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पंचकूला पुलिस ने फर्जी वीजा रैकेट का किया भंडाफोड़, 5 आरोपित दबोचे, राजस्थान-महाराष्ट्र और पंजाब तक नेटवर्क

deltin33 2025-12-5 17:38:58 views 954
  

लोगों को ठगने वाले आरोपितों और उनके बारे में जानकारी देती डीसीपी सृष्टि गुप्ता व अन्य पुलिस अधिकारी।



जागरण संवाददाता, पंचकूला। फिनलैंड, ऑस्ट्रेलिया और इटली में सपनों की नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पंचकूला पुलिस की एंटी इमिग्रेशन फ्राड यूनिट ने शिकंजा कस दिया।

इस हाई-प्रोफाइल गैंग के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक राष्ट्रीय स्तर का बाॅक्सिंग खिलाड़ी भी शामिल है। यह गिरोह देशभर के युवाओं को फर्जी वर्क वीजा और उड़ान तिथियों का लालच देकर लाखों रुपये डकार चुका था। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

गिरोह महाराष्ट्र, बिहार, पंजाब और दिल्ली में फर्जी दफ्तरों और नकली पहचान के जरिए वर्षों से युवाओं को ठग रहा था। हाल ही में राजस्थान में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए जयपुर में नया ऑफिस भी खोला गया था।

पुलिस ने बताया कि आरोपति फर्जी नामों से होटल बुक कराते और कई युवाओं को मुंबई के एक होटल में बंधक जैसी स्थिति में रखकर विदेश भेजने का झांसा देते थे।
शिकायत के बाद पुलिस हरकत में

सेक्टर-14, पंचकूला स्थित वेस्टएड वीजा साल्यूशंस की प्रतिनिधि ने डीसीपी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई कि उनके जानकार वीजा एजेंटों ने ग्राहकों के वर्क वीजा के नाम पर मुख्य आरोपति गुरचरण सिंह से संपर्क कराया।

उसने स्वयं को लाइसेंसधारक बताते हुए आठ युवाओं से 48,25,600 रुपये और उनके पासपोर्ट व दस्तावेज ले लिए। मार्च-अप्रैल में फर्जी उड़ान तिथियां भेजी गईं, लेकिन कोई उड़ान कभी तय नहीं हुई। बाद में आरोपति फरार हो गया।
दबिशों में हुई गिरफ्तारी

13 नवंबर से 30 नवंबर तक लगातार दबिशें देकर गिरोह की परतें उजागर की गईं। मुख्य आरोपित गुरचरण सिंह पंजाब के नवांशहर से पकड़ा गया। 25 नवंबर को दिल्ली से शहबाज उर्फ प्रजापति, अनिकेत उर्फ ऋषि उर्फ कार्तिक और अंशु कुमार रंगे हाथ गिरफ्तार किए गए।

30 नवंबर को समालखा (पानीपत) से अजय सेठी, जो पंकज शर्मा के नाम से काम कर रहा था, पकड़ में आया। जांच में सामने आया कि आरोपति शहबाज राष्ट्रीय स्तर का बाक्सिंग खिलाड़ी रहा है और अपनी छवि का फायदा उठाकर लोगों को भरोसे में लेता था।
आरोपितों से बरामद सामग्री

गिरोह से अब तक 40 पासपोर्ट, 4 फिनलैंड टीआरसी कार्ड, 8 मोबाइल फोन, 1 लैपटाॅप, 6 चेकबुक, कई नकली मुहरें, 10 एटीएम कार्ड, 6.75 लाख रुपये नकद और गुरचरण सिंह के खाते के 4 लाख रुपये फ्रीज बरामद हो चुके हैं।
पहले भी दर्ज कई ठगी के केस

डीसीपी सृष्टि गुप्ता के अनुसार, बरामद सामग्री से स्पष्ट है कि यह नेटवर्क लंबे समय से बड़े स्तर पर फर्जी वीज़ा रैकेट चला रहा था। गिरोह के सदस्यों के खिलाफ पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और सिरसा के अलग-अलग थानों में पहले भी कई ठगी के मामले दर्ज हैं।

गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा है और अन्य साथी भी इसमें शामिल हैं। उनकी तलाश जारी है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा। पंचकूला पुलिस की इस कार्रवाई को अब तक की सबसे बड़ी इमिग्रेशन फ्राॅड पकड़ माना जा रहा है, जिसने हजारों युवाओं को फर्जी रोजगार के सपने दिखाकर ठगने वाले जाल को तोड़ने की दिशा में बड़ा रास्ता खोला है।
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