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दिल्ली की 2400 वक्फ संपत्तियों पर संकट, पंजीकरण की डेडलाइन खत्म और एक भी एंट्री नहीं हुई पूरी

cy520520 2025-12-4 01:39:55 views 1248
  Waqf



नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। इंटरनेट आधारित पंजीकरण प्रक्रिया के सुस्त चाल से दिल्ली की हजारों वक्फ संपत्तियों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। वक्फ बोर्ड सूत्रों के अनुसार, अब तक दिल्ली में मौजूद 2,400 से अधिक वक्फ संपत्तियों में से एक का भी पंजीयन उम्मीद पोर्टल पर नहीं हो सका है, जबकि वक्फ संशोधन कानून के मुताबिक पोर्टल पर पंजीकरण की अंतिम तिथि पांच दिसंबर तक है, जिसमें अब एक दिन ही शेष है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
स्वीकृति के बाद उसे पंजीकृत माना जाएगा

दिल्ली वक्फ बोर्ड के सूत्रों के अनुसार, अब तक प्रारंभिक चरण में आवेदन की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पाई है। दो दिसंबर तक करीब 1,900 संपत्तियों का आवेदन हो चुका है। अधिकारी के अनुसार, पंजीकरण की तीन प्रक्रिया तय है। पहले आवेदन, उसके बाद राजस्व अधिकारियों द्वारा सत्यापन व तीसरे चरण में वक्फ बोर्ड की स्वीकृति के बाद उसे पंजीकृत माना जाएगा।
पोर्टल के धीमे चलने की शिकायत

वक्फ बोर्ड के एक अधिकारी के अनुसार, दिल्ली में वक्फ बोर्ड भंग है। अध्यक्ष व समिति नहीं है, ऐसे में अधिकारी व कर्मी ही पंजीकरण की प्रक्रिया को जारी रखे हुए हैं। अधिकारी सफाई देते हुए कहते हैं कि पोर्टल में पंजीकरण में वक्फ संपत्तियों के बारे में विस्तृत व सूक्ष्म जानकारी तथा दस्तावेज मांगें गए हैं, जिन्हें जुटाने तथा भरने में वक्त लग रहा है। कई संपत्तियों के दस्तावेज तथा जानकारी अधूरी है। उस कारण भी उनका पंजीयन में देरी है। उसी तरह, पोर्टल के धीमे चलने की शिकायत बनी हुई है।
न के बराबर काम कर रहा

अधिकारी कहते हैं कि वक्फ संशोधन कानून के अनुसार, पांच दिसंबर तक पंजीकरण प्रक्रिया पूरी नहीं होने की स्थिति में वक्फ संपत्तियों के मुतव्वली (प्रबंधक) द्वारा मामले को वक्फ ट्रिब्यूनल में ले जाने का प्रविधान है। दिल्ली में वक्फ ट्रिब्यूनल गठित नहीं है। ऐसे में यह प्रकरण आगे पेचीदा होने वाला है।

इस मामले में जमात-ए-इस्लामी हिंद के सह सचिव व वक्फ पंजीयन हेल्प डेस्क के संयोजक इनामुर रहमान कहते हैं कि पंजीयन के लिए तय अवधि में प्रक्रिया पूरी कर ली गई होती, अगर पोर्टल सही तरीके से काम करता, लेकिन उसमें काफी दिक्कतें आई। पिछले कुछ दिनों से तो वह न के बराबर काम कर रहा है।

साक्ष्यों के साथ यह तथ्य रखते हुए मुस्लिम संगठनों ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय से पंजीकरण प्रक्रिया की अवधि को बढ़ाने का अनुराेध किया है। वैसे, एक दिसंबर को इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम संगठनों को कोई राहत देने से इंकार कर दिया है। इनामुर रहमान के अनुसार, यह व्यवहारिक दिक्कत पूरे देश में पंजीकरण प्रक्रिया में आ रही है।

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