा किया जाएगा। सीतारमण ने कहा कि उपकर लगाने की संवैधानिक शक्ति अनुच्छेद 270 में निहित है, जो संसद को किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए उपकर लगाने का अधिकार देता है।
बिहार चुनाव में नहीं पाई गई कोई अनियमितता

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को चुनाव आयोग का हवाला देते हुए लोकसभा को बताया कि बिहार में विधानसभा चुनाव के संचालन में कोई अनियमितता नहीं पाई गई। एक लिखित उत्तर में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि किसी भी उम्मीदवार या उनके एजेंटों द्वारा पुनर्मतदान का अनुरोध नहीं किया गया था।

प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पांच मतदान केंद्रों के लिए वीवीपीएटी पर्चियों का अनिवार्य सत्यापन किया गया और ईवीएम की गणना में कहीं भी कोई विसंगति नहीं पाई गई। इसके अलावा 14 नवंबर को परिणाम घोषित होने के बाद किसी भी हारने वाले उम्मीदवार से ईवीएम की जांच और सत्यापन के लिए कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ।
वीवीपैट पर्चियां 8 नवंबर को कूड़े में फेंकी हुई पाई गईं

मेघवाल ने कहा कि चुनाव आयोग ने सूचित किया है कि समस्तीपुर में वीवीपैट पर्चियों के संबंध में बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने रिपोर्ट दी है कि सरायरंजन सीट से संबंधित कुछ कटी हुई और कुछ बिना कटी हुई वीवीपैट पर्चियां 8 नवंबर को कूड़े में फेंकी हुई पाई गईं।  

ये सभी मामले ईवीएम कमीशनिंग के दौरान किए गए माक पोल से संबंधित थे। कमीशनिंग के लिए नियुक्त सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र के तीन सहायक रिटर्निंग अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया।
जनहित में किया जाता है हाई कोर्ट के जजों का स्थानांतरण

सरकार ने शुक्रवार को कहा कि हाई कोर्ट के जजों के सभी स्थानांतरण बेहतर न्याय प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए जनहित में किए जाते हैं और ऐसे स्थानांतरणों के लिए कोई समय-सीमा नहीं है।

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण हेतु प्रक्रिया ज्ञापन (एमओपी) के अनुसार, हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के स्थानांतरण का प्रस्ताव प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) द्वारा सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों के परामर्श से शुरू किया जाता है।
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