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एनआरसी दस्तावेज मांगे जाने पर लखनऊ से 160 संदिग्ध बांग्लादेशी फरार, मची है खलबली

LHC0088 2025-12-4 17:37:43 views 841
  

सफाई करते कर्मचारी:जागरण आर्काइव



अजय श्रीवास्तव, जागरण लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के घुसपैठियों को बाहर करने के फरमान के बाद संदिग्ध बांग्लादेशियों की निगरानी तेज होने का असर दिखने लगा है। योगी आदित्यनाथ सरकार की सख्ती के बाद सफाई कार्य से जुड़े संदिग्ध बांग्लादेशियों से एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर) नंबर मांगा गया तो वे दे नहीं पाए। यह नंबर असम सरकार की तरफ से दिया गया है, जिसमें पूर्वजों तक का जिक्र है, जो साबित करता है कि वे बांग्लादेशी घुसपैठिए नहीं हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

कूड़ा प्रबंधन का काम देख रही नगर निगम की तरफ से अधिकृत मेसर्स लखनऊ स्वच्छता अभियान प्रबंधन ने सफाई कर्मचारियों से एनआरसी नंबर मांगा तो 160 कर्मचारी नहीं दे पाए और नौकरी छोड़कर चले गए। इससे साफ है कि उनकी असम की नागरिकता संदिग्ध है। अब पुलिस और खुफिया तंत्र के लिए जांच का विषय यह भी है कि आखिर ये 160 कर्मी कहां गए और क्या कर रहे हैं। दरअसल सरकार की जांच से संदिग्ध बांग्लादेशियों मे भगदड़ मच गई है। लखनऊ नगर निगम के जोन एक से 38, जोन तीन से 12, जोन चार से 70, छह से 12 और सात से 36 सफाई करने वाले फरार हैं।

महापौर सुषमा खर्कवाल ने भी संदिग्ध बांग्लादेशियों को शहर से बाहर करने का एक वर्ष से अभियान चला रखा है। इंदिरानगर में बीते वर्ष उन्होंने संदिग्ध बांग्लादेशियों की बस्ती को उजाड़ दिया था। इसके बाद से लगातार अभियान चलाकर शहर में संदिग्ध बांग्लादेशियों की बस्तियों की जांच कराई गई थी। पिछले दो माह से सख्ती बढ़ने के साथ ही पुलिस ने भी नगर निगम में सफाई का ठेका पाई संस्थाओं से उन सफाई कर्मचारियों एनआरसी नंबर मांगा था, जो अपने को असम का निवासी बताते हैं, लेकिन अभी तक एनआरसी दे नहीं पाए हैं, जबकि नगर निगम के वार्ड एक, तीन, चार, छह, सात में कूड़ा प्रबंधन का काम देख रही मेसर्स लखनऊ स्वच्छता अभियान में काम कर रहे हैं।

असम का आधार कार्ड दिखाने वाले कर्मचारियों से एनआरसी मांगी गई तो वे नहीं दे पाए और दबाव पड़ने पर नौकरी छोड़कर ही भाग गए। कंपनी ने इसकी जानकारी महापौर को भी दी है। महापौर सुषमा खर्कवाल का कहना है कि काम छोड़कर गए कर्मचारियों की गतिविधियां पता करने के लिए कार्यदायी कंपनी से कहा गया है कि वह पुलिस को भी इसकी जानकारी के साथ ही मोबाइल नंबर और आधार कार्ड भी उपलब्ध करा दें।
सभी ठेकेदारों से मांगा गया है संदिग्ध बांग्लादेशियों के अभिलेख
लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने बताया कि नगर निगम की टीम लगातार झोपड़पट्टियों की सूची तैयार कर वहां रहने वालों का ब्योरा तैयार कर रही है। सभी ठेकेदारों से कहा संदिग्ध बांग्लादेशियों के अभिलेख जमा कराने को कहा गया है, जिसका परीक्षण पुलिस को भेजकर कराया जाएगा।
नगर निगम को उपलब्ध करा दी गई है सूची
मेसर्स लखनऊ स्वच्छता अभियान के सिटी हेड, अभय रंजन ने बताया कि काम छोड़कर गए 160 सफाई कर्मचारियों की सूची नगर निगम को उपलब्ध करा दी गई है। जिससे उनकी जांच पुलिस से कराई जा सके।
एनआरसी ही है, सही जानकारी का तरीका
आधार कार्ड तो लगभग सभी पास है, लेकिन एनआरसी उन्हीं के पास है, जो लंबे समय से असम के निवासी थे। एनआरसी असम के निवासियों और संदिग्ध बांग्लादेशी घुसपैठियों के बारे में हकीकत बता देगा। इसी तरह की जांच कराने के लिए अस्पतालों में भी निगरानी के लिए महापौर ने सीएमओ को पत्र लिखा है।
हिंदू बनकर रह रही बांग्लादेशी महिला को एटीएस ने किया गिरफ्तार
ठाकुरगंज के बरौरा हुसैनबाड़ी में हिंदू बनकर रह रही बांग्लादेशी महिला को आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) ने पिछले सप्ताह ही गिरफ्तार किया है। नरगिस उर्फ जैसमीन उर्फ निर्मला वर्ष 2006 में पश्चिम बंगाल के रास्ते अपने बांग्लादेशी पति शमीर के साथ भारत में दाखिल हुई थी। नरगिस उर्फ जैसमीन उर्फ निर्मला मूल रूप से बांग्लादेश के जलोंकाठी के सदर उबावकाठी स्थित नाबेगांव क्रक्श बाजार निवासी है। उसका फर्जी दस्तावेज बनवाने वाला हरिओम आनंद भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया था। उसने काकोरी के दुर्गागंज अमेठिया स्थित सलेमपुर में शमीर से निकाह भी किया था। ठाकुरगंज में निर्मला नाम रखकर रह रही थी और पूजा पाठ करने के साथ ही हिंदुओं के त्योहार भी मनाती थी।
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