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करियर अलर्ट: IVRI शुरू कर रहा नया मास्टर कोर्स, AI और रोबोटिक ट्रेनिंग से बनिए टॉप वाइल्ड लाइफ डॉक्टर

deltin33 2025-12-4 21:08:34 views 745
  

आइवीआरआइ



अनूप गुप्ता, जागरण, बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आइवीआरआइ) जल्द ही देशभर के लिए वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट तैयार करेगा। इसके लिए संस्थान मास्टर आफ वेटनरी साइंस (एमवीएससी) इन वाइल्ड लाइफ हेल्थ एंड मैनेजमेंट की पढ़ाई शुरू कराने जा रहा है। आने वाले समय में यहां से निकले वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट देश भर में सेवाएं देंगे। इस कोर्स के शुरू होने के बाद आइवीआरआइ देश के उन चुनिंदा संस्थाओं में शामिल हो जाएगा, जहां इसका अध्ययन कराया जाता है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

अभी तमिलनाडु, जबलपुर और केरला वेटनरी साइंस यूनिवर्सिटी में यह कोर्स पढ़ाया जा रहा है। देशभर में 56 चिड़ियाघर, 106 नेशनल पार्क और 573 वाइल्डलाइफ सेंचुरी हैं। आइवीआरआइ के विज्ञानियों का कहना है कि वन्यजीवों के स्वास्थ्य और उनकी बीमारियों के इलाज व समुचित देखभाल करने के लिए पूरी तरह से सक्षम वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट की काफी कमी है। इसकी बड़ी वजह यह है कि एमवीएससी इन वाइल्ड लाइफ हेल्थ और मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वाले देश में अभी तीन ही संस्थान हैं।

इसमें तमिलनाडु वेटनरी वेटनरी यूनिवर्सिटी, नानाजी देशमुख वेटनरी साइंस यूनिवर्सिटी (जबलपुर) और केरला वेटनरी यूनिवर्सिटी शामिल है। इसके अलावा भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून में एवीएससी की जगह सिर्फ एमएससी (मास्टर आफ साइंस इन वाइल्ड लाइफ) का अध्ययन ही कराया जाता है। ऐसे में वन्यजीव के लिए पूरी तरह से प्रशिक्षित और योग्य वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट तैयार नहीं हो पा रहा है। इसे देखते हुए यहां आइवीआरआइ एमवीएससी वाइल्ड लाइफ हेल्थ एंड मैनेजमेट का कोर्स शुरू कराने की औपचारिकता पूरी करा रहा है।

यह कोर्स इसी साल मई-जून तक शुरू होने की संभावना है, इसके लिए आइवीआरआइ के निदेशक डा. त्रिवेणीदत्त, कुलसचिव डा. राहुल राज और संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक) डा. एसके मेंदीरत्ता की संयुक्त टीम ने इसका प्रस्ताव तैयार किया है। जिससे आइवीआरआइ के बोर्ड आफ मैनेजमेंट को भी भेज दिया गया है। इसके बाद भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) को इसकी अंतिम स्वीकृति देनी है। इस कोर्स को शुरू कराने की पैरवी कर रहने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि लगभग सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
एआइ की मदद से रोबोटिक ट्रेनिंग को भी किया जा रहा शामिल

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी यानी एआइ का इस्तेमाल वन्यजीवों को बचाने और उनके इलाज में कर सकते हैं। इस कोर्स में इसे भी शामिल कर इसके काफी आधुनिक और उच्च बनाने की कोशिश की है। विज्ञानियों ने बताया कि एमवीएससी इस कोर्स करके वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट एआइ और रोबोटिक शिक्षा के जरिये वन्यजीवों के स्वास्थ्य और उनके उपचार को लेकर कुशलता और संवेदनशीलता के साथ कर सकेंगे।
देश के चुनिंदा संस्थाओं के वन्यजीव विशेषज्ञ भी दे चुके स्वीकृति

