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Delhi Blast: कानपुर में कश्मीरी छात्रों पर नजर, HBTU, CSJMU सहित इन संस्थानों से लिया गया ब्योरा

deltin33 2025-11-27 01:28:43 views 913
  

डाक्टर मोहम्मद आरिफ व डाक्टर शाहीन। इंटरनेट मीडिया






जागरण संवाददाता, कानपुर। दिल्ली ब्लास्ट में कानपुर का संबंध आने के बाद से एनआईए और एटीएस लगातार यहां डेरा डाले हैं। शाहीन की गिरफ्तारी के बाद कार्डियोजाली से पकड़ा गया डा. मोहम्मद आरिफ मीर का कानपुर में नेटवर्क तलाशना शुरू कर दिया गया है। ऐसे में कार्डियोलाजी सहित एचबीटीयू और सीएसजेएमयू सहित अन्य शिक्षण संस्थानों से भी कश्मीरी छात्रों का ब्योर जुटाया जा रहा है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें


जीएसवीएम मेडिकल कालेज व कार्डियोलाजी में पढ़ने व नौकरी करने वाले जम्मू-कश्मीर के मेडिकल छात्रों व डाक्टरों का इतिहास जांच टीमें खंगाल रही हैं। सभी के आपसी संवाद की भी जांच की जा रही है। कार्डियोलाजी में वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के छह डाक्टर डाक्टरेट आफ मेडिसिन (डीएम) की पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं, जीएसवीएम मेडिकल कालेज के रेजिडेंट व प्रवक्ता पद पर काम कर रहे लोगों पर भी खुफिया एजेंसियों की नजर है। खासतौर पर डा. शाहीन के समय में कालेज परिसर में रहने वाले प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसर का डाटा भी खंगाला जा रहा है।

  
इन छात्रों का जुटाया ब्योरा

डा. आरिफ के पकड़े जाने के बाद कानपुर में रहने वाले कश्मीरी मूल के भी कई लोग शक के दायरे में हैं। एजेंसियों ने इसी आधार पर अब तक कश्मीरी मूल के करीब 15 लोगों से पूछताछ की है। हालांकि, इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी तरह, तकनीकी व शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे एचबीटीयू के 52, सीएसजेएमयू के चार, जीएसवीएम मेडिकल कालेज के तीन व कार्डियोलाजी के सात समेत कश्मीरी मूल के 66 छात्रों का ब्योरा भी एजेंसियों ने लिया है।

  

  
खुलने लग ये राज

जीएसवीएम मेडिकल कालेज में वर्ष 2006 से 2013 तक लगभग आठ साल फार्माकोलाजी की प्रवक्ता रही डा. शाहीन के साथी डा. मो. आरिफ मीर को एटीएस की टीम ने पकड़ा तो राज खुलने लगे हैं। लक्ष्मीपत सिंहानिया हृदय रोग संस्थान (कार्डियोलाजी) के निदेशक डा. राकेश वर्मा के अनुसार, पूरे समय वह इमरजेंसी में काम करने के बाद अपने अशोक नगर स्थित फ्लैट में जाता था। श्रीनगर में प्रारंभिक पढ़ाई व एमबीबीएस करने वाले मो. आरिफ को नीट एसएस परीक्षा में 1608 रैंक मिली थी।

  

  
कानपुर के कुछ लोग सीधे संपर्क में थे

एजेंसियों ने डा. आरिफ की पिछले एक साल की मोबाइल सीडीआर (काल डिटेल रिपोर्ट) और लोकेशन भी निकलवाई है। यही नहीं आरिफ के मोबाइल से मददगारों की एक लंबी लिस्ट मिली है। इसमें कानपुर के कुछ ऐसे भी नाम हैं जो डा. शाहीन के सीधे संपर्क में थे। ऐसे में आशंका है कि डा. शाहीन ने स्थानीय मददगार के रूप में इन लोगों को डा. आरिफ से मिलवाया हो।
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