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भारतीय संस्कृति को जाति, धर्म और आस्था के आधार से नहीं किया जा सकता परिभाषित : राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान

deltin33 2025-12-1 04:37:32 views 908
  



जागरण संवाददाता, कानपुर। हिंदी प्रचारिणी समिति, कानपुर द्वारा आयोजित अखिल भारतीय सर्व भाषा साहित्यकार सम्मेलन एवं अलंकरण समारोह में बिहार के राज्यपाल महामहिम आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि भारतीय संस्कृति को जाति, धर्म या आस्था के आधार पर परिभाषित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति आत्मा से परिभाषित होती है, क्योंकि शरीर में निवास करने वाली वही परम चेतना हमारी एकता और आध्यात्मिकता की आधारशिला है। रंग, रूप, भाषा या भेदभाव भारतीय संस्कृति के मूल तत्व नहीं हैं, बल्कि समरसता, करुणा और सत्य इसका वास्तविक स्वरूप है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

राज्यपाल ने कहा कि दुनिया की सभी भाषाएँ देवियों के समान पूज्य हैं और भारत में बोली जाने वाली हर भाषा सम्मान की पात्र है। उन्होंने साहित्यकारों से आह्वान किया कि वे ऐसी साझा भाषा के विकास में योगदान दें जो देश को और अधिक जोड़ सके।
कार्यक्रम में हिंदी प्रचारिणी समिति द्वारा डॉ. श्याम नारायण पांडेय की स्मृति में स्मृति कीर्ति कौस्तुभ अलंकरण प्रदान किया गया।

मंच पर मंजू सिंह के उपन्यास सुनहरी धूप तथा उद्योगपति नरूला जी की पुस्तक अनंत मर्यादा तत्व का विमोचन भी किया गया। तिरंगा अगरबत्ती निर्माता डॉ. नरेंद्र शर्मा, हास्य कलाकार अन्नू अवस्थी, निर्मल तिवारी और ब्लॉक प्रमुख अनुराधा अवस्थी सहित अनेक विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।

उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने साहित्य की भूमिका पर कहा कि किसी भी काल के कवि और लेखक समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं। वहीं कल्याणपुर विधायक नीलिमा कटियार ने कहा कि जब समाज साहित्य से जुड़ता है, तब मानवता को नई ऊर्जा प्राप्त होती है।


समिति अध्यक्ष नरेश चंद्र पांडेय,महामंत्री राजीव रंजन पांडेय ने बताया कि संस्था पिछले 59 वर्षों से भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और साहित्यिक वातावरण के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही
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