आइवीआरआइ ने एमवीएससी इन वाइल्ड लाइफ हेल्थ एंड मैनेजमेंट के कोर्स का जो खाका तैयार किया है, वह आधुनिक मानकों को पूरा कर रहा है या नहीं, इसके लिए संस्थान ने इसकी कापी को देश के चुनिंदा संस्थाओं के वन्यजीव विशेषज्ञों पास भेजा था।

आइवीआरआइ में वन्य प्राणी केंद्र के प्रभारी व प्रमुख विज्ञानिक डा. अभिजीत पावड़े ने बताया कि प्रस्ताव की प्रतिलिपि असम एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के पशु चिकित्सा महाविद्यालय के पद्मश्री डा. कुशल शर्मा, नानाजी देशमुख वेटनरी साइंस यूनिवर्सिटी जबलपुर से सेवानिवृत्त वन्यजीव विशेषज्ञ डा. एबी श्रीवास्तव, तमिलनाडु वेटनरी यूनिवर्सिटी में डा. श्रीकुमार, भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के डा. पराग निगम और केरला वेटनरी यूनिवर्सिटी में डा. चैंडी जार्ज को भेजी थी।

उनके गहन अध्ययन के बाद आइवीआरआइ के एमवीएससी इन वाइल्ड लाइफ हेल्थ एंड मैनेजमेंट के कोर्स को वन्यजीव को लेकर आधुनिक पढ़ाई के लिए अनुकूल मानते हुए अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके बाद इस कोर्स को शुरू करने का रास्ता भी साफ हो गया है।
अभी एक साल के आनलाइन डिप्लोमा से ही हो रही थी पढ़ाई

देश का बड़ा शोध संस्थान आइवीआरआइ अब तक केवल एक साल का नेशनल डिप्लोमा इन वाइल्ड लाइफ करा रहा था। इसमें वन्यजीवों से संबंधित पढ़ाई सीमित थी, इसलिए इसे लेकर विद्यार्थियों में कोई खास रुचि नहीं थी। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आफलाइन पढ़ाई में इसमें सिर्फ दो ही दाखिले हुए थे।

हालांकि वर्ष 2025 में संस्थान ने छात्रों में इसे लेकर दिलचस्पी पैदा करने के लिए आनलाइन पढ़ाई शुरू कराई तो अब 25 स्टूडेंट्स इस डिप्लोमा कोर्स मे पढ़ाई कर रहे हैं। हालांकि वर्ष 2015 से बैचलर आफ वेटनरी साइंस में तमाम दूसरे विषयों की पढ़ाई भी कराई जा रही है।
मास्टर प्रोग्राम के 22 विषयों में हैं करीब 400 छात्र

आइवीआरआइ अभी मास्टर प्रोग्राम के एमवीएससी में 22 विभिन्न कोर्स की पढ़ाई करा रहा है। इसमें करीब 400 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा पीएचसी में 19 विषयों में करीब 75 शोधार्थी शामिल हैं। संस्थान में 22 विभिन्न विभाग हैं। जिसमें लगभग 900 स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं। संस्थान कई और महत्वपूर्ण कोर्स शुरू करने की तैयारी कर रहा है। नैक से ए डबल प्लस की मान्यता मिलने के साथ इंस्टीट्यूट को नए आफलाइन और आनलाइन कोर्स शुरू करने में अब काफी आसानी होगी।

  


देशभर में वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट काफी कम है। इसे देखते हुए एमवीएससी इन वाइल्ड लाइफ हेल्थ एंड मैनेजमेंट कोर्स शुरू कराने की औपचारिकता को पूरा किया जा रहा है, ताकि चिड़ियाघरों, संरक्षित वन क्षेत्रों आदि के लिए वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट तैयार किया जा सकें।

- डा. त्रिवेणीदत्त, निदेशक, आइवीआरआइ





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